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मेरे शहीद भाई का चेहरा तो दिखा दो

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रोहित अग्रवाल
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शामली। सुबह साढ़े छह बजे का वक्त। बनत कस्बे में शहीद प्रदीप का शव जैसे ही उसके घर के पास एक चौपाल पर पहुंचा तो उसकी बहन और पत्नी बिलखती हुई चली आईं। बहन ने वहां मौजूद जवानों की तरफ देखकर कहा मेरे भाई का चेहरा तो दिखा दो, मगर वहां खड़े अफसर एक-दूसरे की तरफ देखने लगे। उसने शव के पास रखा प्रदीप का फोटो उठाकर अपने कलेजे से लगा लिया। इसके बाद वो इस तरह बिलखकर रोई कि वहां खड़े अफसर और सीआरपीएफ के जवान भी अपने आंसू नहीं रोक सके।
शव के गांव में पहुंचने से पहले ही हजारों की संख्या में लोग शहीद प्रदीप को श्रद्धांजलि देने पहुंच चुके थे। डीएम अखिलेश सिंह, एसपी अजय कुमार भी यहां आ चुके थे। सुबह साढ़े छह बजे शव कस्बे में पहुंचा। साथ में आरएएफ और सीआरपीएफ के कमांडेंट आदि अफसर भी थे। शव को घर के पास बनी चौपाल पर जनता दर्शन को रखा गया। सीआरपीएफ के प्रदीप की एक फोटो साथ लाए थे। उन्होंने ताबूत में बंद शव के पास फोटो रख दिया। फूल मालाएं लगाई जा चुकी थी। शव आने का पता चलते ही घर में मौजूद प्रदीप की बहन आरजू और पत्नी शर्मिष्ठा नंगे पैर ही चौपाल पर दौड़ी चली आई। शव ताबूत में बंद था। आरजू ने कहा कि इसे खोलो। मुझे भाई को देखना है। मेरे भाई का चेहरा तो दिखा दो। आरजू की बात सुनकर वहां खड़े अफसर एक दूसरे की तरफ देखने लगे। ये देख शायद आरजू और प्रदीप की पत्नी शर्मिष्ठा भी समझ गई कि शायद नियम कायदों की वजह से ये संभव नहीं है। इसके बाद वो पास में रखी अपने शहीद भाई की फोटो को कलेजे से लगाकर बिलख पड़ी।
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बहन को बिलखता देख बढ़ गया जनाक्रोश
एक बहन को अपने भाई के लिए बिलखता देख वहां खड़े हजारों लोग भी गम और गुस्सा बढ़ गया। उन्होंने आक्रोशित होकर पाकिस्तान मुर्दाबाद और जवानों की शहादत का बदला लो बदला लो के नारे लगाने शुरू कर दिए। लोगों ने जब तक सूरज चांद रहेगा प्रदीप तेरा नाम रहेगा के खूब नारे लगाए। लोगों का कहना था कि अब बातचीत का नहीं बल्कि आरपार का वक्त है।
बाद में बुलाकर दिखाया चेहरा
अफसरों ने भी प्रदीप की बहन और पत्नी की भावनाओं की कद्र की। वे भी समझ गए कि ऐसे में एक बहन और पत्नी पर क्या बीतती है। प्रदीप के चचेरे भाई उमेश ने बताया कि बाद में अंत्येष्टि स्थल पर परिजनों के माध्यम से दोनों को बुलवाया गया और वहां प्रदीप का चेहरा उन्हें दिखाया।

पिता को श्रद्धांजलि देकर बिलख पड़ा सिद्धार्थ
जनता दर्शन के दौरान अपने अपने शहीद पिता को श्रद्धांजलि देने आए बडे़ पुत्र सिद्धार्थ ने जैसे ही पिता के शव पर पुष्पांजलि दी। तो वह बिलख बिलख कर रो पड़ा। लोगों से उसे संभाला। बाद में उसने अपने पिता के शव को मुखाग्नि दी। सिद्धार्थ का कहना था कि पापा की शहादत का बदला लेना चाहिए। सरकार को बातचीत नहीं बल्कि इस बार पाकिस्तान से आरपार कर देना चाहिए ।
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कई बार भावुक हुआ माहौल
शामली। श्रद्धांजलि के दौरान परिवार के सदस्यों का हाल देख कई बार माहौल भावुक हुआ। शव के पास आते ही परिवार और रिश्तेदार बिलखते तो वहां सन्नाटा पसर जाता। वहां का भावुक माहौल देख खुद एसपी अजय कुमार कई बार भावुक हुए। उन्होंने कुछ लोगों को तो गले लगाकर सांत्वना दी। परिजनों को समझाया कि ये सरकार शहादत का बदला जरूर लेगी।
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