पांच बच्चों में फाइलेरिया की पुष्टि के बाद अलर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
शामली। जिले में पांच बच्चों में फाइलेरिया (हाथी पांव) की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य निदेशालय भी अलर्ट हो गया है। लखनऊ से संयुक्त निदेशक की टीम ने शामली में डेरा डाल दिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव-मोहल्ले में नाइट सर्वे करेगी और पीड़ित बच्चों की स्लाइड बनाएगी।
स्वास्थ्य विभाग की टीम को स्कूलों में कैंप के दौरान पांच बच्चों में फाइलेरिया के लक्षण मिले थे। जिला मलेरिया अधिकारी डॉक्टर विनय कुमार के अनुुसार प्रारंभिक जांच से पता चला कि इन बच्चों के अंदर इस बीमारी का परजीवी मौजूद है। इसी को देखते हुए लखनऊ से संयुक्त निदेशक डॉक्टर विकास सिंघल की टीम शामली में डेरा डाले हुए हैं। टीम में शामिल अमित शुक्ला ब्लड जांच के स्पेशलिस्ट हैं। यह टीम ही नाइट स्टे कर मरीजों के रक्त की जांच की जाएगी। जिले में जिन पांच बच्चों की प्रारंभिक जांच में इसकी पुष्टि हुई है, वे शामली शहर के पंसारियान मोहल्ले के अलावा गांव भैंसवाल, भाजू, झाल, कैराना के कसरेवा खुर्द गांव के रहने वाले हैं। अब इन गांवों में स्वास्थ्य टीम जाकर इन बच्चों के ब्लड सैंपल लेगी। स्वास्थ्य निदेशालय स्तर पर भी इसकी दैनिक रिपोर्ट जनपदों से मांगी जा रही है।
कैसे फैलता है रोग
फाइलेरिया को हाथी पांव रोग भी कहा जाता है। ये रोग क्यूलेक्स मच्छर काटने की वजह से होता है। इस मच्छर के काटने से पुवेरिया नाम के परजीवी शरीर में जाने से ये रोग होता है। वयस्क मच्छर छोटे-छोटे लार्वा को जन्म देता है, जिन्हें माइक्रो फाइलेरिया कहा जाता है। ये मनुष्य के रक्त में रात के समय एक्टिव होता है। इस कारण स्वास्थ्य टीम रात में ही पीड़ित का ब्लड सैंपल लेगी।
48 घंटे में रिपोर्ट
नाइट सर्वे में लिए गए रक्त के नमूने की जांच में ये पता किया जाता है कि मरीज के रक्त में परजीवी की संख्या कितनी है। जांच रिपोर्ट 48 घंटे में मिल जाएगी। इसके बाद मरीज का उपचार शुरू होगा। मरीज की 12 दिन की दवा चलती है जो इस बीमारी के परजीवी को मार देती है।
घबराएं नहीं, सरकारी अस्पताल जाएं
जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि यदि किसी को इस बीमार के लक्षण नजर आते हैं तो वे घबराएं नहीं। स्वास्थ्य विभाग के पास इसका पूरा उपचार उपलब्ध है। विभाग स्तर पर मरीज का पूरा उपचार निशुल्क होता है। इसलिए सीधे सरकारी अस्पताल जाएं। ।
ऐसे करें बचाव
रात को सोते वक्त मच्छरदानी प्रयोग करें।
पूरी बाजू के कपड़े पहने।
आसपास गंदगी या कूड़ा जमा ना होने दें।
नालियों में पानी रुकने ना दें।
इस रोगी दवा खाली पेट नहीं लेनी चाहिए।