जलालाबाद (शाहजहांपुर)। जलालाबाद इलाके में बड़े भाई और चाचा ने मिलकर युवक को इतना पीटा कि उसकी मौके पर मौत हो गई। युवक का कसूर केवल इतना कि वह बनारस से एक महिला को लेकर आया था, जिसे घर में बतौर पत्नी रख रहा था। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार हो गए। पुलिस ने मृतक के पिता की तहरीर पर गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज की है।
जलालाबाद थाना क्षेत्र के बसुआमई गांव निवासी जगदीश का सबसे छोटा बेटा रामदयाल उर्फ ऐबी (22) करीब एक साल पहले बनारस से पिंकी नाम की महिला को लाया था, जिसे बतौर पत्नी अपने घर में रख रहा था। महिला के साथ उसके दो बेटे भी आए थे, जिनमें एक की उम्र छह साल और दूसरे की चार वर्ष है। मां वंशवती ने बताया कि उनका बड़ा बेटा राजेंद्र इसके खिलाफ था। वह रामदयाल से महिला को रखने का विरोध करता था। इसको लेकर कई बार रामदयाल और राजेंद्र के बीच झगड़ा हुआ था।
वंशवती ने बताया कि बुधवार रात करीब नौ बजे दोनों भाई शराब के नशे में थे। तभी दोनों के बीच गाली गलौज होने लगी। उन्हें झगड़ते देख वह पति जगदीश के मिलकर साथ बचाना चाहा। लेकिन इसी बीच पड़ोस के मकान में रहने जगदीश का छोटा भाई रामू वहां पहुंच गया। वह राजेंद्र का पक्ष लेने लगा। इस पर कहासुनी और बढ़ गई। इससे रामू ने लाठी से हमला कर दिया, जो रामदयाल के सिर में लगी। इससे घायल हुआ रामदयाल खुद को बचाने के लिए घर के अंदर भाग गया। पीछे से दौड़े रामू ने पकड़कर रामदयाल को घर के कमरे में गिरा लिया। तभी राजेंद्र ने ईंट से रामदयाल के सीने पर ताबड़तोड़ कई बार किए, जिससे उसकी मौके पर मौत हो गई। उसे मरा देख रामू और राजेंद्र घर से फरार हो गए।
सूचना मिलने पर जलालाबाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने पूछताछ के बाद शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेज दिया। पिता जगदीश की ओर से तहरीर लेकर पुलिस ने रामदयाल के बड़े भाई राजेंद्र व चाचा रामू के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की धारा 304 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली। हलका इंचार्ज धर्मप्रकाश सिंह ने बताया कि दोनों भाइयों के बीच महिला को लेकर झगड़ा हुआ था। रामू बड़े भतीजे राजेंद्र का पक्ष ले रहा था, जिससे झगड़ा बढ़ गया। फिलहाल दोनों आरोपियों के ख़िलाफ़ धारा 304 के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
साल भर पहले महिला को लेकर गांव आया था रामदयाल
जलालाबाद। पिंकी बनारस की एक प्लास्टिक का सामान बनाने वाली फैक्ट्ररी में काम करती थी। उसके दो बेटे हैं। उसका पति बीमार रहता था। तीन साल पहले बसुआमई का रामदयाल भी उसी फैक्ट्ररी में काम करने पहुंच गया। इसी दौरान पिंकी के पति की मौत हो गई। साथ काम करने से रामदयाल और पिंकी के बीच जान पहचान हुई और कुछ ही दिनों में नजदीकियां बढ़ गईं। एक साल पहले रामदयाल दोनों बच्चों समेत पिंकी को अपने साथ गांव ले आया। वह दोबारा बनारस जाने के बजाय गांव में मजदूरी करके पिंकी और उसके बेटों को आराम से रख रहा था। पिंकी को लगा कि बच्चों को सहारा मिलने के साथ उसका जीवन भी ठीक कट जाएगा। रामदयाल के इस फैसले से उसके माता-पिता को कोई शिकायत नहीं थी। मगर राजेंद्र इसका विरोध करता था। संवाद