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मेरे भाई-मेरे दोस्त नाटक ने दिया हिन्दू-मुस्लिम एकता एवं गंगा-जमुनी तहजीब का संदेश

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शाहजहांपुर के गांधी भवन में मेरे भाई -मेरे दोस्त नाटक का मंचन करते रंगकर्मी । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। टैलेंट मेकर नाट्य कला समिति के कलाकारों ने नाटक ‘मेरे भाई-मेरे दोस्त’ का भावपूर्ण मंचन किया। इसके माध्यम से कौमी एकता व गंगा-जमुनी तहजीब को बरकरार रखने का संदेश दिया गया। नाटक देखने गांधी भवन प्रेक्षागृह में उमड़े दर्शकों ने सराहना करते हुए कालाकारों का उत्साह बढ़ाया।
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नाटक में दिखाया गया कि तहजीब और नजाकत के शहर लखनऊ के डॉ. मिर्जा के परिवार रहता है। डॉ. मिर्जा एक सम्मानित, जज्बाती और देशभक्त इंसान हैं। उनका सम्मान शहर के प्रत्येक वर्ग और धर्म के लोग करते हैं। डॉ. मिर्जा के घर उनके अजीज दोस्त मरहूम अनवर का बेटा यासीन आता है। यासीन व डॉ. मिर्जा की बेटी गेसू एक-दूसरे से मोहब्बत करने लगते हैं। यासीन अपने दोस्त हरीश के साथ मिलकर साजिश करके दंगा फसाद फैला देता है।
तब उसकी असलियत सामने आती है, वह आईएसआई का जासूस है। इससे डॉ. मिर्जा व गेसू को सदमा पहुंचता है। हिंदू-मुस्लिम भाईचारा देखकर यासीन आश्चर्य में पड़ जाता है। इसके बाद वह पश्चाताप करता है। दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं। इससे पहले मुख्य अतिथि पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन राजकुमार पिथौरिया, विशिष्ट अतिथि पीडब्ल्यूडी एक्सईएन निर्माण खंड-1 राजेश चौधरी, एई अजय कुमार, डॉ. एमपी सिंह ने दीप जलाकर नाटक का शुभारंभ किया।
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नाटक के लेखक दयाप्रकाश सिन्हा, निर्देशक हंसराज विकल और सह निर्देशक भावना सिंह हैं। अनिल कुमार, सोनम शुक्ला, ईशिका श्रीवास्तव, करन कुमार, अमोद कुमार, वरुण गुप्ता, अनमोल राठौर एवं राज इत्यादि कलाकारों ने अभिनय किया।
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