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बेबसी...लाचारी वाली रात ताउम्र रहेगी सदफ, एंजिला और इंतेसाम को याद

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यूक्रेन बार्डर पार करने के बाद रोमानिया पहुंची इंतेसाम उर्फ जिया अपने दोस्तो के साथ घर भेजी गई व? - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। रविवार की रात इंतेसाम खान उर्फ जिया, सदफ और एंजिला को ताउम्र याद रहेगी। बेबसी...लाचारी और उदासी के बीच मुश्किल समय को तीनों ने काटा। कड़ाके की सर्दी और आसमान से गिरती बर्फबारी के बीच घंटों खड़ीं रहीं छात्राएं कभी भावुक हुईं तो कई बार अपनों को याद कर आंखों से आंसू गिरने लगे। रात ढाई बजे रोमानिया बॉर्डर को पार करने के बाद राहत की सांस ली। खाना खाने के साथ आराम की नींद लेकर परिजन को हिम्मत दी कि अब घबराना नहीं, दो-तीन दिन में घर वापसी हो जाएगी।
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मोहल्ला खलीलगर्बी निवासी डॉ. मजीद की बेटी इंतेसाम उर्फ जिया, मोहम्मद जई निवासी रहबर की बेटी एजिला और रंगीन चौपाल निवासी सलीमुद्दीन की बेटी सदफ यूक्रेन के विनिस्तिया से बस के जरिये सुबह चार बजे बॉर्डर पर पहुंच गईं थीं। बॉर्डर से चार किलोमीटर दूर बस ने उतार दिया। बम और मिसाइलों की सहमा देने वाली आवाजों के बीच सो नहीं पाने वालीं तीनों छात्राओं ने पैदल ही सफर को पूरा किया। एक-एक कदम आगे चलना मुश्किल हो रहा था। बॉर्डर पर पहुंचने के बाद भी उनकी मुश्किलें कम नहीं हो रही थी। उन्हें प्रवेश नहीं दिया गया।
सैकड़ों छात्र-छात्राएं प्रवेश के लिए लाइन लगाए हुए थे। कई रातों की जागीं और थकीं छात्राओं को खड़े-खड़े सुबह से शाम हो गईं। उनका एक-एक पल काटना मुश्किल हो रहा था। धीरे-धीरे रात होना शुरू हुई। तेज सर्द हवा के साथ आसमान से बर्फबारी शुरू हो गईं। तेज हवा जहां चुभ रही थी। वहीं बर्फबारी ने भी शरीर को ठंडा कर दिया था। इस मुश्किल समय में बहुत-सी छात्राएं रो पड़ीं। कई ने अपनों को याद कर ईश्वर से घर पहुंचने की प्रार्थना की।
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रात ढाई बजे बार्डर खुला तो एक-एक कर चेकिंग के बाद सभी को बॉर्डर पार कर रोमानिया में प्रवेश दिया। वहां पहुंचने के बाद छात्राओं ने राहत की सांस ली। इंतेसाम उर्फ जिया का मैसेज रात में आने के बाद पिता डॉ. मजीद और उनकी बेगम शाकरा बेगम ने राहत की सांस ली। डॉ. मजीद ने बताया कि टेंट में बहुत बेहतर इंतजाम हैं। खाने-पीने के साथ बेटियों को कंबल भी दिए हैं। दोपहर में तीनों को टेंट से हटाकर स्टेडियम ले जाएंगे। वहां से दो या तीन दिन में वापस आने की संभावना है।
भीड़ रोकने को सुरक्षाकर्मियों ने किया बलप्रयोग
रात 12 बजे यूक्रेन बॉर्डर पर सेना की गाड़ियों को पास करने के लिए गेट खुलने पर छात्र-छात्राओं की भीड़ ने दौड़ लगा दी। डॉ. मजीद बताते हैं कि भीड़ को रोकने के लिए सैन्य कर्मियों को बल का प्रयोग करना पड़ा था। वैसे भारतीय छात्रों के साथ काफी अच्छा व्यवहार किया जा रहा है।
‘या अल्लाह...बेटे की वतन वापसी पर पढ़ेंगे शुक्राने की नमाज’
शाहजहांपुर। पापा...खतरे के तीन सायरन बजते ही हम बंकर में आ गए हैं। यहां पर भीषण युद्ध छिड़ा है। बम और मिसाइलों के दागने की आवाजें आ रही हैं। सेना के टैंकर और लड़ाकू विमान भी लगातार गुजर रहे हैं। आप फिक्र नहीं करना। हम पूरी तरह से सुरक्षित हैं। यह मेसेज पढ़कर महमंद जंगला निवासी मोहम्मद आसिफ और बेगम सबिहा के आंसू निकल आए। हाथ उठाकर दुआ कि या अल्लाह...बेटे की सकुशल वापसी पर शुक्राने की नमाज अदा करेंगे।
खारकीव में हॉस्टल के बंकर में युद्ध विराम का इंतजार कर रहे मोहम्मद सानी ने सुबह पौने तीन बजे अपने पिता मोहम्मद आसिफ को मेसेज किया। उन्होंने बताया कि यहां भीषण लड़ाई चल रही है। आम नागरिकों को बाहर निकलने पर पाबंदी है। कर्फ्यू लगा है। हम लोग सुरक्षा की लिहाज से हास्टल के बंकर में आ गए हैं। बकौल आसिफ, बेटे को खाने-पीने की कोई दिक्कत नहीं है। वह सारी व्यवस्था हास्टल के स्तर से हो रही हैं। फिर भी काफी चिंता सता रही है। यूक्रेन के दूतावास से कोई राहत नहीं मिली है। बेटे की वापसी के लिए सोमवार को प्रदेश सरकार के हेल्प लाइन नंबर पर कॉल की थी। वहां से यूक्रेन के दो नंबर दिए गए हैं। उम्मीद है कि कोई बचाव कार्य जरूर शुरू होंगे।
अब तो बेटों के पास पैसे भी खत्म होने लगे
आनंदपुरम कॉलोनी निवासी संजय वर्मा के बेटे दीपांशु वर्मा और अभिषेक भी खारकीव में फंसे हुए हैं। सोमवार सुबह चार बजे बेटे दीपांशु ने मेसेज कर पिता संजय को पूरी बात बताई। संजय ने बताया कि हालात काफी खराब होने के कारण दोनों बेटे बंकर में हैं। वहां से निकलने की कोई व्यवस्था नहीं है। बेटों के पास रुपये खत्म हो रहे हैं। यहां से रुपये भेजें भी तो वहां एटीएम खाली पड़े हैं। हालांकि फ्लैट में बच्चों के पास खाने-पीने की पूरी व्यवस्था हैं।
‘पापा...दो-चार दिन में दिल्ली आने की तैयारी कर लो’
शाहजहांपुर। पशुपालन विभाग के वरिष्ठ लिपिक जियाउद्दीन अंसारी के बेटे जिया सकलैन अंसारी ने कर्फ्यू में ढील होते ही कीव से निकलकर लवीव जाने वाली ट्रेन पकड़ ली है। वहां से रोमानिया जाकर भारत आने की संभावना बन रही है। रविवार रात यूक्रेन की सुरक्षा एजेंसी ने मेसेज किया था कि कर्फ्यू हटते ही समूह में रेलवे स्टेशन पर पहुंचें। रात में कर्फ्यू में ढील होते ही जिया सकलैन अंसारी अपने साथियों के साथ कीव से निकलकर सीधे रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। वहां ट्रेन पर सवार हो गए। दोपहर दो बजे ट्रेन चली।
जियाउद्दीन ने बताया कि कीव से चलने के बाद रात में बेटा लवीव पहुंचेगा। वहां से बस द्वारा रोमानिया बॉर्डर तक पहुंचने की तैयारी है। जिया अंसारी ने मैसेज कर अपने पापा से दो से चार दिन में दिल्ली उन्हें लेने की तैयार रहने की बात कही है। जियाउद्दीन ने बताया कि यूक्रेन में कीव में हालात काफी ज्यादा खराब है। बेटे को दूतावास जाना था। वहां के वीडियो लगातार आने पर अव्यवस्था देखकर वहां नहीं गया। बेटे के कीव से निकलने पर जियाउद्दीन व उनकी पत्नी ने राहत की सांस ली है।
जया से मिलने के लिए दिल्ली रवाना हुए परिजन
तिलहर। मोहल्ला बहिदुल्लागंज निवासी डॉ. चूड़ामणि और राधारानी की पुत्री जया सोमवार सुबह छात्रों की टीम के साथ रोमानिया पहुंची। यहां पर उसकी मेडिकल जांच की गई है। उधर, जया की मां राधा रानी का हाल बेहाल है। वह अपनी बेटी से मिलने के लिए परिजन के साथ दिल्ली प्रस्थान कर गई हैं। उम्मीद है कि जया जल्द ही भारत आ सकती है।
डॉ. चूड़ामणि और उनकी पत्नी राधा रानी की जया इकलौती संतान है। बेटी को डॉक्टर बनाने की ख्वाहिश लेकर 2019 में यूक्रेन एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए भेजा था। परिजन ने बताया पिछले नव वर्ष 2021 में जया यूक्रेन से तिलहर आई थी। वह अपनी बेटी के आने का बेसब्री से इंतजार कर रही है। बताया कि सोमवार सुबह 10 बजे उन्होंने अपनी बेटी से फोन के जरिए बात की थी। उसने बताया था कि वह रोमानिया आ चुकी है। उसका मेडिकल जांच होने वाली है।
उसके बाद सूची तैयार कर उसे भारत लाया जाएगा। राधा रानी सोमवार को दोपहर दो बजे अपने रिश्तेदारों के साथ निजी वाहन से दिल्ली के लिए निकल गई। उनके साथ छत्तीसगढ़ निवासी बहनोई, दो भाई और अन्य रिश्तेदार तीन गाडिय़ों से दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचेंगे। राधा रानी ने बताया कि देर रात या अगली सुबह तक जया के भारत लौटने की संभावना है। संवाद
छात्रों की वापसी के लिए भाकियू ने दिया ज्ञापन
शाहजहांपुर। भारतीय किसान यूनियन ने यूक्रेन में फंसे छात्र-छात्राओं की वापसी के लिए सोमवार को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन एडीएम को सौंपा। इस दौरान किसानों ने प्रदर्शन भी किया। जिलाध्यक्ष मंजीत सिंह धालीवाल के नेतृत्व में दिए ज्ञापन में बताया कि यूक्रेन के छात्रों के ऑडियो और वीडियो के माध्यम से पता चल रहा है कि नजदीकी देशों की सीमा पर छात्रों के साथ दुर्व्यवहार हो रहा है। उन्होंने अपील की है कि यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों को वापस लाया जाए। कुलदीप सिंह, छुट्टन अंसारी, तनजीत, अजीत सिंह, रानी, रुचि, मोना आदि मौजूद रहे। संवाद
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