फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अदालत ने कहा, बगैर किसी उकसावे के दोषियों ने कानून हाथ में लिया

विज्ञापन
घर के बाहर खड़े मृतक कल्पू सिंह का बेटा राजेन्द्र व अन्य परिजन। संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
विज्ञापन
शाहजहांपुर। गांव में हमलाकर कल्पू की हत्या करने वाले हमलावरों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए अपर सत्र न्यायालय के जज सिद्धार्थ वागव ने टिप्पणी की है कि दोषियों ने बगैर किसी उकसावे के वारदात को अंजाम दिया है। एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई, जबकि मुन्नालाल और नौरंग की जान लेने का प्रयास किया। इसलिए उनके द्वारा किए गए कृत्य के लिए उन्हें आजीवन कारावास की सजा जायज है।
विज्ञापन

अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने साधू, बादाम, राजवीर, चंद्रपाल और सत्यपाल की उम्र अधिक होने और गरीब होने के कारण सजा में रियायत की गुहार की थी। बचाव में यह दलील भी दी कि इनके ऊपर इस केस के अलावा और कोई केस दर्ज नहीं है। अदालत ने दोनों ही दलील मानने से इन्कार कर दिया।
दहशत फैलाने के लिए चार घंटे तक की थी फायरिंग
जलालाबाद। गांव बढ़ाई में हमलावरों ने ऐसी दहशत फैलाई थी कि पीड़ित परिवार तीन दशक बाद भी नहीं भुला पाया है। कल्पू के बड़े बेटे राजेंद्र ने बताया कि शाम चार बजे का समय था। वह और उसके पिता घर पर ही थे। अचानक राइफल, बंदूकें, कुल्हाड़ी आदि लेकर कई लोग घर के पास आ धमके।
विज्ञापन

घर में मां रामबेटी और पिता कल्पू सिंह, वह, उसके भाई राजेश्वर और बालिस्टर मौजूद थे। उस समय वे लोग काफी छोटे थे। कुछ हमलावर उनके घर की छत तोड़कर घुस आए और पिता को गोली मार दी। इसके बाद वे लोग भाग निकले। कुछ हमलावर उसके ताऊ पुत्तू सिंह व चाचा हरिपाल सिंह के घरों में घुस गए। मारपीट और फायरिंग शुरू कर दी। करीब चार घंटे तक हमलावर गांव में रहे और गाली-गलौज-फायरिंग करते रहे।
गांव में नहीं रहते दोषियों के परिवार
1991 में इस गांव के सुखराम के भाई विशनू की हत्या हो जाने के बाद उन लोगों ने गांव छोड़ दिया था। परिवार सहित शाहजहांपुर या अन्य रिश्तेदारियों में जाकर बस गए थे, मगर बदला लेने की आग उन लोगों में धधकती रही। इसका अंदाजा पीड़ित परिवार के लोग नहीं लगा सके।
दहशत में घरों से बाहर नहीं निकले लोग
कल्पू सिंह के चचेरे भाई करीब 70 वर्षीय हरिपाल सिंह 30 साल पहले हुई घटना की याद करते हुए बताते हैं कि हमलावर गांव पहुंचने के बाद तीन टुकड़ियों में बंट गए। एक टुकड़ी ने कल्पू सिंह व उनके चचेरे भाई अमर सिंह के घरों की खपरैल तोड़ दी। अंदर घुसकर कई राउंड फायर किए। इसमें कल्पू सिंह की मौत हो गई। वहां मौजूद गांव लहसड़ी निवासी उनके रिश्तेदार मुन्नालाल को हमलावरों ने कुल्हाड़ी के कई वार कर घायल कर दिया। पूरे घटनाक्रम के दौरान गांव के किसी व्यक्ति ने घर के बाहर आने की हिम्मत नहीं जुटाई।
पूरी रात घर मे पड़ा रहा कल्पू सिंह का शव
गुर्जर बिरादरी की बहुलता वाला गांव बढ़ाई जलालाबाद से करीब 15 किलोमीटर दूर बुधुवाना के समीप बहगुल नदी के किनारे बसा हुआ है। अब बुधुआना रोड से गांव तक पक्की सड़क बन गई है, परंतु 30 साल पहले यहां कटरी का इलाका था। गांव तक आने-जाने का अच्छा रास्ता नहीं था। पीड़ित परिवार के अनुसार चार घंटे दहशत फैैलाने के बाद हमलावर रात में फिर से आए। उस समय गांव में सन्नाटा पसरा था। हमलावर धमकाकर चले गए। पूरी रात कल्पू का शव घर में पड़ा रहा। अगले दिन पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
रंजिश में हो चुकीं कई हत्याएं
जलालाबाद। वर्ष 1991 में सुखराम के भाई विशनू का शव मदनापुर क्षेत्र में मिली थी। इस हत्या में सुखराम का शक कल्पू सिंह के परिजन पर था। सुखराम ने इस मामले में कल्पू के रिश्तेदारों पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दुश्मनी हो जाने के बाद सुखराम व उनके अन्य परिवार के लोग गांव से चले गए।
भाई की हत्या का बदला लेने को सुखराम व उनके परिजन ने कुछ दिन बाद ही पुत्तू सिंह के लड़के अमर सिंह की नया गांव महसुलपुर में सरेबाजार हत्या कर दी थी। कुछ समय बाद ही कल्पू सिंह के पक्ष के गांव भुडिया के प्रधान रहे राम सिंह को शाहजहांपुर स्थित जिला अस्पताल के पास गोली मार दी थी। राजेंद्र सिंह ने बताया कि विशनू की हत्या में दर्ज मुकदमे में कोर्ट ने सभी सात आरोपियों को बरी कर दिया था। तभी से सुखराम पक्ष उन लोगों से और रंजिश मान बैठा था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें