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प्रत्याशियों के सेनापति संभाले हैं चुनावी जंग की कमान

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पुवायां में एक चुनावी कार्यालय पर कार्यकर्ताओं के लिए खाना बनाते कारीगर - फोटो : POWAYAN
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शाहजहांपुर/पुवायां। किसी भी जंग में सेनापतियों की भूमिका काफी अहम होती है। ऐसे ही चुनावी जंग में भी सेनापति तैनात हैं और रोजाना अपने प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए गोटें बिछा रहे हैं। सुबह पांच बजे से लेकर रात के 11 बजे तक इन सेनापतियों को चैन नहीं है। एक साथ कई मोर्चों पर काम करने के कारण इनके चेहरे पर तनाव है, लेकिन फिर भी चुनावी जंग में गोटें फिट करना, चुनाव अधिकारी के पत्रों का जवाब देने से लेकर समर्थकों के लिए भोजन आदि की व्यवस्था को सेनापति बखूवी संभाल रहे हैं।
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सुबह करनी होती है समर्थकों के लिए भोजन व्यवस्था
विभिन्न पार्टियों के कार्यालयों पर समर्थकों के भोजन की व्यवस्था की गई है। सुबह पांच बजे से ही कारीगर लंच पैकेट तैयार करने लगते हैं। आठ बजे से वाहन और समर्थकों का आना-जाना शुरू हो जाता है। वाहनों में लंच पैकेट रखवाने से लेकर खर्चे पानी की व्यवस्था से सेनापति की दिनचर्या शुरू हो जाती है।
वाहन पहले से होते हैं बुक, डीजल के लिए मिलती है पर्ची
किस वाहन को किन समर्थकों को लेकर किन गांवों में जाना है, यह एक दिन पहले ही रात में तय हो जाता है। सुबह वाहन के आने पर डीजल की पर्ची दे दी जाती है। पहले से तय पंप पर डीजल मिल जाता है। पहले सौ किमी तक वाहन चालक अलग दिहाड़ी लेते हैं और वाहन सौ किमी से अधिक चलने पर ज्यादा रेट लगने हैं। यह व्यवस्था भी कार्यालय का जिम्मा संभाल रहे प्रत्याशी के खासमखास के जिम्मे होती है।
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हैंडपंप का पानी नहीं पीते समर्थक
चुनाव है सो समर्थकों के भाव भी आसमान पर है। लंच पैकेट के साथ ही प्रति समर्थक दो बोतल पानी भी दिया जाता है। प्रचार में लगे कार्यकर्ता हैंडपंप से पानी नहीं पीते हैं। शाम को भोजन की व्यवस्था भी कार्यालय पर ही की जाती है।
प्रत्याशी का प्रचार कार्यक्रम भी एक दिन पहले होता है तय
मांग के अनुसार प्रत्याशी का लोगों से मिलने का कार्यक्रम भी सेनापति ही तय करते हैं। एक दिन पहले ही गांवों की सूची तैयार कर प्रत्याशी को दे दी जाती है और संबंधित गांवों के समर्थकों को सूचना दे दी जाती है, जिससे अगले दिन गांव के लोगों के साथ बैठक में भीड़ जुटाई जा सके।
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