प्रदेश के कुछ हिस्सों में को.जा. 85 और को.जा. 88 प्रजाति की गन्ना बोए जा रहे हैं, जो कि उत्तर प्रदेश गन्ना परिषद से किसी भी स्तर से स्वीकृत नहीं हैं। इन दोनों प्रजातियों के गन्ने में अपने यहां रोग और कीट लगने की आशंका जताई गई है। इसका समाधान करना जटिल है। इन दोनों का कोई भी ट्रायल सूूबे में स्वीकृति के लिए परिषद से नहीं कराया गया है और न ही ये दोनों यूपी के लिए स्वीकृत गन्ना प्रजातियों की सूची में हैं।
बीते 22 दिसंबर को गन्ना आयुक्त की अध्यक्षता में हुई बीज गन्ना एवं गन्ना प्रजाति स्वीकृति उप समिति की बैठक में इन दोनों प्रजातियों को पश्चिमी यूपी में कुछ चीनी मिलों द्वारा बोआए जाने की जानकारी सामने आई। इन प्रजातियों के संबंध में उप गन्ना आयुक्त से रिपोर्ट लेकर परीक्षण की कार्यवाही करना तय हुआ। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद के निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने बताया कि ये दोनों ही प्रजातियां अपने प्रदेश के मौसम के अनुकूल नहीं हैं। उन्होंने बताया कि परिषद की प्रजातियां स्थानीय परिस्थितियों में पूरी तरह परीक्षण के बाद विकसित कर किसानों को जारी की जाती हैं। इनका उत्पादन क्षमता 100 टन प्रति हेक्टेयर तक है। डॉ. शर्मा ने चीनी मिलों से अनुरोध किया है कि उक्त दोनों प्रजातियों की बुआई न करवाई जाए।
किसानों के लिए हेल्पलाइन जारी
उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद (शाहजहांपुर) ने गन्ना किसानों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। चीनी मिल वाले या किसान यूपी के लिए स्वीकृत प्रजातियों के बारे में हेल्पलाइन (नंबर 05842-222509) अथवा परिषद के प्रसार अधिकारी संजीव कुमार पाठक से मोबाइल (नंबर 8795837155) पर संपर्क कर सकते हैं।
गन्ने से चीनी की बेहतर रिकवरी जारी
शाहजहांपुर। जिले के चीनी मिलों में चालू मौसम में गन्ने से चीनी की रिकवरी में लगातार बढ़त देखने को मिल रही है। जिले में बुधवार को रिकवरी का औसत पिछले बार के 9.55 की तुलना में 10.78 फीसदी पाया गया। जबकि इस सीजन में रिकवरी औसतन 10.32 फीसद दर्ज हुई है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद के फिजियोलॉजी विभाग के विज्ञानी डॉ. मनमोहन सिंह बताया कि निगोही चीनी मिल में बुधवार को 11.7 फीसदी और इस सीजन में अब तक 11.36 फीसदी रिकवरी पाई गई है। जबकि मकसूदांपुर (बंडा) चीनी मिल में यह 11.8 और 11.01 फीसदी रही है। रोजा चीनी मिल में यह 10.55 और 10.53 फीसदी, तिलहर चीनी मिल में 9.25 और 8.86 फीसदी एवं पुवायां में 10.5 और 9.83 फीसदी रही।