जैतीपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार ने 2010 में पायका केंद्र बनाए थे। इसमें गांव के बच्चों को खेलने के लिए खेल के उपकरण भी लगाए गए। कुछ समय तक तो पायका केंद्रों पर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। बाद में खेल मैदान में ग्रामीणों ने घर का कूड़ा, गोबर डालना शुरू कर दिया। अब हालत यह है कि यह मैदान गंदगी के कारण खेलने लायक नहीं बचा है।
गढ़ियारंगीन गांव की आबादी करीब 15,000 है। गांव में हफ्ते में तीन बाजार लगते हैं। इसका सारा कूड़ा करकट खेल मैदान में डाल दिया जाता है। गांव के बच्चे इसी गंदे मैदान में खेलने के लिए मजबूर हैं। वही दूसरे गांव बझेड़ा भगवानपुर में बने खेल मैदान में लोगों ने भूसे के ढेर लगा दिए हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को खेलने के लिए कहीं कोई मैदान नहीं बचा है, जिसमें वे अपनी प्रतिभा को निखार सकें।
गांव में बहुत प्रतिभा है। उसे निखारने की आवश्यकता है। शासन को चाहिए कि हर ग्राम पंचायत पर बढ़िया खेल मैदान की व्यवस्था की जाए। प्रत्येक ब्लॉक पर समय-समय पर प्रतियोगिता का आयोजन हो।
अमित चौधरी, निवासी अगरोली, अंडर-19 क्रिकेटर
गांव में सुविधाओं की कमी से गांव के बच्चों की प्रतिभा का निखार नहीं हो पाता। सरकार को चाहिए कि गांव में खेल के प्रति जागरूकता को बढ़ाया जाए। मैदानों की सफाई की भी व्यवस्था हो।
खुशी चौधरी, रेसलर स्टेट लेवल निवासी अगरोली नवादा
गांव में कोई खेल मैदान नहीं है। अपनी तरफ से व्यवस्था कर खेलकूद में हिस्सा लेते हैं। गांव का खेल मैदान साफ कराया जाए। गांव के बच्चे खेलने कहां जाएं।
परिमाल, गढ़िया रंगीन
गांव का खेल मैदान कूड़े का ढेर बन गया है। खेलने की कहीं जगह नहीं है। मुझे क्रिकेट खेलना बहुत पसंद है, लेकिन अव्यवस्था के कारण गांव के लोगों की प्रतिभा आगे नहीं बढ़ पाती है।
सुरजीत राठौर गढ़िया रंगीन
गांव के खेल मैदान में कूड़े और कंडों का ढेर है। खेलने का कोई स्थान नहीं है। खेल का मैदान साफ हो तो गांव के बच्चे भी खेल सकते हैं। गांव के बच्चों का भी मन होता है कि वह खेल में आगे बढ़ें।
निखिल गुप्ता, बझेड़ा भगवानपुर
गांव के खेल मैदान पर कूड़े का ढेर लग गया है। 15 हजार की आबादी वाले गांव में केवल एक सफाईकर्मी की नियुक्ति है। मेरी ग्राम पंचायत में नियुक्त ग्राम विकास अधिकारी द्वारा कोई सहयोग प्राप्त नहीं हो पा रहा है।
लालू प्रसाद प्रजापति, ग्राम प्रधान गढ़िया रंगीन
बझेड़ा भगवानपुर के खेल मैदान पर लगा गोवर का ढेर । संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR