किसानों को कृषि और उससे जुड़े अन्य व्यवसायों में तकनीकी रूप से दक्षता दिलाने एक प्रशिक्षण का आरंभ हुआ। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से भावलखेड़ा ब्लॉक के गांव दौलत पुर में यह प्रशिक्षण बृहस्पतिवार को शुरू हुआ। इस तीन दिवसीय कृषक प्रशिक्षण में कृषि वैज्ञानिक किसानों को फसल उत्पादन के साथ पशु पालन , रेशम कीट पालन, मुर्गी पालन आदि के बारे में उपयोगी जानकारियां दी गई।
केंद्र की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नूतन वर्मा ने कहा कि इस समय पिछैती आलू में झुलसा रोग और सरसों में माहू कीट का प्रकोप बढ़ गया है। उन्होंने झुलसा की रोकथाम के लिए रिडोमिल रसायन 600 से 800 ग्राम प्रति एकड़ पानी में मिलाकर छिड़काव करने और माहू के नियंत्रण को मोनोक्रोटोफास 250 मिली अथवा इमिडाक्लोरोप्रिड 200 मिली प्रति एकड़ पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना समझाया। डॉ. नरेंद्र प्रसाद ने जैविक खेती की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि फसलों को 16 पोषक तत्वों की जरूरत होती है, वे सभी जैविक खाद से उपलब्ध हो जाते हैं। उन्होंने किसानों को केंचुआ खाद और नैडेप कंपोस्ट तैयार करने की विधि बताई। पशुपालन विशेषज्ञ डॉ. टीबी यादव ने जिले में भैंस वंश के 97 फीसदी पशुओं के पेट में कीड़े की समस्या से दुग्ध उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इसकी रोकथाम के लिए उन्होंने पशु चिकित्सक से सलाह करके दवाएं गुड़ में मिलाकर पशुओं को खिलाने की सलाह दी।
डॉ. चंद्रपाल गुप्ता ने मटर की फसल का उत्पादन बढ़ाने के लिए विभिन्न कृषि रक्षा रसायनों की उपयोगिता बताई। उन्होंने चालू मौसम में पिछैती फूलगोभी और पातगोभी का रोपण करने पर जोर दिया। इससे पूर्व, प्रारंभ में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. एलबी सिंह ने प्रशिक्षण का उद्घाटन किया और लगभग 50 किसानों ने प्रतिभाग किया।