रंगों के त्योहार होली को केवल एक सप्ताह शेष है, लेकिन जिले की कई चीनी मिलों ने जनवरी के पहले सप्ताह के बाद से किसानों द्वारा सप्लाई किए गए गन्ना का बकाया मूल्य भुगतान नहीं किया है। पांचों चीनी मिलें किसानों का करीब 2.15 अरब रुपये बकाया गन्ना मूल्य दबाए हैं। किसानों को इस बात की चिंता है कि मिलों से गन्ने का पेमेंट जल्दी न मिलने की दशा में होली की खुशियां फीकी पड़ जाएंगी। इस बीच, डीएम शुभ्रा सक्सेना के निर्देश पर प्रशासनिक अधिकारियों ने भुगतान में फिसड्डी बजाज ग्रुप की मकसूदापुर चीनी मिल और बिरला ग्रुप की रोजा शुगर वर्क्स का चीनी स्टॉक जब्त करके उसका किसानों में वितरण कराने का निर्देश दिया है। पिछले साल दिसंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में जिले की पांचों चीनी मिलों ने गन्ना की पेराई शुरू कर दी थी। पेराई सत्रों में गन्ना मूल्य भुगतान की लचर स्थिति में सुधार लाने के लिए प्रदेश शासन ने मिल प्रबंधनों को गन्ना सप्लाई मिलने के 14 दिन के अंदर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद डालमियां ग्रुप की निगोही स्थित मिल को छोड़कर अन्य किसी मिल ने इस निर्देश का पालन नहीं किया, जिसका नतीजा सामने है। चीनी मिलें दस मार्च तक किसानों से 5.01 अरब रुपये से अधिक मूल्य का गन्ना खरीद चुकी हैं, लेकिन किसानों को केवल 2.86 अरब रुपये का भुगतान किया गया। मिलों पर किसानों पर 2 अरब 14 करोड़ 94 लाख 36 हजार रुपये की देनदारी है, जबकि पेराई सत्र समाप्ति पर है और होली आने में चंद रोज ही बचे हैं।
भुगतान में सबसे आगे है डालमियां शुगर मिल
भुगतान के लिहाज से निगोही स्थित डालमियां शुगर मिल सबसे आगे है। मिल प्रबंधन ने दस मार्च तक एक अरब 51 करोड़ 89 लाख 57 हजार रुपये का भुगतान कर दिया है। हालांकि, मिल पर किसानों की 38.75 करोड़ रुपये की देनदारी बकाया है। इसके विपरीत मकसूदापुर स्थित बजाज मिल ने 13 दिसंबर तक केवल 43.34 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इस मिल पर सर्वाधिक 76.20 करोड़ रुपये बकाया है। अन्य मिलों में रोजा शुगर वर्क्स ने दो जनवरी तक 29.30 करोड़ रुपये, पुवायां किसान सहकारी मिल ने सात फरवरी तक 30.61 करोड़ रुपये और तिलहर सहकारी मिल ने 11 फरवरी तक 30.61 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इन मिलों पर अभी तक क्रमश: 57.04 करोड़ रुपये, 16.85 करोड़ रुपये और 26.08 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है। अधिकारियों का कहना है कि मिलों पर बकाया भुगतान जल्द कराने को दबाव बनाया जा रहा है।
चीनी देकर कराई जा रही देनदारी की भरपाई
डीएम के निर्देश पर गठित प्रशासन और गन्ना विभाग की अधिकारिक टीम ने भुगतान में पीछे चल रहीं मकसूदापुर और रोजा मिल का चीनी स्टॉक अपने कब्जे में ले लिया है। मकसूदापुर मिल ने बकाया गन्ना मूल्य के बदले किसानों को चीनी का उठान कराना शुरू कर दिया है। यह तसल्ली की बात है कि जितना गन्ना मूल्य बकाया है, उसके सापेक्ष मिलों के स्टॉक में चीनी उपलब्ध है।
-बृजेश कुमार पटेल, जिला गन्ना अधिकारी