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गंगा-रामगंगा में उफान जारी, तटवर्ती गावों के कई मार्ग हुए जलमग्न

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शाहजहांपुर के मिर्जापुर क्षेत्र में जलालाबाद-ढाईघाट मार्ग पर चौंरा गांव के निकट गंगा की बाढ़ से ? - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। गंगा में सोमवार को लगातार तीसरे दिन और रामगंगा में दूसरे दिन भी उफान जारी रहा। कलान के भैंसार बांध पर गंगा 21 सेमी बढ़कर 143.21 मीटर पर पहुंच गई। वहीं रामगंगा का जलस्तर 22 सेमी बढ़कर 159.68 मीटर हो गया। तीन दिन में गंगा 87 सेमी उफनाने से बाढ़ अब फैलाव लेने लगी है और उससे मिर्जापुर क्षेत्र में ढाईघाट-चौंरा मार्ग जलमग्न हो गया है। चौंरा को सीमावर्ती जनपद फर्रुखाबाद के कमथरी और चितार गांवों से जोड़ने वाले मार्ग पर भी गंगा का पानी आ जाने से आवागमन बाधित होने लगा है, लेकिन लोग खतरे का सामना करते हुए जलमग्न रास्ते से निकल रहे हैं।
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इधर, बाढ़ नियंत्रण कक्ष से बताया गया कि आज नरौरा से पानी की निकासी लगभग 13000 क्यूसेक बढ़कर 1.06 लाख क्यूसेक हो गई है। इसे देखते अगले 48 घंटे तक गंगा में उफान बढ़ने के आसार हैं। सिंचाई विभाग के सूत्रों के अनुसार बीते चार दिन में पहाड़ों पर हुई भारी वर्षा के कारण अब फिर से बाढ़ की स्थिति गंभीर होने लगी है। हालांकि, विभाग के अधिकारी यही कह रहे हैं कि अभी जून की बाढ़ जैसे हालात नहीं बने हैं, लेकिन नरौरा बैराज से गंगा में जिस तरह अतिरिक्त पानी की निकासी बढ़ रही है, उसे देखते फिर से गंगा के किनारे बसे गांवों के टापू में बदलने का अंदेशा है।
दो दिन पहले नरौरा बैराज से निकले 78800 क्यूसेक पानी की खेप सोमवार को सुबह यहां पहुंचने से कलान के भैंसार बांध पर गंगा बढ़ने लगी है। नरौरा से बीते दिन निकला 91788 क्यूसेक पानी अभी जनपद की सीमा में नहीं आया है कि सोमवार को ही वहां से 106722 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज होने लगा। फिलहाल, मिर्जापुर क्षेत्र में गंगा की बाढ़ का पानी जलालाबाद-ढाईघाट मार्ग पर चौंरा गांव के पास रोड पर आ गया है। चौरा-इस्लामनगर और कमथरी मार्गों पर भी बाढ़ का पानी रोड पर वेग के साथ बह रहा है, लेकिन आसपास के ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर इन मार्गों पर आवाजाही कर रहे हैं। गंगा में पानी बढ़ने पर पैलानी उत्तरी समेत आजादनगर, इस्लामनगर, कमथरी, चितार आदि गांवों के बाशिंदों को एक बार फिर बाढ़ से विस्थापन का डर सताने लगा है।
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सिंचाई विभाग के वरिष्ठ लिपिक सत्येंद्र वर्मा के अनुसार उत्तराखंड के खो, हरेली, किच्छा, रामनगर आदि बैराजों से पानी की निकासी करीब 39000 क्यूसेक कम हुई है, लेकिन इन बैराजों से अभी 20073 क्यूसेक पानी का बहाव जारी रहने से अगले 24 घंटे में रामगंगा में पानी घटने के आसार हैं। शहर के समीप गर्रा का जलस्तर फिर बढ़ेगा, क्योंकि ड्यूनी डाम से पानी की निकासी पांच हजार क्यूसेक बढ़कर 12265 क्यूसेक हो गई है। उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर हुई बारिश के असर से बीते दिन डाम से निकले 7590 क्यूसेक पानी से गर्रा 15 सेमी बढ़कर 144.90 मीटर पर पहुंच चुकी है और खन्नौत में भी पांच सेमी पानी बढ़ा है।
नारायणनगर के पश्चिम में होने लगा भूमि कटान
परौर। रामगंगा में दो दिन से पानी बढ़ने के कारण क्षेत्र के कई तटीय गांवों में भूमि कटान धीमा पड़ गया है, लेकिन नारायणनगर पश्चिमी गांव के पश्चिमी छोर पर जहां नदी की धारा मोड़ ले रही है, वहां कटान शुरू हो गया है। क्षेत्र के मंझा, दहेलिया, मोहनपुर, बिचपुरी आदि गांवों में रामगंगा से पिछले दिनों हुए भूमि कटान से जहां गड्ढे बने हैं, वह जलमग्न हैं। इस बीच, सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता अनूप कुमार ने अवर अभियंताओं की टीम के साथ रामगंगा के तटीय गांवों का दौरा कर बाढ़ और कटान की स्थिति का जायजा लिया। बाद में उन्होंने विभागीय ठेकेदार को कटान रोकने के लिए वहां बालू से भरी बोरियां लगाने के निर्देश दिए।
जून में नरौरा से लगातार दो दिन तक 2.25 लाख से 2.31 लाख क्यूसेक पानी निकलने के कारण मिर्जापुर क्षेत्र के कुछ गांव बाढ़ से घिर गए थे, लेकिन उस वक्त की तुलना में अभी नरौरा से 50 फीसदी पानी निकल रहा है। बैराज से पानी की मात्रा बढ़ने के कारण गंगा के किनारे लो लैंड एरिया अर्थात निचली सतह वाले इलाकों में पानी आ सकता है, लेकिन तटवर्ती गांवों के लोग बाढ़ से सुरक्षित बने रहेंगे। जनपद में अभी मध्यम श्रेणी की बाढ़ के हालात बन रहे हैं। ग्रामीणों को सतर्क किया गया है कि वह अपने पशु लेकर गंगा, रामगंगा के किनारे नहीं जाएं।
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- सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभागै।
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