शाहजहांपुर। चौक कोतवाली क्षेत्र की साउथ सिटी कॉलोनी में जल जीवन मिशन के नाम पर बेरोजगारों को नौकरी देने के नाम पर संचालित गिरोह का साइबर क्राइम सेल और कोतवाली पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। सरकारी योजना बताकर बेरोजगारों को ठगने वाले उन्नाव और प्रतापगढ़ जिले के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरोह का नेटवर्क 11 जिलों में संचालित हो रहा था। अभी तक गिरोह ने सैकड़ों लोगों को ठगने की बात कुबूल की।
सरकारी योजना के नाम पर फर्जी ज्वाइनिंग और ऑफर लेटर भेजकर ठगने की सूचनाएं पुलिस के पास आने के बाद एसपी एस आनंद ने साइबर सेल के प्रभारी नीरज सिंह को खुलासे की जिम्मेदारी दी। पुलिस ने मोबाइल लोकेशन के आधार पर लखनऊ के हजरतगंज के ए-122 कस्मंडा अपार्टमेंट में आरोपियों की तलाश में दबिश दी। एसपी ने बताया कि शनिवार सुबह साउथ सिटी कॉलोनी में दबिश देकर धर्मेश शुक्ला निवासी मोहल्ला केसरी थाना कोतवाली जिला उन्नाव व मिथलेश प्रजापति निवासी मजीठी थाना पट्टी जिला प्रतापगढ़ को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से जल जीवन मिशन का लोगो लगी 156 टी-शर्ट, तीन कंप्यूटर, प्रिंटर, मोहरें, आधार कार्ड, 2335 लोगों की सूची, तीन चेकबुक, बैंक पासबुक, पांच एटीएम बरामद हुए हैं।
सरकारी नौकरी का झांसा देकर बेरोजगारों को फंसाते थे ठग
- गिरोह के सदस्य सरकारी नौकरी का झांसा देकर बेरोजगारों को फंसाते थे। 2335 व्यक्तियों की सूची और सैकड़ों फार्म उनसे बरामद हुए हैं। पुलिस का मानना है कि ठग सैकड़ों लोगों को अभी तक निशाना बना चुके होंगे। एसपी ने बताया कि सरकार ने जल जीवन मिशन और राज्य पेयजल व स्वच्छता मिशन की योजना चला रखी है। योजना के माध्यम से घरों में पानी की पाइप लाइन बिछाकर टंकी लगाई जानी है। आरोपियों ने बताया कि तभी हम दोनों ने नौजवानों से इस योजना में सर्वे के नाम पर नौकरी का झांसा देकर ठगी की योजना बनाई।
अखबार में देते थे विज्ञापन, बेरोजगार ढूंढते हुए आते थे
- आरोपी प्रत्येक जिले के एक समाचार पत्र में जल जीवन योजना में नौकरी के लिए विज्ञापन निकालते थे। आरोपियों ने बताया कि विज्ञापन देखकर तमाम लोग उनके दफ्तर आते थे। हम उन लोगों को कभी लखनऊ तो कभी शाहजहांपुर के ऑफिस में इंटरव्यू देने के बहाने बुला लेते थे। उनसे उनका बायोडाटा व शैक्षिक प्रमाणपत्रों की छाया प्रति व कुछ फोटो लेकर हर व्यक्ति से रजिस्ट्रेशन, ट्रेनिंग, बैंक खाता खोलने, जल जीवन मिशन की टी-शर्ट देने तथा पुलिस सत्यापन आदि के नाम पर 2500 से 5000 रुपये नकद लेते थे या अपने अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराते थे।
11 जिलों तक फैला नेटवर्क, थमा देते थे फर्जी नियुक्ति पत्र
- एसपी ने बताया कि गिरोह का नेटवर्क पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर, प्रतापगढ़, प्रयागराज समेत 11 जिलों में फैला है। शैक्षिक योग्यता के आधार पर नियुक्ति के लिए अलग-अलग पद बताकर कंप्यूटर की मदद से झांसे में आने वाले लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार करके दे देते थे। मुख्य कार्यालय हजरतगंज लखनऊ में बना रखा था जिससे लोग आसानी से विश्वास कर लेते थे।
40 से 50 लाख रुपये ठगे, विदेश भागने की फिराक में थे
- आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वह अभी तक ढाई से तीन हजार लोगों को ठगकर 40 से 50 लाख रुपये वसूल कर चुके हैं। 11 जिलों के अलावा प्रदेश के विभिन्न जिलों में ठगी के इरादे से दफ्तर खोलने की तैयारी में थे। ठगी के बाद मोबाइल और दफ्तर बंद कर विदेश भागने की फिराक में थे।
इन बातों का रखें ख्याल
नौकरी का विज्ञापन देखने के बाद एक बार संबंधित विभाग से जॉब निकलने के बारे में जानकारी जरूर कर लें।
सरकारी कार्यालय से विज्ञापन जारी होने पर उस पर क्रमांक नंबर जरूर पड़ा होता है, यह भी देख लें।
कोई भी सरकारी नौकरी आसानी से नहीं मिलती है। इस तरह का विकल्प आने पर एक बार पड़ताल जरूर कर लें।
- नीरज सिंह, साइबर सेल प्रभारी