शाहजहांपुर। दूसरे दिन सोमवार को भी बूंदाबांदी और बारिश का दौर जारी रहने से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर रहा है। वायुदाब में कमी बनी होने के कारण अगले 24 घंटे तक मौसम सामान्य होने के आसार नही हैं। इस कारण धान की फसल को व्यापक क्षति की आशंका बढ़ गई है।
कलान, जलालाबाद के बाढ़ प्रभावित और पुवायां तहसील के तराई क्षेत्र में धान की पिछैती किस्मों की बुआई होने के कारण अभी 50 फीसदी से ज्यादा फसल कटने के इंतजार में खेतों में खड़ी है। कई जगह तेज हवा चलने से धान खेतों में बिछ गया। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौसम जल्द सामान्य नहीं हुआ तो धूप की कमी और वातावरण में बढ़ी हुई नमी धान में फफूंद के साथ अन्य कीट रोग पैदा कर देगी।
सोमवार को दिन भर फुहारें गिरती रहीं। इसलिए अधिकतम तापमान आठ डिग्री गिरकर 28 डिग्री सेल्सियस रह गया। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार रविवार रात से सुबह तक तीन मिमी और सोमवार को दिन में दो मिमी वर्षा हो चुकी है, लेकिन वायुदाब में कमी से मंगलवार को बारिश होने के संकेत हैं।
तिलहर। रविवार शाम से शुरू हुई बारिश सोमवार को दिन भर जारी रहने के कारण मंडी समिति परिसर में धान क्रय केंद्रों के बाहर खुले आसमान के नीचे पड़ा सैकड़ों क्विंटल धान पूरी तरह भीग गया है। केंद्र प्रभारी उपज किसानों की बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। मंडी परिसर में एक पखवाड़े से अधिक समय से धान की आवक जारी है। केंद्र प्रभारी धान में नमी बताकर उसकी तौल नहीं कर रहे हैं।
किसानों ने केंद्रों के बाहर मैदान में धान सूखने के लिए डाल दिया, लेकिन अचानक हुई बारिश में फसल भीग गई। किसानों की फसल रखने के लिए मंडी में एक विशाल टीन शेड बनाया गया है, लेकिन उसे मंडी अधिकारियों ने सब्जी विक्रेताओं के हवाले कर दिया है। किसानों ने टीन शेड खाली कराने की मांग की है।
जैतीपुर। बारिश में धान की फसल को नुकसान हुआ है। गांव बझेड़ा भगवानपुर, खेड़ा रठ, अगरोली, नवादा, मरुआ झाला, बंडिया कलां, बिहारीपुर, नगरिया, भिटारा, करकौर, सुरजूपुर आदि में तमाम किसानों के धान खेतों में गिर गए। सबसे ज्यादा शरबती धान को नुकसान हुआ है। खेतों में पानी भरा होने से गिरी फसल उठाई नहीं गई तो अंकुरित हो जाएगी। किसान शैलेंद्र कुमार सिंह, गौरव सिंह, मुकेश मिश्रा, राम खिलौना, दीपक मिश्रा, महक सिंह, कृष्ण पाल सिंह आदि की कई एकड़ फसल चौपट हो गई है।
खुदागंज। कई गांवों में धान व गन्ने की फसल खेतों में पसर गई। किसानों का कहना है कि इससे धान की कटाई थमेगी और अन्य फसलें भी प्रभावित होंगी। गांव म्युना के वीरेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने लगभग तीन बीघा धान फसल की कटाई कराई थी, लेकिन बारिश के चलते उसे खेत से उठाना मुश्किल हो गया है। विभिन्न गांवों में विद्युत आपूर्ति भी व्यवस्था भी चरमरा गई है।
निगोही। दो दिन से हो रही वर्षा से धान और गन्ना की फसलें खेतों में गिर गई हैं। खेतों में कटी पड़ी धान की फसल लालब भरे खेतों में उतरा रहीं हैं। गांव ऊनकलां, पिपरिया उदयभानपुर, पिपरिया खुशाली, निगोही, इनायतपुर, कबीरपुर झोतूपुर, हसौआ, ऐठापुर, नकटिया, डेलखेरा, हमजापुर, भवानीपुर, दियुरिया आदि में सैकड़ों एकड़ खेतों में कटा हुआ धान पड़ा है।
धान को फफूंद जनित रोगों से बचाना होगा कठिन
जिला कृषि रक्षा अधिकारी शिवशंकर गौतम का कहना है कि बहुत कम स्थानों पर ज्यादा पानी गिरा है। इसलिए जहां सिर्फ बूंदाबांदी हुई है, वहां एक-दो दिन में धूप निकलने पर तेज हवा से गीली हुई फसल सूख जाएगी, लेकिन उनका यह भी मानना है कि अगर बूंदाबांदी का दौर जल्द नहीं थमा तो धान में फफूंद जनित बीमारियों के साथ अन्य कीट-रोगों पर नियंत्रण करना कठिन हो जाएगा। चूंकि, धान परिपक्व हो चुका है। इसलिए उस पर किसी फफूंदनाशी रसायन का ज्यादा असर भी नहीं पड़ेगा। सरसों की फसल के लिहाज से पानी ज्यादा नहीं गिरा है। धान की कटाई में थोड़ा विलंब हो सकता है, लेकिन गन्ना को बांधकर उसे तेज हवा में गिरने से बचाया जा सकता है।