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सियासत में शाहजहांपुर का बढ़ता रुतबा, पहली बार प्रदेश में दो कैबिनेट मंत्री

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जितिन प्रसाद को कैबिनेट मंत्री बनाए जाने पर शाहजहांपुर के प्रसाद भवन पर उनके चित्र के खुशियां मन? - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। जितिन प्रसाद को योगी मंत्रिमंडल में बतौर कैबिनेट मंत्री रविवार को राज्यपाल आनंदी बेन ने शपथ दिलाई। शाहजहांपुर जिले से वह आठवें राजनीतिक शख्सियत हैं जो राज्य सरकार में मंत्री पद पर रह चुके हैं। हालांकि बतौर कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के बाद जितिन प्रसाद ही हैं। जितिन के कैबिनेट मंत्री बनने पर उनके समर्थकों का उत्साह सातवें आसमान पर है। इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि शाहजहांपुर से एक साथ राज्य सरकार में दो कैबिनेट मंत्री बने हैं।
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नौ जून को जितिन प्रसाद कांग्रेस छोड़कर अचानक भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। तब से ही माना जा रहा था कि जितिन को पार्टी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अहम जिम्मेदारी दे सकती है। रविवार को अचानक उनके समर्थकों को संदेश प्राप्त हुआ कि जितिन प्रसाद को योगी मंत्रिमंडल में स्थान मिल रहा है। तमाम समर्थक शाहजहांपुर से लखनऊ के लिए रवाना हो गए।
शाम छह बजे जैसे ही जितिन प्रसाद के कैबिनेट मंत्री की शपथ लेने का समाचार समर्थकों को मिला, वे झूम उठे। समर्थकों ने आतिशबाजी कर और एक-दूसरे का मुंह मीठा कर बधाई दी। वहीं पहली बार राज्य सरकार में शाहजहांपुर से दो कैबिनेट मंत्री शामिल हुए हैं। वित्त, चिकित्सा शिक्षा एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के बाद अब जितिन प्रसाद भी योगी मंत्रिमंडल का हिस्सा बने हैं।
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जितिन का व्यक्तिगत जीवन
कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे जितेंद्र प्रसाद और मां कांता प्रसाद के बेटे जितिन प्रसाद का जन्म 29 नवंबर 1973 में हुआ था। उनकी एक बहन जाह्नवी प्रसाद हैं। जितिन प्रसाद की शादी टीवी जर्नलिस्ट नेहा सेठ से फरवरी 2010 में हुई थी। जितिन के एक बेटा और एक बेटी है। जितिन प्रसाद की शिक्षा दून पब्लिक स्कूल से हुई थी। जितिन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम करने के बाद एमबीए किया।
जितिन प्रसाद का राजनीतिक सफर
पिता जितेंद्र प्रसाद के असमय और अचानक निधन के बाद जितिन प्रसाद ने उनकी राजनीतिक विरासत संभाली। वह राहुल गांधी के काफी करीबी रहे। वह 2001 में युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव बने। पहला चुनाव उन्होंने शाहजहांपुर लोकसभा सीट से लड़ा। पहली बार में ही वह 81, 832 वोटों से जीते थे। पहली बार वह 2008 में मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय इस्पात राज्यमंत्री बने थे। 2009 में शाहजहांपुर लोकसभा सीट आरक्षित होने के कारण वह लखीमपुर की धौरहरा सीट से कांग्रेस से चुुनाव लड़े और 184,509 वोटों से जीते।
मनमोहन सरकार में वह फिर से 2009 से 2011 तक केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय मंत्री रहे। 2011 में उन्हें पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री बने। 2012 से 2014 तक केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री रहे। मोदी लहर में 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2017 में सपा-कांग्रेस के गठबंधन से उन्होंने तिलहर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा। ब्राह्मण चेतना परिषद के संरक्षक के तौर पर उन्होंने पूरे प्रदेश में ब्राह्मण समाज को एकजुट करने का काम किया। नौ जून, 2021 को उन्होंने सबको चौंकाते हुए दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली।
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