शाहजहांपुर। 330 बेड का राजकीय मेडिकल कॉलेज बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहा है। अग्निकांड की स्थिति में झांसी के अस्पताल से भी ज्यादा भयावह स्थिति यहां होगी।पोषण पुनर्वास केंद्र में तो अग्निकांड से बचाव के नाम पर मात्र दो अग्निशमन यंत्र लगे हैं।
ओपीडी जाने वाले दरवाजे को छोड़कर प्राचार्य कार्यालय के गेट के नजदीक वाले रास्ते में सबसे ज्यादा आवाजाही रहती है। यहां रास्ता काफी संकरा है। भगदड़ मचने पर भीड़ का निकलना तक मुश्किल हो जाएगा। दूसरे तल पर जाने वाली सीढि़यों से एक बार में बमुश्किल चार लोग भी नहीं गुजर सकते हैं। दूसरे तल के परिसर में कहीं अग्निशमन यंत्र नहीं लगा मिला। पुरुष मेडिसिन वार्ड के अंदर सारे बेड फुल थे। वहां आग बुझाने का कोई संयंत्र नहीं लगा था। अस्पताल के महिला वार्ड और हड्डी रोग वार्ड में मात्र एक अग्निशमन यंत्र लगा मिला। हालांकि, इनकी रिफिलिंग की तिथि दिसंबर में खत्म होने वाली है।
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16 बेड पर बच्चे भर्ती, मुख्य गेट पर लगी थी कुंडी
-झांसी की घटना के बाद भी पोषण पुनर्वास केंद्र को लेकर सतर्कता नहीं बरती गई। केंद्र के मुख्य गेट पर अधिकारियों ने कुंडी लगवा रखी थी। आमतौर पर यहां ताला लगा रहता है। प्रवेश दूसरे दरवाजे से दिया जाता है, जिसका रास्ता गलीनुमा है। कोई हादसा होने पर यहां भयावह स्थिति हो सकती है। शनिवार को केंद्र की सभी मशीनों पर बच्चों का उपचार चल रहा था। बिजली संचालित मशीनों वाला यह केंद्र कोने में है। इसके बाद भी यहां आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। यहां पर मात्र दो अग्निशमन यंत्र लगे मिले हैं। जिम्मेदारों ने भी माना कि मानक के अनुरूप इंतजाम ठीक नहीं हैं।
अग्निशमन यंत्र की तिथि निकल गई
-अस्पताल के पीछे बने सौ बेड के भवन को फायर विभाग से एनओसी प्राप्त है। यहां पर आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम का दावा किया जाता है। मेडिकल कॉलेज के अधिकारी अग्निशमन यंत्रों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। महिला अस्पताल के गेट पर फायर सेफ्टी के पास लगे अग्निशमन यंत्र की तिथि आठ महीने पहले निकल चुकी है। उसे बदलने की जरूरत नहीं समझी गई।
150 अग्निशमन यंत्र लगे होने का दावा
-फायर विभाग के मानक में दो सौ वर्ग मीटर में एक अग्निशमन यंत्र होना अनिवार्य है, पर अस्पताल में अग्निशमन यंत्रों को तलाश करना पड़ेगा। अधिकारियों का दावा है कि अस्पताल परिसर में 150 अग्निशमन यंत्र लगे हैं। पानी की टंकी भी लगी है, लेकिन इतने बड़े अस्पताल में ये इंतजाम नाकाफी हैं।
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हादसे के बाद जागे अधिकारी, किया निरीक्षण
-झांसी में हादसा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जाग गए। राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार, सीएमएस डॉ. नैपाल सिंह और एसीएमओ डॉ. गोविंद स्वर्णकार ने पोषण पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पताल के गेटों को देखा। साथ ही चार अग्निशमन यंत्रों को बढ़ाए जाने के निर्देश दिए। केंद्र में एक एसआर, दस स्टाफ नर्स, तीन मेडिकल ऑफिसर आदि नियुक्त हैं।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज के पास फायर एनओसी नहीं है। अस्पताल भवन की बनावट के चलते एनओसी मिलने में दिक्कत हुई है। करीब एक करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत हो गया है। इससे आग से बचाव के इंतजाम किए जाएंगे।
डॉ. राजेश कुमार, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज
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अस्पताल के निरीक्षण में आग बुझाने के संसाधन कम मिलने पर प्राचार्य को पत्र भेजा था। तब अग्निशमन यंत्र बढ़ाए गए हैं। मानक के अनुरूप आग बुझाने के इंतजाम नहीं हैं। आग की घटनाओं से बचाव को लगातार अभियान चल रहा है।
बीएन पटेल, एफएसओ
राजकीय मेडिकल कॉलेज के 100 बेड अस्पताल में लगा एक्सपायरी डेट का अग्निशमन यंत्र। संवाद
राजकीय मेडिकल कॉलेज के 100 बेड अस्पताल में लगा एक्सपायरी डेट का अग्निशमन यंत्र। संवाद
राजकीय मेडिकल कॉलेज के 100 बेड अस्पताल में लगा एक्सपायरी डेट का अग्निशमन यंत्र। संवाद