शाहजहांपुर। कोरोना संक्रमण काल में बंद चल रहे स्कूलों को खोलने का फरमान जारी होने के बाद सोमवार को जिले के माध्यमिक विद्यालय खुल गए। कक्षा नौ से 12 तक के छात्र-छात्राएं स्कूल पहुंचे, लेकिन उनकी संख्या नाममात्र की रही। स्कूल में पहुंचे विद्यार्थियों को सैनिटाइजेशन के बाद प्रवेश दिया गया। क्लास में भी छात्रों को सामाजिक दूरी के साथ बैठाया गया। हालांकि कई जगह छात्रों ने मास्क नहीं लगाया हुआ था।
सोमवार को माध्यमिक विद्यालय कक्षा नौ से 12 तक पठन-पाठन के लिए खुले तो उनमें रौनक लौट आई है। हालांकि स्कूलों में छात्रों की संख्या कम रही है, लेकिन छात्र स्कूल आकर खुश दिखाई दिए। उनका कहना था कि स्कूल का माहौल अलग होता है। वे आज अपने दोस्तों से मिलकर काफी खुश हैं। शिक्षक भी प्रसन्न नजर आए हैं। कहा कि बच्चों के बिना स्कूल का कोई महत्व नहीं है।
स्कूल खुलना ठीक, मगर शिक्षकों की ड्यूटी हुई लंबी
दो शिफ्टों में विद्यालय खोले जाने से शिक्षकों की ड्यूटी बढ़ने को लेकर निराशा जाहिर की है। उनका कहना है कि दो शिफ्टों में शिक्षण कार्य कराने से शिक्षकों को नौ घंटे की ड्यूटी करनी होगी। सुबह 8:00 से दोपहर 12:00 बजे तथा दोपहर 12:30 से शाम 4:30 बजे तक स्कूल खुलेंगे। ऐसे में सुबह से लेकर शाम तक शिक्षण कार्य कराना शिक्षकों के लिए मुश्किल होगा। उन्होंने स्कूलों को दो शिफ्टों में खोलने की जगह एक कक्षा के 50-50 प्रतिशत बच्चों को दो दिनों में बुलाने का सुझाव दिया है।
सरदार पटेल इंटर कॉलेज
विद्यालय के पुराने भवन में सुबह 10:00 बजे कक्षाएं चल रहीं थीं। लेकिन कक्षाओं में छात्रों की संख्या गिनी चुनी ही थी। कक्षा दस में तीन छात्र मिले तो कक्षा 11 ग्रुप बी-1, बी-2 और कॉमर्स की कक्षाओं में चार, 13 व 10 छात्र पढ़ रहे थे। कक्षा नौ की दो कक्षाएं लगी थी। एक में पांच और दूसरे में तीन छात्र बैठे मिले। प्रवेश के लिए तमाम छात्र मौजूद थे।
आर्य महिला इंटर कॉलेज
विद्यालय में पहली शिफ्ट की कक्षाएं चलती मिलीं। यहां पर भी छात्राओं की संख्या बहुत कम थी। एक कक्षा में नौ छात्राएं थीं तो दूसरी में पांच को शिक्षिका पढ़ाती मिलीं। विभिन्न कक्षाओं में प्रवेश के लिए छात्राएं अपने अभिभावकों के साथ आई थीं। स्कूल में आने वालों के हाथों को सैनिटाइज कराने के लिए एक व्यक्ति गेट पर ही बैठा दिया गया था।
डॉ. सुदामा प्रसाद कन्या इंटर कॉलेज
स्कूल में गेट पर हाथों को सैनिटाइज करने के लिए मशीन लगी थी। छात्राओं का तापमान नापने के लिए थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था भी थी। विद्यालय में कक्षाएं चलती मिलीं, लेकिन उनमें छात्राओं की संख्या अन्य स्कूलों की तरह ही काफी कम रही। कक्षा नौ से 12 तक की अलग-अलग कक्षाओं में कहीं चार तो कहीं पांच बच्चे ही कक्षा में पढ़ते पाए गए।