अयोध्या के विवादित ढांचे की बरसी पर हिंदू और मुस्लिम संगठनों ने शौर्य और विरोध दिवस (काला दिवस) मनाया। मुस्लिमों नेे बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के बैनर तले शांति मार्च निकालकर डीएम राम गणेश को उनके आवास पर 15 सूत्री ज्ञापन दिया। वहीं, हिंदू संगठनों ने मिठाई बांटकर और शंख-घंटे बजाकर खुशियां मनाईं।
हिंदू संगठनों ने शौर्य दिवस के रूप में मनाईं खुशी
बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ने ऋषि आश्रम में शौर्य दिवस मनाया। बजरंग दल के प्रांत संयोजक अनुज कुमार सिंह ने कहा कि छह दिसंबर 1992 को वीरों ने अयोध्या में गुलामी के प्रतीक को गिराकर जो कुर्बानी दी वह व्यर्थ नहीं जाएगी। अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर बन कर रहेगा। इस अवसर पर विहिप जिलाध्यक्ष अनिल गुप्ता, जिला मंत्री राजेश अवस्थी, गोरक्षा प्रमुख कृष्ण कुमार सक्सेना, ऋषिपाल सिंह, अंकित सिंह, राघवेंद्र शुक्ला, सौरभ सोमवंशी, बृजमोहन, रामलखन, शिव हरि, राजाराम, आकाश, रवि मिश्रा, हरीश प्रजापति, रघुनंदन मिश्रा, अनुज जोशी, अश्वनी सिंह आदि मौजूद रहे। हिंदू जागरण मंच ने मिठाई बांटकर विजय दिवस मनाया। यहां जिलाध्यक्ष सर्वेश मिश्रा, प्रदेश मंत्री अजय अग्निहोत्री, अजय मिश्रा, संतोष विश्वकर्मा, चंचल त्रिपाठी, अमित शर्मा, राजेश्वरी राठौर, शालिनी रस्तोगी, नीलम, कमल मिश्रा, विष्णु प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे। शिवसेना ने विजय दिवस मनाकर खुशी मनाई और राम मंदिर का संकल्प दोहराया। जिला प्रमुख सुनीता गुप्ता, नगर प्रमुख लाल बहादुर प्रजापति, मनोज सक्सेना, गोपाल राजपूत, प्रभात मिश्रा, दिनेश कुमार, जितेंद्र नाथ शुक्ला, वीरेंद्र गुप्ता, दिनेश राठौर, राहुल मेहरोत्रा, निशांत राजपूत आदि मौजूद रहे।
मुस्लिम संगठनों ने शांति मार्च निकाल राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन
मुस्लिम समाज ने जामा मस्जिद के इमाम मौलाना हुजूर अहमद मंजरी और बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष आफाक अली खां के नेतृत्व में राष्ट्रपति को 15 सूत्री ज्ञापन भेजकर बाबरी मस्जिद विध्वंस पर आक्रोश व्यक्त किया गया। बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि डीएम कंपाउंड स्थित मस्जिद पर एकत्र हुए और वहां से शांति मार्च निकालकर डीएम आवास पहुंचे। उन्होंने डीएम राम गणेश को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में बाबरीे मस्जिद का निर्माण उसी स्थान पर कराने, बाबरी मस्जिद के पास कब्रिस्तान एवं वक्फ की जमीन वापस दिलाने, बाबरी मस्जिद शहादत के मुल्जिम करार लोगों को सजा दिलाने, सांप्रदायिक दंगों में मारे गए मुसलमानों को सिख दंगों की तर्ज पर मुआवजा दिलाने, आतंकवाद के झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेजे गए मुसलमानों को बाइज्जत बरी कराने, मुसलमानों के संबंध में सच्चर कमेटी की रिपोर्ट लागू करने आदि मांगें की गईं। तीन तलाक और कामन सिविल कोड मुस्लिम पर्सनल लॉ में खुला हस्तक्षेप है, शरीयत में दखलंदाजी रोकी जाए। जेएनयू छात्र नजीब अहमद को बरामद कराने समेत कई मांगें शामिल की गई हैं। यहां विभिन्न मुस्लिम संगठनों के मोअज्ज्म अली सिद्दीकी, डॉ. तारिक अली खां, राहत अली खां, सैयद कासिम रजा, मो. अनीस रजा खां, जुग्गन खां, मिर्जा आसिफ अली, मो. रजा खां, गुलाम गौस खां, मो. नसीम खां, सैयद रिजवान अहमद, वकार अली खां, अनीस अत्तरी आदि शामिल रहे।