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वकील हत्याकांड : साथ में पढ़ाते थे भूपेंद्र और सुरेश गुप्ता

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शाहजहांपुर। वकील भूपेंद्र सिंह हत्याकांड में नए तथ्य सामने आए हैं। किरायेदारी के जिस विवाद में वकील भूपेंद्र सिंह और सुरेश गुप्ता के बीच रंजिश और मुकदमेबाजी की बात कही जा रही है, उसको लेकर बीएसए भाई महेंद्र प्रताप सिंह ने नकारा है। महेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि भूपेंद्र सिंह और सुरेश गुप्ता ने साथ में एक कोचिंग शुरू की थी। कोचिंग जब अच्छी चलने लगी तो सुरेश गुप्ता की नीयत बिगड़ गई। उसने कोचिंग पर कब्जा करने की नीयत से भूपेंद्र को रास्ते से हटाया था। यहीं से दोनों की दोस्ती में दरार आई थी।
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18 अक्तूबर को कचहरी परिसर में दूसरी मंजिल पर एसीजेएम कार्यालय में वकील भूपेंद्र सिंह की तमंचे से गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सीसीटीवी में वकील सुरेश गुप्ता के दिखाई पड़ने पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर पूछताछ की तो उन्होंने हत्या का जुर्म कुबूल लिया था। सुरेश गुप्ता ने बताया कि 2000 में भूपेंद्र सिंह उनके घर में किराये पर कोचिंग चलाता था। जिसे उन्होंने पुलिस की मदद से खाली करा लिया था। तब से भूपेंद्र सिंह ने उन पर 24 मुकदमे दर्ज करा दिए थे। इसी रंजिश में सुरेश गुप्ता ने भूपेंद्र की हत्या करना स्वीकारा था। भूपेंद्र के भाई बदायूं के बीएसए महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि सुरेश गुप्ता और भूपेंद्र में दोस्ती थी। दोनों ने सन् 2000 में सुरेश के मकान में कोचिंग शुरू की थी। सुरेश बॉयोलॉजी पढ़ाते थे जबकि भूपेंद्र मैथ्स और फिजिक्स। जब कोचिंग अच्छी चलने लगी तो सुरेश ने भूपेंद्र को हटाने की कोशिश की। इसका विरोध भूपेंद्र ने किया था। बाद में सुरेश ने भूपेंद्र को पुलिस की मदद से हटा दिया था। महेंद्र प्रताप ने बताया कि इससे पहले भी कई बार भूपेंद्र ने उनसे अपने साथ अनहोनी होने की आशंका जाहिर की थी। पुलिस अधिकारियों से भी शिकायत की थी लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। कचहरी में जिस तरह उनके भाई की हत्या की गई वह पुलिस-प्रशासन की बड़ी असफलता है। अगर समय पर कार्रवाई की गई होती तो भाई की हत्या नहीं होती। महेंद्र प्रताप ने कहा कि पुलिस को नामजद दोनों बेटों की गिरफ्तारी भी करनी चाहिए। अभी पुलिस की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं, अगर सही कार्रवाई नहीं होती तो वह आला अधिकारियों से मिलकर इंसाफ की मांग करेंगे।
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