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गेहूं खरीद : दोपहर बाद तक सूने पड़े रहे मंडियों में अधिकांश क्रय केंद्र

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तिलहर मंडी परिसर में आरएफसी केंद्र पर पहले दिन प्रभारी और बैनर नदारद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। रबी विपणन वर्ष 2022 के तहत समर्थन मूल्य पर गेहूं की सरकारी खरीद शुक्रवार से शुरू हो गई है। लेकिन दोपहर तक मंडियों में अधिकांश क्रय केंद्र गेहूं की आवक नहीं होने से सूने पड़े रहे। सिर्फ रोजा मंडी परिसर के एक क्रय केंद्र पर महज 28 क्विंटल गेहूं की तौल हुई। उधर, ग्रामीण क्षेत्र में स्वीकृत तमाम क्रय केंद्र अभी अस्तित्व में नहीं आ सके हैं। हालांकि मंडियों में आढ़तों पर गेहूं की आवक होने लगी है, लेकिन उसमें नमी शासन से निर्धारित मानक से अधिक बताई जा रही है। इसीलिए, किसान अभी सरकारी केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे हैं।
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शासन ने इस वर्ष गेहूं का समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। शुक्रवार से शुरू हुई गेहूं की सरकारी खरीद के लिए जिले में विभिन्न एजेंसियों के 164 क्रय केंद्र स्वीकृत हुए हैं। लेकिन केंद्र प्रभारी पहले से मान रहे हैं कि शुरुआती सप्ताह में गेहूं की आवक बहुत कम होगी और पहले दिन समर्थन मूल्य पर मामूली खरीद से यही साबित भी हुआ। रोजा मंडी परिसर में विभिन्न एजेंसियों के 12 क्रय केंद्र खुले हैं, लेकिन उनमें सिर्फ आरएफसी द्वितीय केेंद्र पर एक किसान गेहूं लेकर पहुंचा। गेहूं की नई फसल कटने के साथ मंडियों में गल्ला आढ़तों पर बहुतायत से पहुंचने लगी है, लेकिन उसमें नमी शासन से निर्धारित मानक 12 प्रतिशत से अधिक है।
पंजीकरण कराने मेें उदासीन हैं किसान
शासन की गेहूं क्रय नीति के अनुसार सरकारी केंद्रों पर उन्हीं किसानों के गेहूं की तौल कराई जाएगी, जो निर्धारित पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराएंगे। 4.50 लाख से अधिक किसान वाले जनपद में अभी तक गेहूं का समर्थन मूल्य पाने के लिए बमुश्किल 2200 किसानों ने पंजीकरण कराया है। इसकी वजह भी खरीद के पहले दिन से साफ होने लगी है। पिछले साल मंडियों में गल्ला आढ़तों पर किसानों को खरीद सीजन में शुरू से आखिर तक समर्थन मूल्य से करीब 150 से 200 रुपये प्रति क्विंटल कम भाव मिला, लेकिन इस बार हालात बदले दिख रहे हैं।
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रोजा मंडी सचिव प्रवीण अवस्थी के अनुसार मंडी की आढ़तों पर बृहस्पतिवार को 5500 क्विंटल और शुक्रवार शाम तक करीब छह हजार क्विंटल गेहूं पहुंचा। बताया कि गेहूं में नमी 17 से 20 प्रतिशत निकल रही है, लेकिन दिन में कराई गई नीलामी में कम नमी वाले गेहूं की बोली 2020 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंची। यह रेट समर्थन मूल्य से भी पांच रुपये अधिक है। इसीलिए किसान भी सेंटरों के बजाय सीधे आढ़तों पर पहुंच रहे हैं। गत वर्ष प्रदेश में गेहूं की सबसे ज्यादा सरकारी खरीद 2.92 लाख टन इसी जनपद में हुई। इसलिए शासन ने इस वर्ष खरीद लक्ष्य 19 हजार टन बढ़ाकर 3.11 लाख टन कर दिया है जो पूरा होना कठिन दिख रहा है।
तिलहर मंडी के क्रय केंद्रों पर पसरा रहा सन्नाटा
तिलहर। मंडी समिति परिसर में लगाए सरकारी गेहूं खरीद केंद्र महज दिखावा साबित हो रहे हैं। पहले दिन आधी अधूरी व्यवस्थाओं के साथ कुछ केंद्र लगाए गए। कई केंद्रों पर बैनर नदारद मिले। दोपहर को एडीएम फाइनेंस गिरिजेश कुमार चौधरी और प्रभारी जिला खाद्य विपणन अधिकारी कमलेश पांडेय ने मंडी में लगे क्रय केंद्रों का निरीक्षण कर केंद्र प्रभारियों को तत्काल सारी व्यवस्थाएं पूरी करके गेहूं खरीद शुरू करने के निर्देश दिए।
इस दौरान अधिकारियों को आधे अधूरे केंद्र कुछ स्थानों पर लगे मिले, लेकिन तब तक कई क्रय केंद्रों पर बैनर नहीं पहुंचे और उनके केंद्र प्रभारी भी नहीं मिले। सरकारी गेहूं खरीद 2015 रुपये होने के सापेक्ष मंडी में 1960 रुपये से 2000 रुपये प्रति क्विंटल तक खुले बाजार में गेहूं की बिक्री हुई। इस कारण किसी भी केंद्र पर पहले दिन कोई भी खरीद नहीं हो सकी। लोगों ने बताया कि इस बार खुले बाजार में गेहूं का भाव ऊंचा रहने की संभावना है और इसलिए क्रय केंद्रों पर गेहूं आवक कम होने के आसार हैं।
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