पुवायां में धान लगाने के लिए बारिश के इंतजार में खाली पड़ा खेत
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पुवायां। मानसून की रफ्तार सुस्त होने का खामियाजा सीधे किसानों को भुगतना पड़ रहा है। मानसून की बेरुखी से धान की रोपाई पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। डीजल महंगा होने के कारण पंपिंग सेट से सिंचाई पर भारी खर्च आ रहा है, बिजली कटौती के कारण भी सिंचाई में बाधा पड़ रही है। उत्तराखंड, पंजाब आदि प्रदेशों में बारिश हुई है, लेकिन शाहजहांपुर जिले में मंगलवार शाम शहरी क्षेत्र में बारिश हुई, लेकिन पुवायां सहित अन्य क्षेत्र में बूंद तक नहीं गिरी।
पुवायां तहसील में धान की फसल बड़े क्षेत्रफल में की जाती है। गन्ने का रकबा घटने से इस बार धान का रकबा और ज्यादा बढ़ने की संभावना है। किसानों के खेतों में धान की पौध तैयार हो चुकी है। किसान धान की रोपाई के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन मानसून सक्रिय होने से पहले ही सुस्त पड़ गया है। मानसून की बेरुखी ने किसानों को परेशान कर दिया है।
पुवायां, खुटार में नहर की सुविधा नहीं
पुवायां और खुटार क्षेत्र में नहर नहीं होने से लोगों को सिंचाई का लाभ नहीं मिल पाता है। बंडा के पश्चिमी क्षेत्र को छूती हुई सिंधौली होते हुए शारदा नहर गुजरती है, लेकिन इसका लाभ तहसील केे 15 प्रतिशत हिस्से को ही मिल पाता है। पुवायां क्षेत्र में भैंसी नदी का नामोनिशान मिट चुका है और झुकना, गोमती, कठिना में नाममात्र का और कहीं कहीं पर ही पानी है। जिससे यहां भी सिंचाई का संकट है।
पत्ते काटकर करें रोपाई
सेवानिवृत्त कृषि वैज्ञानिक रामबरन यादव का कहना है कि धान की जो पौध 30 से 40 दिन की हो चुकी है, उसके ऊपर के पत्ते काटकर रोपाई की जाए। पूरी पौध लगाने से उपज पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।
पुवायां के सिरखिड़ी गांव के रहने वाले श्यामबाबू शुक्ला ने बताया कि धान की रोपाई करनी है, लेकिन बारिश का इंतजार है। बारिश नहीं होने से रोपाई प्रभावित हो रही है। बिजली कम मिलने के कारण नलकूप भी नहीं चल पा रहे हैं। गन्ने का भुगतान भी नहीं मिला, जिससे काम चल सके। खुटार के रामाधार तिवारी का कहना है कि पंपिंग सेट से सिंचाई कर धान की रोपाई करना और फिर धान में पानी लगाना बेहद ही खर्चीला है। बारिश नहीं हुई तो धान के उत्पादन पर असर पड़ना निश्चित है। किसानों को डीजल पर सब्सिडी दी जानी चाहिए।