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Shahjahanpur News: सन्नाटे में सिमट गईं स्मृति वाटिकाएं...जमीन पर सो गए रोपे पौधे

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ककरा ​स्थित जैव विविधता पार्क में उपहार उपवन में ट्रीगार्ड गिरने से पौधों को हो रहा नुकसान। संव
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शाहजहांपुर। पौधरोपण के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से वर्ष 2021-22 में शुरू की गई नक्षत्र वाटिका और स्मृति वाटिका योजनाएं अब उपेक्षा का शिकार होकर लगभग समाप्त हो चुकी हैं। कभी पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली यह पहल अब विभागीय फाइलों तक सीमित रह गई है। हालत यह है कि वन विभाग के पास भी इन वाटिकाओं का पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं है। वहीं, नगर निगम की उपहार उपवन योजना भी जागरूकता और रखरखाव के अभाव में ठप पड़ गई है।
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वन विभाग ने वर्ष 2021-22 में जिले की विभिन्न रेंज में नक्षत्र और स्मृति वाटिकाएं विकसित की थीं। स्मृति वाटिकाओं का उद्देश्य लोगों को अपने दिवंगत परिजनों की स्मृति में पौधे लगाने के लिए प्रेरित करना था। इसके तहत सेहरामऊ दक्षिणी क्षेत्र के जालपा देवी मंदिर, पुवायां-बंडा मार्ग, दिल्ली-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर मोहनपुर गांव, कलान क्षेत्र के पटना देवकली मंदिर व निगोही की संडा खास नर्सरी सहित कई स्थानों पर पौधरोपण कराया गया था।
इसी तरह नक्षत्र वाटिका में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए थे। समय के साथ इन वाटिकाओं का रखरखाव नहीं हुआ। अब अधिकांश स्थानों पर इनके केवल अवशेष ही दिखाई देते हैं। विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के पास भी इन वाटिकाओं की वर्तमान स्थिति की स्पष्ट जानकारी नहीं है। संवाद
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उपहार उपवन योजना भी पड़ी ठंडी
नगर निगम ने वर्ष 2021 में ककराकलां स्थित जैव विविधता पार्क में उपहार उपवन योजना शुरू की थी। इसके तहत लोग जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ जैसे विशेष अवसरों पर पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण में योगदान दे सकते थे। पौधों की देखभाल के लिए नगर निगम की ओर से 5,100 रुपये की रसीद भी काटी जाती थी। वर्तमान में उपहार उपवन में केवल लगभग 15 पौधे ही बचे हैं। कई ट्री गार्ड टूट चुके हैं और लंबे समय से यहां कोई नया पौधा नहीं लगाया गया। बताया जाता है कि बाढ़ के कारण पहले लगाए गए कई पौधे भी नष्ट हो गए।

देखरेख में लापरवाही से सूख गई पौधशाला की पंचवटी
निगोही। संंडा खास गांव में ब्लॉक क्षेत्र की एकमात्र राजकीय पौधशाला के उद्घाटन के समय करीब पांच वर्ष पहले रोपी गई छायादार पौधों की पंचवटी देखरेख में लापरवाही से सूख गई। पंचवटी में सिर्फ अशोक का एक हरा-भरा वृक्ष बचा है, जबकि पीपल, बरगद, आम और अमरूद के पेड़ ठूंठ में बदल गए हैं। करीब एक हेक्टेयर क्षेत्र में फैली इस पौधशाला का वर्ष 2020-21 में तत्कालीन विधायक रोशन लाल वर्मा ने वन स्मृति वाटिका के तौर पर उद्घाटन किया था। तभी उन्होंने पंचवटी विकसित करने के लिए पांच छायादार पौधे लगाए थे। पशुओं से पौधों की सुरक्षा को ट्री गार्ड भी लगाए गए। यही नहीं, पौधशाला की देखरेख को पांच मजदूर भी नियुक्त किए गए। तब से अभी तक किसी नेता या अधिकारी ने स्मृति वाटिका में कोई पौधा नहीं लगाया है।
सामाजिक वानिकी प्रभाग के तिलहर में तैनात रेंजर अनिल कुमार का कहना है कि उन्होंने गत वर्ष यहां का कार्यभार लिया है, जबकि पंचवटी के पौधे उनके कार्यकाल के कई वर्ष पहले लगाए थे। संवाद
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उपेक्षित पड़ी स्मृति वाटिका...उग आई घास
तिलहर। मोहनपुर गांव में वन विभाग की ओर से अंत्येष्टि स्थल पर विकसित की गई स्मृति वाटिका उपेक्षित पड़ी है। देखरेख के अभाव में वाटिका के परिसर में घास उग आई है और वहां नए पौधों का रोपण भी नहीं किया गया है। ग्राम प्रधान सुशीला देवी के पति सुखदेव सिंह को स्मृति वाटिका का संरक्षक बनाया गया था, लेकिन सात माह पहले गांव में हुई एक हत्या के मामले में उनके जेल चले जाने के बाद से वाटिका की नियमित देखभाल बंद हो गई। हालांकि, परिसर के चारों ओर पहले से लगे नीम, पीपल, जामुन, आम समेत अन्य पौधे मौजूद हैं, लेकिन उचित देखरेख के अभाव में परिसर की स्थिति खराब हो गई है। संवाद

वर्ष 2021-22 में नक्षत्र और स्मृति वाटिका योजना संचालित की गई थी। इसके बाद इस संबंध में शासन से कोई नया निर्देश नहीं मिला। भविष्य में निर्देश मिलने पर योजना के अनुसार काम किया जाएगा।
- सचिन कुमार, प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ)
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जैव विविधता पार्क में उपहार उपवन योजना के प्रति लोगों को फिर से जागरूक किया जाएगा। संबंधित कर्मचारियों को पौधों की समुचित देखभाल के निर्देश दिए गए हैं।
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-सौम्या गुरुरानी, नगर आयुक्त
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