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महंगाई: नीबू के नखरे सातवें आसमान पर, सब्जियां भी खा रहीं भाव

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शाहजहांपुर में बहादुरगंज छोटी सब्जी मंडी में सब्जियों का मोलभाव करते लोग। संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। त्योहारी सीजन में सब्जियां भाव खा रही हैं। नीबू के नखरे तो सातवें आसमान पर जा पहुंचे हैं। नवरात्र खत्म हो गए हैं, रामनवमी भी हो गई, लेकिन अभी रमजान का महीना चल रहा है। परंतु, सब्जियों के भाव घटने के बजाय बढ़ रहे हैं। इसके पीछे आवक में कमी और मांग अधिक होना बताया जा रहा है।
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एक सप्ताह पहले तक भिंडी, तोरई, करेला 40 से 60 रुपये किलो तक बिके, लेकिन अब यह सभी सब्जियां 80 से 100 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रही हैं। यही नहीं, नींबू 250 से 300 रुपये किलो के भाव पहुंच जाने से ज्यादातर लोग विक्रेताओं से उसका मोलभाव कर आगे बढ़ रहे हैं। हरी मिर्च, चुकंदर, खीरा के दाम पहले से चढ़े होने के कारण सलाद भी भोजन से दूरी बनाने लगा है।
जिले में करीब 25 हजार हेक्टेयर में प्याज, टमाटर, लौकी, तोरई, बैंगन, खीरा, शिमला मिर्च, भिंडी, अरबी आदि फसलें उगाई जाती हैं। खास यह है कि खपत की तुलना में यहां पैदावार कम होने से आलू, प्याज, टमाटर, हरी मटर आदि मंडी के सब्जी आढ़ती उत्तराखंड समेत अन्य कई राज्यों से मंगाते हैं, लेकिन खीरा की खेती इतने बड़े पैमाने पर होती है कि यहां से ट्रक भरकर दिल्ली, लखनऊ, मेरठ आदि दूरस्थ शहरों तक जाते हैं। होली से पहले तक यह सारी सब्जियां सस्ते दामों पर बिकीं, लेकिन अब आलू, टमाटर को छोड़कर अधिकांश मौसमी सब्जियां भाव दिखा रही हैं।
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फुटकर में दस रुपये का एक नीबू
बहादुरगंज की छोटी सब्जी मंडी में नीबू 60 से 70 रुपये का 250 ग्राम मिल रहा है। जो लोग भोजन में जायका बढ़ाने या फिर पेट खराब होने आदि वजहों से नीबू कम ले रहे हैं, उन्हें एक नीबू के दस रुपये चुकाने पड़ रहे हैं। रोजा मंडी के थोक सब्जी आढ़ती सुनील कुमार के अनुसार अभी नीबू की स्थानीय फसल नहीं आई है और जिले में उसकी आवक लखनऊ के थोक आढ़ती से हो रही है। इन दिनों मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से नीबू आ रहा है, लेकिन भाड़ा बढ़ जाने से लखनऊ आढ़त पर भी नीबू के थोक दाम चढ़ गए हैं।
भाड़ा बढ़ने से फलों के चढ़े थोक दाम
रोजा मंडी में फलों के थोक विक्रेता वेद प्रकाश गुप्ता के अनुसार दक्षिण भारत समेत पहाड़ी राज्यों से मंगाया गया सेब, संतरा शीतगृहों में रखा है, लेकिन उसे मंगाने का खर्च बहुत बढ़ गया है। तमिलनाडु से आने वाले फलों के ट्रक का किराया 30 से 50 हजार रुपये तक बढ़ गया है। इसीलिए यह फल फुटकर में भी महंगे हो गए हैं। दो साल पहले तक सेब की पेटी (13 किलो) 500 से 700 रुपये तक बिकती थी, लेकिन अब 1300 से 1500 रुपये में फुटकर विक्रेता खरीदने को मजबूर हैं। जिले में नदियों के रेतीले इलाके कम होने से तरबूज-खरबूजा आदि मौसमी फलों की खेती कम हो गई है। बाजार में बिक रहा काला तरबूज और सफेद खरबूजा दिल्ली, हरियाणा आदि राज्यों से ज्यादा भाड़ा चुकाकर मंगाना पड़ रहा है।
जन सामान्य की बात
जेब दे जाती जवाब
सब्जियां खरीदने मंडी जाने पर उनके बेतहाशा बढ़े भाव ज्यादा खरीदारी करने से रोक रहे हैं। कई बार कोई सब्जी खाने की इच्छा होती है, लेकिन उसे खरीदने की जेब इजाजत नहीं देती। -आशीष श्रीवास्तव, आनंदपुरम कॉलोनी
बढ़ी डीजल कीमतों का असर
हर साल नवरात्र आते हैं, लेकिन सब्जियों के दाम कभी इतने नहीं बढ़े। बीते कुछ माह में डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर सब्जियों पर बेतहाशा छाई महंगाई के तौर पर दिख रहा है। -गोविंद कुमार, कच्चा कटरा
सिर्फ आलू-टमाटर सहारा
सब्जी मंडी जाने पर जिस सब्जी का भाव पूछो, वही महंगी होती है। गरीब तबके के लोगों को सब्जियां सिर्फ ललचा रही हैं। आम आदमी के लिए सिर्फ आलू, टमाटर, लौकी का सहारा बचा है। -रानी देवी, कांशीराम कॉलोनी
उचित दर की दुकानें खुलें
जिस तरह आलू-प्याज के दाम सामान्य से ज्यादा चढ़ने पर मंडियों में उनकी फुटकर बिक्री के स्टॉल लगते हैं, उसी तरह आम आदमी के लिए भी सब्जियों की उचित दरों वाली दुकानें खुलनी चाहिए। -रवीना, कचहरी मार्ग
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