शाहजहांपुर। नहर विभाग की उदासीनता के चलते मीरानपुर कटरा क्षेत्र के किसान सिंचाई के लिए परेशान हैं। पिछले दो वर्ष से शारदा नहर खंड के कटरा रजबहा की वाटरफॉल (झाल) टूटी हुई है। इस वजह से नहर में ऊंचाई के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए नहर में बनाए गए कुलाबों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। पानी कुलाबों से नीचे बहने के कारण आसपास के तमाम खेतों में सिंचाई करने में किसानों को भारी दिक्कत हो रही है।
अंग्रेजी शासन काल में सन 1918 में शारदा नहर की ब्रांच का निर्माण पीलीभीत के कुलड़िया डाम से शुरू हुआ था। सन 1926 में हरदोई में नहर का काम समाप्त हो पाया था। उस दौरान कटरा में ऊंचाई के खेतों तक पानी देने के लिए नहर में पक्की दीवार खड़ी कर झाल बनाई गई थी। दो वर्ष पहले यह झाल रबी सीजन में गेहूं फसल की सिंचाई के समय टूट गई। सिचांई की समस्या होने पर किसानों ने अधिकारियों से शिकायत की तो टूटी झाल पर बोरियों में ईंटें भरकर वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई। बोरियां गलने पर पानी के तेज बहाव से ईंटें भी बह गईं।
झाल टूट जाने से रजबहा के आसपास कटरा समेत सैदापुर, सालपुर, नवदिया, सैदापुर, रायपुर, नगरा, सिउरा, खमरिया आदि गांवों के किसान नहर के पानी से फसलों की सिंचाई को तरस रहे हैं, जबकि नहर विभाग के सींचपाल उनसे आबपाशी (जलकर) वसूल रहे हैं। दूसरी ओर किसान पंपिंग सेट से खेतों की सिंचाई करने को मजबूर हैं। नहर खंड के क्षेत्रीय सहायक अभियंता दिवाकर भी मानते हैं कि झाल टूटी होने से किसान परेशान हैं। आचार संहिता हटने के बाद ही झाल बनाने का काम शुरू हो सकेगा।
किसानों की बात
पिछले दो वर्ष से झाल टूटी है। फसलों में सिंचाई की समस्या है, लेकिन शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इससे फसलों की पैदावार पर फर्क पड़ा है। -विश्वनाथ, मीरानपुर कटरा
गेहूं की फसल तैयार हो रही है, लेकिन नहर में झाल टूटी होने के कारण सिंचाई करना कठिन हो गया है। कई बार शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नही किया जा रहा है। -हरिकरन त्रिपाठी, मीरानपुर कटरा
नहर विभाग के अभियंताओं से कई बार झाल ठीक कराने को कहा, लेकिन उन्होंने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। इस कारण फसलों की सिंचाई करने में बहुत दिक्कत हो रही है। -दानिश बेग, मीरानपुर कटरा
शरदा नहर की मुख्य शाखा से कटरा माइनर निकलती है। उस पर बनाई गई झाल टूट जाने से आसपास के ऊंचाई वाले खेतों में सिंचाई करने में बहुत परेशानी हो रही है। -राजू, मीरानपुर कटरा
हमारे खेत में बोरिंग भी नहीं है, जिससे सिंचाई हो सके। नहर के पानी से सिंचाई पर निर्भर रहे, लेकिन झाल क्षतिग्रस्त हो जाने की वजह से खेतों को नहर का पानी नहीं मिल रहा है। -शराफत, मीरानपुर कटरा
शारदा माइनर की झाल टूट जाने से सारा पानी नीचे वाले खेतों में चला जाता है। कुलाबों तक पानी नहीं पहुंचने से वह सूखे पड़े हैं। पंपिंग सेट चलाने पर डीजल खर्च बढ़ रहा है। -पप्पू, मीरानपुर कटरा
कटरा रजबहा के वाटर फाल (झाल) का पुनर्निर्माण कराकर किसानों की इस समस्या का स्थायी समाधान कराया जाएगा। करीब 50 लाख रुपये की लागत से बनाई परियोजना शासन से स्वीकृत हो चुकी है। टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन चुनाव आचार संहिता लागू हो गई। अब फसलों को ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं है। गर्मियों मेें खरीफ फसलों की बुआई से पहले नई झाल निर्मित कराने का प्रयास किया जा रहा है, क्योंकि उस वक्त सिंचाई की आवश्यकता बढ़ जाएगी। -सुनील कुमार भास्कर, अधिशासी अभियंता, शारदा नहर खंड