शाहजहांपुर। वित्त वर्ष 2020-21 खत्म होने में अब सिर्फ दो दिन बाकी बचे हैं, लेकिन इस दौरान शुरू हुई विकास की कई अहम परियोजनाओं का काम अवशेष बजट नहीं मिल पाने से अधर में लटका है। जिस मद में जितनी धनराशि मिली, उससे कहीं अधिक काम कराए जा चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार पहले विधानसभा चुनाव और बाद में एमएलसी चुनाव की आचार संहिता प्रभावी रहने के कारण कई विकास कार्यों को स्वीकृत बजट की शेष धनराशि शासन से प्राप्त नहीं हो सकी।
सिंधौली ब्लॉक के गांव कठपुरा स्थित खन्नौत नदी के निर्माणाधीन पुल और कोलाघाट पैंटून पुल के दोनों ओर पहुंच मार्ग से जुड़े काम इसी वजह से रुके हैं। हालांकि, अधिकारी यह भी कहते हैं कि जिस परियोजना के बजट की शेष धनराशि मिलेगी, उस पर तत्काल काम शुरू कराकर उन्हें पूर्ण कराया जाएगा।
बता देें कि गत वर्ष दिसंबर के दूसरे सप्ताह में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने शहर समेत जिले की विभिन्न तहसीलों में 37.70 करोड़ रुपये लागत की विकास और निर्माण से जुड़ी करीब डेढ़ दर्जन परियोजनाओं का शिलान्यास किया था। इसी दौरान उन्होंने 57.13 करोड़ रुपये की एक दर्जन से अधिक परियोजनाओं का लोकार्पण भी किया था। शिलान्यास वाली परियोजनाओं का बजट भी गत वर्ष 24 नवंबर से स्वीकृत होना शुरू हुआ। उस दौरान जल्दबाजी में सिंधौली क्षेत्र के कठपुरा में खन्नौत नदी पर निर्माणाधीन पुल और ककरा कलां में गर्रा नदी पर पुल का भी शिलान्यास कर दिया गया।
गर्रा पुल को दोनों ओर पहुंच मार्गों से जोडने का काम कार्यदायी संस्था राज्य सेतु निर्माण निगम के अभियंता बाद में भी कराते रहे। उधर, कोलाघाट में पैंटून पुल और और उसके दोनों ओर करीब दो किमी पहुंच मार्ग बनाने पर लोक निर्माण विभाग ने विभागीय ठेकेदारों से करीब 95 लाख रुपये के काम करा लिए, लेकिन तब तक आचार संहिता प्रभावी हो जाने से इसके लिए बजट अभी तक स्वीकृत नहीं हो सका। नतीजे में वहां आए दिन रेतीले रास्ते पर वाहन फंसने से अक्सर जाम लग रहा है और लोगों को आवागमन में दिक्कत हो रही है। अधिकारियों का कहना है कि वित्त मंत्री और लोनिवि मंत्री इसी जनपद के होने के नाते अब सभी परियोजनाओं के लिए बजट की अवशेष धनराशि जल्द मिलेगी।
पूर्ववत जारी रहा आवासों का निर्माण कार्य
जहां एक ओर विकास की नई परियोजनाओं में अवशेष बजट की कमी बाधक साबित हुई, वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत आवासों का निर्माण कार्य पूर्ववत जारी रहा। बीत रहे वित्त वर्ष में जनपद को ग्रामीण क्षेत्र में 6155 लक्ष्य के सापेक्ष 6083 आवास स्वीकृत हुए। इनमेें से 6000 लाभार्थियों को पहली, 5877 को दूसरी और 5339 लाभार्थियों को तीसरी अंतिम किश्त भेजी जा चुकी है। अब तक 5460 आवास बनाए जा चुके हैं, जिनमें बीते दो दिन के दौरान बनाए गए 37 नए आवास भी शामिल हैं। जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक अवधेश राम के अनुसार यह योजना पहले से प्रभावी होने के कारण न तो बजट की कमी आड़े आई और न ही आचार संहिता। उनका कहना है कि केंद्र सरकार की योजना के कारण शासन के सेंट्रल पूल एकाउंट में पर्याप्त धनराशि है और उसे लखनऊ मुख्यालय से सीधे लाभार्थी के खातों में भेजा जा रहा है।
इन प्रमुख परियोजनाओं को अवशेष बजट मिलने का इंतजार
परियोजना स्वीकृत बजट (करोड़ रुपये)
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट 12.70
मल्टी लेविल कार पार्किंग 5.67
तिलहर तहसील का अनावासीय भवन 9.64
रोजा में बाडीगांव मार्ग पर नाला निर्माण 1.11
शहर के बहादुरपुरा में नाला निर्माण 1.50
बौरी (मदनापुर) जूनियर स्कूल उच्चीकरण 1.50
शुजातपुर (भावलखेड़ा) जूनियर स्कूल उच्चीकरण 0.70
गुलरा नौगवां (भावलखेड़ा) जूनियर स्कूल उच्चीकरण 0.70
रमापुर उत्तरी (कटरा) जूनियर स्कूल उच्चीकरण 0.70
महोलिया (खुटार) जूनियर स्कूल उच्चीकरण 0.70
दाउदपुर (भावलखेड़ा) वृहद गौ संरक्षण केंद्र 1.20
घूरखेड़ा (ददरौल) वृहद गौ संरक्षण केंद्र 1.20
सथरा धर्मपुर (कलान) वृहद गौ संरक्षण केंद्र 1.20
अधिकारियों की बात
कोलाघाट पैंटून पुल के पहुंच मार्ग को व्यवस्थित कराना विभाग की शीर्ष प्राथमिकता है क्योंकि वहां रास्ता कच्चा और रेतीला होने से आवागमन में कठिनाई हो रही है। सेतु निर्माण निगम की बरेली इकाई कोलाघाट में क्षतिग्रस्त पुल के हिस्से में पुनर्निर्माण को अपने स्तर से इस्टीमेट बनाएगी। आचार संहिता हटने पर लखनऊ जाकर शासन से पैंटून पुल पहुंच निर्माण समेत विभाग से जुड़ी अन्य परियोजनाओं के लिए बजट की शेष धनराशि अवमुक्त कराई जाएगी।
-राजेश चौधरी, अधिशासी अभियंता, लोनिवि (निर्माण खंड-1)
आचार संहिता लागू होने से पहले जिन विभागों को धनराशि मिली, उससे काम कराए गए। निर्वाचन कार्य की व्यस्तता के कारण अधिकांश विभागों से अभी बजट की धनराशि व्यय होने के बारे में आख्या प्राप्त नहीं हुई है। संबंधित विभागों के रिपोर्ट मांगी गई है। इसलिए बजट व्यय और कार्य प्रगति की वास्तविक स्थिति 31 मार्च के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। कई विभागों को बजट धनराशि देर से प्राप्त हो रही है।
-बाबू लाल, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी