जमौर स्थित सागर इंडस्ट्रीज में जांच करती जीएसटी की टीम। संवाद
कांट (शाहजहांपुर)। डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर शनिवार को औद्योगिक क्षेत्र खाद्य तेल फैक्टरी सागर इंडस्ट्रीज पर जीएसटी टीम ने छापा मारा। जांच में पाया गया कि फैक्टरी में बोगस फर्म बनाकर कर चोरी की जा रही थी। कर पेनाल्टी मिलाकर लगभग 55 लाख रुपये की चोरी मिली। टीम ने फैक्टरी संचालक ललित कुमार से 10 लाख रुपये जमा कराए हैं।
डिप्टी कमिश्नर एसआईबी बरेली अनिरुद्ध सिंह, असिस्टेंट कमिश्नर वेदप्रकाश शुक्ला और राज्य कर अधिकारी आरबी शर्मा के साथ शनिवार दोपहर फैक्टरी में पहुंचे। डाटा विश्लेषण पर पाया गया कि फैक्टरी संचालक ने चार वर्षों में लगभग 60 करोड़ के एडिबल ऑयल की बिक्री करते हुए मात्र आठ लाख रुपये कर अदा किया था।
इस आधार पर फैक्टरी की जांच की गई। जांच में पाया गया कि फैक्टरी संचालक ने नकद कर भुगतान से बचने एवं फर्जी आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) के अर्जन के लिए बोगस एवं अस्तित्वहीन फर्जी फर्मों की अग्रवर्ती फर्जी फर्मों से माल की बिना वास्तविक सप्लाई प्राप्त किए हुए केवल बोगस प्रपत्रों से खरीद दिखाते हुए देय कर का समायोजन फर्जी अदेय आईटीसी से किया गया है।
ई-वे बिल से फैक्टरी संचालक ने डाउनलोड कर लिए। ई-वे बिलों की जांच में पाया गया कि जिन ट्रकों पर ई-वे बिल डाउनलोड किए गए, वे रास्ते में पड़ने वाले टोल प्लाजा से गुजरे ही नहीं। इससे प्रमाणित होता है कि संचालक ने ई-वे बिल खरीदे हैं। फैक्टरी में पाए गए संदिग्ध अभिलेखों को सीज कर दिया गया है।
जांच में पाया गया कि फर्म ने प्रथमदृष्टया दो करोड़ के सकल टर्नओवर का करापवंचन किया है। तथ्यों के आधार पर संचालक ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए तुरंत 10 लाख रुपये सरकारी खजाने में जमा किए। डिप्टी कमिश्नर अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि कर पेनाल्टी मिलाकर लगभग 55 लाख रुपये की चोरी हुई है। बाकी देय का आकलन प्रपत्रों के आधार पर किया जाएगा।