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योगी जी ! गोशालाओं में न चारा, न भूसा, मर रहे पशु

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शाहजहांपुर। गोशालाएं प्रदेश की सरकारी प्रमुख योजनाओं में शामिल हैं। मगर यहां जिले भर की गोशालाओं का बुरा हाल है। गोशालाओं में पल रहे पशुओं को खाने के लिए न हरा चारा है और न हीं भूसा। पशुओं का ठीक से इलाज भी नहीं किया जा रहा है। हालात यह है कि गोशालाओं में रोज एक-दो गायों की मौत हो रही है। गायों की दुर्दशा पर न जिला प्रशासन ध्यान दे रहा और न गोशाला संचालक।
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शहर में एक गोशाला और दूसरी नंदीशाला है। दोनों का संचालन नगर निगम प्रशासन की देखदेख में होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में 49 गोशालाएं अस्थाई तौर पर संचालित हो रही हैं। जहां एक के बाद एक गाय की मौत हो रही है। इसका कारण गोशालाओं व नंदीशालाओं में हरा चारा नहीं पहुंचना है। गोवंशों को यहां कैद जैसा करके रखा जाता है। चरने के लिए चरागाह की व्यवस्था नहीं है। कई पशुओं की बीमारी के चलते मौत भी हो चुकी है। इसके बाद भी गोवंशों की दशा पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिसको लेकर सोशल मीडिया पर भी प्रशासन के रवैये को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है।
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नंदीशाला में तीन दिन के अंदर मर गए आठ सांड
- पुवायां रोड स्थित सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस में नगर निगम की नंदीशाला बनी है। जिसमें निराश्रित गोवंश को रखा जाता है। नंदीशाला बनाए जाने पर यहां 250 से ज्यादा गोवंश को लाया गया था। नंदीशाला में कार्यरत नगर निगम के कर्मचारियों की माने तो एक महीना पहले यहां 135 गोवंश थे। जो अब घटकर 117 ही रह गये हैं। एक महीने में 18 गोवंशों की बीमारी से मौत होनी बताई जाती है। अभी पिछले तीन दिनों में ही आठ सांडों की मौत हो चुकी है।
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मघईटोला स्थित गोशाला में बीमार पड़ी तीन गायें
- मघईटोला में नगर निगम संचालित एक गोशाला है। जिसमें करीब 179 गाय हैं। इनमें एक बछड़ा घायलावस्था में है, जिसका गोरक्षकों के द्वारा इलाज कराया जा रहा है। दो अन्य गाय बीमार पड़ी हैं। गोशाला में भूसा पर्याप्त मात्रा में मिला लेकिन हरा चारा यहां पर भी नहीं है। बुधवार को ठेकेदार चार बोरी चोकर लेकर पहुंचा, जिसके गायों को भूसे में मिलाकर दे दिया गया।
तीन शिफ्टों में लगती है कर्मचारियों की ड्यूटी
- नंदीशाला और गोशाला में कर्मचारियों की ड्यूटी तीन शिफ्ट में लगती है। इनमें तीन सुपरवाइजर व नौ सफाई कर्मचारी हैं। पहली शिफ्ट सुबह सात बजे से दोपहर तीन बजे, दूसरी दोपहर तीन से रात 11 और तीसरी रात 11 बजे से सुबह सात बजे तक रहती है। इनके अलावा कुछ अतिरिक्त कर्मचारी भी लगा दिए जाते हैं।
महोलिया गोशाला में गाय की मौत
खुटार। महोलिया वीरान गांव की गोशाला में बुधवार को एक गाय ने दम तोड़ दिया। ग्राम पंचायत सचिव ने गोशाला में दो सौ क्विंटल भूसा होने का दावा किया है, वहीं ग्वालों ने भूसा और चारा होने से इंकार कर दिया है।
बुधवार को गोरक्षा दल के खुटार ब्लाक अध्यक्ष सचिन मिश्रा कार्यकर्ताओं के साथ महोलिया गोशाला पहुंचे। यहां एक गाय मरी पड़ी थी। कई गाय बीमार थीं। गायों के लिए भूसा तक नही पड़ा था। गोशाला में मौजूद ग्वालों आनंद, प्रेमपाल और रामशंकर ने बताया कि गोशाला में इस समय 90 गाय है। देखरेख के लिए तीन लोगों को रखा गया है। दो लोग गायों को चराने ले जाते हैं और एक ग्वाला चारा आदि की व्यवस्था करता है।
गोशाला में भूसा और चारा नहीं है। कई पशु बीमार हैं। प्रधान और सचिव से इस बारे में शिकायत की गई, लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। इस संबंध में ग्राम पंचायत सचिव शिवसिंह का कहना है कि सोमवार और बुधवार को गाय की मौत की सूचना मिली थी। गाय की मौत किस वजह से हुई है। यह मेरी जानकारी में नहीं है। गायों के लिए दस हजार रुपये खर्च करके दो सौ क्विंटल भूसा बंडा से मंगाया गया था, जो प्रधान के गांव में लगा रखा है। वहां से भूसा लाकर प्रतिदिन गायों को डाला जा रहा है।
महोलिया वीरान गोशाला की देखरेख की जिम्मेदारी प्रधान और सचिव की है। दो गायों की मौत सांड़ के घायल कर देने से हुई है। - डॉ. विवेक शुक्ला, पशुधन प्रसार अधिकारी, राजकीय गोसदन सिमरा वीरान
जैतीपुर की अस्थाई गोशाला में नहीं एक भी गाय
जैतीपुर। क्षेत्र में बनी अस्थाई गौशाला में इस समय एक भी गाय नहीं है, ना ही अब वहां कोई ग्वाला रहता है। ग्राम प्रधानों के माध्यम से ही वहां पर रखरखाव की व्यवस्था संचालित की जाती है। क्षेत्र की अस्थाई गौशाला ग्राम पंचायत अमईपुर सड़ा में है। जहां इस समय एक भी गाय नहीं है। सभी गायों को गांव के गौपालकों को सुपुर्दगी में दे दिया गया था। वैसे भी गौशाला में भूसा रखने और ग्वालों के रहने के लिए कोई व्यवस्था नहंीं है। क्षेत्र में खुले में गाय घूम रही हैं। जिससे किसानों की फसलों का भी नुकसान हो रहा है।
गायों को गोपालको को सुपुर्द कर दिया गया था, तब से वहां कोई गोपालक नहीं रहता है। पहले चार गोपालक रहते थे। अब खुद ही प्राइवेट तौर से वहां रखरखाव की व्यवस्था है। - भीकम सिंह, ग्राम प्रधान अमईपुर सड़ा
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