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गंगा फिर उफनाई, कोला गांव के पास कटान कर रही रामगंगा

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तिलहर के गांव चितीवोझी में मकान का कटान करती गर्रा नदी। संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी के बांधों-बैराजों से पानी की निकासी लगातार कम होने के बावजूद बारिश के कारण जिले से होकर बहने वाली नदियों में उफान कम नहीं हो रहा है। कलान क्षेत्र के भैंसार बांध पर गंगा मंगलवार को लगातार पांचवें दिन 32 सेंटीमीटर उफना गई। हालांकि, रामगंगा में चौबारी घाट से लेकर परौर तक पानी कम हो रहा है, लेकिन परौर क्षेत्र के मोहनपुर व नारायणनगर पश्चिमी गांव के बीच नदी की धारा से भूमि कटान जारी है। कोला गांव के पास भी रामगंगा भूमि कटान कर रही है। इधर, शहर के समीप गर्रा और खन्नौत नदियों में बीते दिन की तुलना में पानी कम हुआ, लेकिन दोनों नदियों का जलस्तर सामान्य से अधिक बना हुआ है।
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बाढ़ नियंत्रण कक्ष से सिंचाई विभाग के तार बाबू गिरिजा किशोर मिश्र ने बताया कि सभी बांधों और बैराजों से पानी की निकासी लगातार कम हो रही है। नरौरा बैराज से मंगलवार सुबह 59218 क्यूसेक पानी की निकासी होने की सूचना मिली है, लेकिन पश्चिमी यूपी की नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश होने के कारण गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि मंगलवार सुबह कलान क्षेत्र के भैंसार बांध पर गंगा का जलस्तर 142.67 मीटर मापा गया जो कि बीते दिन के सापेक्ष 32 सेमी ज्यादा है।
चूंकि, बदायूं के कछला घाट पर गंगा का जलस्तर 161.90 मीटर पर स्थिर है। इसलिए बुधवार से गंगा में पानी कम होने के आसार हैं।
उधर, रामगंगा जलालाबाद क्षेत्र में कोलाघाट से लेकर परौर क्षेत्र तक जैसे-जैसे घट रही है, नदी के किनारे की तीव्र वेग से बह रही धारा जमीन भी काट रही है। कोलाघाट पुल से भूमि कटान के स्थान साफ नजर आ रहे हैं। तार बाबू के अनुसार रामगंगा का जलस्तर 19 सेमी घटकर 159.95 मीटर हो गया है। उन्होंने बताया कि किच्छा, खो, हरेली, रामनगर और कालागढ़ बैराज से पानी की निकासी दो हजार क्यूसेक कम हो गई है और इसे देखते रामगंगा के जलस्तर में कमी जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि ड्यूनी डॉम से पानी की निकासी 1200 क्यूसेक कम होकर मात्र 306 क्यूसेक रह गई है। इस कारण गर्रा में दस सेमी और खन्नौत में 15 सेमी पानी कम हो गया है।
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रामगंगा से कटान रोकने को लगाईं बालू की बोरियां
परौर। रामगंगा में पानी घटा, लेकिन कटान बढ़ गया है। नारायण नगर पश्चिमी व मोहनपुर गांव को सुरक्षित रखने के लिए मिट्टी डालकर बनाई गई पटरी की सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने ऊंचाई बढ़ाकर वहां बालू से भरी बोरियां लगाने का काम शुरू कराया है, लेकिन कटान थम नहीं रहा है। नारायण नगर में श्रीराम कुशवाहा और मोहनपुर में साबिर के खेत के पास नदी की धारा जमीन काट रही है। नारायणनगर निवासी श्रीराम, श्याम सुंदर कुशवाहा, झुमुक लाल कश्यप, रामनरेश कुशवाहा, मोहनपुर के मदन पाल सिंह, कल्लू सिंह, राम चरण सिंह, सीताराम कश्यप, रामेश्वर कश्यप, सुखलाल गुर्जर, वीरपाल आदि कटान रोकने को कारगर उपाय किए जाने की मांग की है।
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गर्रा नदी में समा गए तटवर्ती गांवों के कई मकान
तिलहर। गर्रा नदी के जलस्तर में कमी आने के साथ ही तटवर्ती गांवों में कटान तेज हो गया है। गांव चितीबोझी घनश्यामपुर में तीन मकान नदी में समा गए, वहीं लगभग एक दर्जन मकानों के नदी में जाने का खतरा बना हुआ है। मंगलवार को नायब तहसीलदार भानु प्रताप और लेखपाल रमेश चंद्र शर्मा ने गांव का दौरा कर पीड़ित ग्रामीणों को गांव के प्राइमरी स्कूल में शरण दिलाकर राशन और प्राथमिक सामान मुहैया कराया। चितीवोझी घनश्यामपुर गांव के उत्तर दिशा में गर्रा लगातार कटान कर रही है। नदी के किनारे लगभग एक दर्जन मकानों को खतरा बना हुआ है। गांव के सोनपाल, रामचंद्र और राजेंद्र के मकान नदी में समा गए। नदी के किनारे बसे तमाम लोग अपने मकानों को खाली करके उनका मलबा उठाकर अन्यत्र ले जाने में जुटे हैं।
नायब तहसीलदार ने बताया कि तीन घर नदी में जाने के बाद कुछ अन्य परिवारों के लोगों को गांव के प्राइमरी स्कूल में रखा जा रहा है। साथ ही गांव के कोटेदार रामचंद्र से उन्हें राशन और मिट्टी का तेल दिलाया जा रहा है। बाढ़ पीड़ित सोनपाल ने बताया कि उसका मकान नदी में चला गया घरेलू सामान नष्ट हो गया। पीड़ित राजेंद्र ने बताया कि उसका छप्पर में अनाज रखा था वह भी नदी में चला गया। गांव के रजत, रामस्वरूप सहित अन्य कई लोगों के घरों को खतरा बना हुआ है। तहसीलदार तृप्ति गुप्ता के अनुसार तटवर्ती गांवों के ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा रहा है। साथ ही नदी के किनारे बसे ग्रामीणों को वहां से हटने के निर्देश दिए गए हैं। संवाद
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