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ग्राउंड रिपोर्ट- पुवायां में प्रसाद परिवार के तहेरे-चचेरे भाई की प्रतिष्ठा दांव पर

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पुवायां (शाहजहांपुर)। शाहजहांपुर जिले की पुवायां सुरक्षित सीट पर प्रतिष्ठित प्रसाद परिवार की विरासत संभालने वाले दो कुंवर आमने सामने हैं। प्राविधिक शिक्षा मंत्री जितिन प्रसाद भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में जोर आजमाइश कर रहे हैं तो उनके चचेरे भाई पूर्व एमएलसी जयेश प्रसाद सपा प्रत्याशी के पक्ष में पसीना बहा रहे हैं।
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मिनी पंजाब के नाम से मशहूर और अन्न उत्पादन में प्रदेश में अपनी अलग पहचान रखने वाले पुवायां की धरती में अगर सियासी ‘रसूख’ की बात चलेगी तो सबसे पहला नाम कांग्रेस के मरहूम नेता जितेंद्र प्रसाद उर्फ बड़े बाबा साहब का सामने आएगा। पुवायां विधानसभा के गांव प्रसादपुर में प्रसाद परिवार का फार्म हाउस होने के कारण यह सीट उनकी गृह क्षेत्र की सीट भी है। इसके बाद मेनका गांधी भी इस क्षेत्र में काफी प्रभावी रहीं है।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और नरसिम्हा राव के राजनीतिक सलाहकार के अलावा पार्टी संगठन में कई पदों पर आसीन रहे जितेंद्र प्रसाद अकेले ऐसा नेता थे, जिनके इशारे पर पुवायां में विधायक चुने जाते थे। 1962 से लगातार सुरक्षित स्व. बाबा साहब के गृह क्षेत्र की यह सीट उनके प्रभाव के कारण 15 चुनावों में अब तक आठ बार कांग्रेस के कब्जे में रही है।
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पुवायां विधानसभा सीट पहले पीलीभीत संसदीय क्षेत्र का हिस्सा थी। वर्ष 2009 में पुवायां विधानसभा को शाहजहांपुर लोकसभा क्षेत्र में शामिल किया गया था। पीलीभीत संसदीय क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण पुवायां मेनका गांधी का भी गढ़ रहा है। भाजपा ने इस बार यहां से कांग्रेस से चार बार और वर्तमान में भाजपा से विधायक चेतराम पासी पर भरोसा जताया है। सपा ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष नीतू सिंह के पति उपेंद्र पाल को मैदान में उतारा है।
कांग्रेस से जिला पंचायत सदस्य अनुज कुमारी मैदान में हैं और बसपा से पूर्व जिलाध्यक्ष उदयवीर सिंह हैं। वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा के चेतराम पासी ने यह सीट 74 हजार से अधिक वोटों के अंतर से जीती थी, लेकिन इस बार मुकाबला काफी कड़ा होने का अनुमान है। इस सीट पर भाजपा जहां पुरानी सफलता दोहराने के लिए जितिन प्रसाद की सभाएं करा रही हैं, वहीं इस सीट पर सपा प्रत्याशी को काबिज कराने के लिए जितिन प्रसाद के चचेरे भाई जयेश प्रसाद और उनके भाई जीवेश प्रसाद वोटरों को सपा के पक्ष में लामबंद कर रहे हैं।
कांग्रेस प्रत्याशी अनुज कुमारी को परंपरागत वोटरों के अलावा प्रियंका गांधी के लड़की हूं लड़ सकती हूं के नारे पर जीत का यकीन है तो बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष और प्रत्याशी उदयवीर दलित वोटरों के अलावा सर्व समाज के वोट मिलने की बात कह कर मुकाबले को चतुष्कोणीय बनाने में जुटे हैं।
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कोई गुंडागर्दी खत्म होने से खुश तो कोई छुट्टा पशुओं से परेशान
मतदाताओं का मिजाज जानने के लिए हम सबसे पहले पुवायां के गांव उदना पहुंचे। यहां के बबलू शुक्ला ने कहा सरकार भाजपा की ठीक है, लेकिन किसान छुट्टा पशुओं से परेशान हैं। मियांपुर संवात के गुरप्रीत सिंह ने कहा कि सरकार सपा की बनेगी, क्योंकि किसान का धान बेहद कम रेट में बिका और छुट्टा पशुओं ने दुखी कर रखा है। पुवायां के अरूणोद मिश्रा, बितौनी के सतेंद्र त्रिवेदी ने कहा कि प्रियंका गांधी के मैदान में आने से कांग्रेस की लोकप्रियता बढ़ रही है। कांग्रेस के बिना कोई भी सरकार नहीं बना सकेगा। बनिगवां के रोहित वर्मा ने भाजपा और चंदुआपुर के अमित कुमार ने सपा की हवा बताई।
इसके बाद बंडा क्षेत्र में लोगों से बात की तो गांव धर्मापुर के रमाकांत शुक्ला ने कहा कि प्रदेश से गुुंडागर्दी खत्म हो गई है। इस कारण लोग भाजपा के पक्ष में मतदान करेंगे। गांव बंडी के सुरेंद्रपाल पासी ने कहा कि गरीबों को रायान, आवास आदि अच्छे कामों के कारण भाजपा को जितवाएंगे। गांव गढ़िया के वीरेंद्र यादव ने कहा कि इस बार अखिलेश लोगों के मन में हैं। लहर चल रही है। सपा की सरकार बनेगी। गांव ढुकरी के अमरजीत सिंह ने कहा कि भाजपा की सरकार लौट रही है। गांव देवकली के नितिन अवस्थी ने कहा कि भाजपा का कोई विकल्प नहीं है। खुटार के विमलेश, सुंदरलाल, रामजस, बोले, बसपा गेमचेंजर साबित होगी। कानून व्यवस्था सबसे अच्छी बसपा के शासन में थी।
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आठ बार कांग्रेस के कब्जे में रही है पुवायां सीट
1952 से 1967 तक इस सीट का कुछ हिस्सा पूरनपुर और कुछ हिस्सा पुवायां, निगोही में शामिल होता रहा। इस विधानसभा क्षेत्र में पहला चुनाव 1957 में हुआ था। इस चुनाव में निर्दल प्रत्याशी कामले और राजकुमार सुरेंद्र सिंह जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। 1962 में राजा विक्रम शाह यहां से निर्दल चुनाव जीते। वर्ष 1967 में कांग्रेस के कंधईलाल, 1969 में कांग्रेस के कंधईलाल 1974 में कांग्रेस के रूपराम दिनकर तक यह सीट कांग्रेस के कब्जे में रही। 1977 में सूरज प्रसाद जनता दल से जीते। 1980 में यह सीट फिर कांग्रेस के पक्ष में रही और रूपराम दिनकर चुनाव जीते। 1985, 1989 में कांग्रेस से चेतराम ने जीत दर्ज की। 1991 में राम लहर में इस सीट पहली बार भाजपा का कमल खिला और नेतराम विधायक बने। 1993 में कांग्रेस के चेतराम ने फिर से कांग्रेस को विजय दिलाई और 1996 में भी चेतराम ने कांग्रेस के हाथ को पुवायां में मजबूत बनाए रखा।
2002 में मिथलेश कुमार ने चेतराम और कांग्रेस का तिलस्म तोड़ते हुए निर्दल प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की। 2007 में भी मिथलेश कुमार ही जीते, लेकिन वह सपा से चुनाव लड़े थे। 2009 में हुए उपचुनाव में बसपा ने यहां से पहली बार जीत दर्ज की और धीरेंद्र प्रसाद विधायक चुने गए। 2012 में फिर से सपा से यह सीट जीती और मिथलेश कुमार की पत्नी शकुंतला देवी विधायक बनीं। 2017 में चेतराम भाजपा से चुनाव लड़े और 74 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज की।
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2017 विधानसभा चुनाव का परिणाम
स्थान प्रत्याशी पार्टी वोट वोट(%)
1 चेतराम पासी भाजपा 126635 55.25
2 शकुंतला देवी सपा 54218 23.66
3 गुरबचन लाल बसपा 38797 16.93
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प्रमुख मुद्दे
- छुट्टा पशुओं की समस्या
- युवाओं को रोजगार की व्यव्स्था नहीं
- खुटार पुवायां मार्ग पर भैंसी नदी का पुल
- खुटार में मंडी स्थल, बस स्टैंड की स्थापना
- बंडा में बस स्टैंड की स्थापना
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ब्राह्मण - 60 हजार
पासी- 40 हजार
धोबी- 36 हजार
सिख- 35 हजार
मुस्लिम- 25 हजार
कोरी व कुर्मी- 25 हजार
जाटव-23 हजार
ठाकुर- 20 हजार
वैश्य-20 हजार
मौर्य व पाल-20 हजार
यादव- 17 हजार
( अनुमानित आंकड़े लगभग में )
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