खुटार। लखीमपुर की किशनपुर रेंज से नेपाली हाथियों के मैलानी और खुटार रेंज की ओर आने की जानकारी पाकर किसानों और श्रमिकाें ने रातभर जागकर काटी। पटाखे दागे और शोरशराबा कर फसलों की निगरानी की।
नेपाली हाथी हर वर्ष लखीमपुर की किशनपुर रेंज से मैलानी रेंज होते हुए खीरी की ही महेशपुर रेंज की सहजनिया बीट में डेरा डालते हैं। हाथी नवंबर में आने के बाद दिसंबर के अंत तक सहजनिया क्षेत्र में रुकते हैं। खुटार रेंज मैलानी और महेशपुर रेंज से सटा हुआ है और दोनों रेंज के बीच कठिना नदी निकली हुई है। सहजनिया जाते समय अक्सर नेपाली हाथी खुटार रेंज के जंगलों से खेतों में आकर भारी नुकसान कर देते हैं।
दो दिन से किसानों को नेपाली हाथियों के किशनपुर रेंज से मैलानी और महेशपुर रेंज की ओर बढ़ने की जानकारी मिल रही थी। रात में चार टस्कर हाथी किशनपुर रेंज से मैलानी रेंज होते हुए सहजनिया बीट की ओर चले गए। टस्कर हाथी अब कुछ ठीक होने का संकेत देंगे, तब चार से पांच दिन बाद पीछे चल रहे हाथी भी सहजनिया बीट की ओर निकलेंगे।
अरविंदर सिंह, अतुल सिंह, हरसिमरन सिंह, राजेश कुमार, अनिल कुमार, रामकुमार आदि किसानों और श्रमिकों ने बताया कि चार टस्कर हाथी सहजनिया बीट की ओर गए हैं। हाथियों के फसलों को नुकसान पहुंचाने के डर से रात भर पटाखे चलाकर, ड्रम बजाकर और शोर मचाकर निगरानी की गई है। पीछे से आ रहे हाथियों के कारण निगरानी जारी रहेगी।
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नेपाल हाथी किशनपुर रेंज से होते हुए सहजनिया की ओर गए हैं। खुटार रेंज में हाथियों ने कोई नुकसान नहीं किया है। वनकर्मियों की टीम हाथियों के मूवमेंट पर निगाह रख रही है।
- मनोज श्रीवास्तव, रेंजर खुटार