फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राकिमसं के साथ जुड़े कई किसान संगठन, 11 से तौल बंद कराने का एलान

विज्ञापन
पिछले वर्ष का बकाया भुगतान करने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते किसान संगठनों के कार्यकर्ता - फोटो : POWAYAN
विज्ञापन
बंडा। गत वर्ष के बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन का बजाज चीनी मिल मकसूदापुर गेट पर चल रहा धरना-प्रदर्शन छठे दिन भी जारी रहा। बृहस्पतिवार को धरना स्थल पर भाकियू चढ़ूनी गुट और भाकियू किसान सरकार गुट के कार्यकर्ताओं ने आंदोलन को तेज करने की बात कहते हुए कहा कि 11 दिसंबर को मिल में तौल बंद कराई जाएगी।
विज्ञापन

मकसूदापुर स्थित बजाज चीनी मिल पर किसानों का पिछले वर्ष बेचे गए गन्ने का बकाया भुगतान की मांग को लेकर राकिमसं के कार्यकर्ताओं ने चार दिसंबर से मिल गेट पर प्रदर्शन शुरू कर दिया था। पांच दिसंबर को मिल का मेन गेट बंद कर गन्ने की तौल बंद करा दी गई थी। बाद में मिल प्रबंधन ने दूसरा गेट खोल कर तौल शुरू कराई थी। इसके बाद से प्रदर्शन लगतार जारी है।
भाकियू चढृूनी गुट के जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह गिल, तरविंदर सिंह मोमी और भाकियू किसान सरकार गुट के प्रदेश अध्यक्ष पवन कश्यप ने कहा कि उनके गुट भी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाग रहे हैं और 11 दिसंबर को मिल का पेराई कार्य ठप करा दिया जाएगा। बृहस्पतिवार को धरना स्थल पर तीनों गुटों के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
विज्ञापन

किसानों ने कहा नहीं बंद होनी चाहिए तौल
किसान संगठनों ने 11 दिसंबर से तौल बंद कराने की चेतावनी देते हुए गांवों में एलाउंस कर किसानों ने गन्ना नहीं लाने की अपील की है, वहीं किसानों ने चीनी मिल पर एकत्र होकर प्रदर्शन किया और कहा कि आंदोलन चलता रहे, लेकिन तौल बंद नहीं कराई जानी चाहिए। बंडा क्षेत्र के किसान हरिश्चंद्र तिवारी, सादा सिंह, अजायव सिंह, रामकुमार सिंह, दलजीत सिंह सहित तमाम किसानों ने जिला गन्ना अधिकारी को संबोधित पत्र में कहा है कि क्षेत्र में एलाउंस कर चीनी मिल में तौल बंद कराने की बात कही जा रही है, लेकिन तमाम किसानों को गन्ने का खेत खाली कर गेहूं की बुवाई करनी है। मिल बंद होने से किसान खेत खाली नहीं कर पाएंगे। इससे किसानों को बड़ा नुकसान होगा। मिल बंद कराने के प्रयास का किसान विरोध करेंगे। इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
धरने पर बैठे हरीश कुमार के पुत्र की बीमारी के लिए हरीश कुमार के खाते में करीब 95 हजार रुपये भेज दिए हैं। जिस किसान का गन्ना भुगतान बकाया है और वह अधिकारियों को शादी, बीमारी आदि की समस्या बताता है तो चीनी मिल की ओर से किसान के खाते में उनकी बकाया राशि का कुछ भुगतान जरूर भेजा जाता है।
विज्ञापन

हितेंद्र सिंह, जीएम केन बजाज चीनी मिल मकसूदापुर
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें