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रामगंगा के साहनी घाट पर पुल नहीं बनने से सैकड़ों गांवों के लोग परेशान

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रौर क्षेत्र के ग्राम हैदरपुर सहानी के पास रामगंगा पर बने पैंटून पुल से गुजरते लोग । संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर/परौर। पिलर धंसने से जलालाबाद क्षेत्र में कोलाघाट पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद परौर क्षेत्र में रामगंगा के तट पर स्थित मंझा घाट और साहनी घाट पर पक्के पुल की जरूरत फिर से महसूस होने लगी है। फिलहाल क्षेत्र के लोग साहनी घाट के पैंटून पुल से आवागमन कर रहे हैं, लेकिन कोलाघाट पुल टूटने के बाद पैंटून पुल पर दबाव बढ़ गया है।
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साहनी घाट पर पक्के पुल के निर्माण को दो दशक में जनप्रतिनिधियों के प्रयास फलीभूत नहीं हो सके। साहनी घाट पर पुल बनने से आसपास के करीब 300 गांवों के हजारों ग्रामीणों का आवागमन सुगम हो जाएगा। आजादी के बाद से क्षेत्र के लोग से रामगंगा के मंझा घाट या फिर उससे दो किमी आगे साहनी घाट पर पक्के पुल की मांग करते चले आ रहे हैं। वर्ष 1975 में गांव सरसावा निवासी रूम सिंह विधायक बने तो उन्होंने भी पक्के पुल की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
बाद में कांग्रेस के दिग्गज नेता जितेंद्र प्रसाद उर्फ बाबा साहब और प्रदेश विधानसभा में नेता विरोधी दल रहे सत्यपाल सिंह ने भी पुल के निर्माण की बात सरकार और शासन स्तर पर की, लेकिन नतीजा शून्य रहा। इससे पहले, परौर रियासत के राजा अजय कुमार सिंह समेत क्षेत्रवासी जगदीश चंद्र शुक्ला और जनता पार्टी शासनकाल में सांसद रहे सुरेंद्र विक्रम सिंह ने भी सरकार और शासन स्तर पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर साहनी घाट पर पक्के पुल के लिए अथक प्रयास किए। ये सभी लोग स्वर्ग सिधार गए, लेकिन पुल नहीं बना। कटरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक बने राजेश यादव ने और वर्तमान विधायक वीर विक्रम सिंह भी कटरी क्षेत्र में रामगंगा पर पुल निर्माण को प्रयासशील रहे, लेकिन उनकी कोशिशें भी निरर्थक साबित हुईं।
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पुल बनने से क्षेत्र की जनता को होंगे कई लाभ
रामगंगा के साहनी घाट पर पुल बन जाने से परोर, दहिलिया, कौमी, कादराबाद, हरनोखा, खजूरी, बघेली, कुंडलिया आदि सैकड़ों गांवों के लोग बारिश के सीजन में भी तहसील और जिला मुख्यालय से जुड़े रहेंगे। यही नहीं, पुल बनने से जो लोग दिल्ली, बनारस, शाहजहांपुर, बिहार जाने के लिए करीब 100 किमी का चक्कर काटकर अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं, उनका आना-जाना सीधा हो जाएगा।
नदी पार करके अपने खेतों की रखवाली करने जाने वाले किसानों का आना-जाना भी सुगम हो जाएगा, जबकि अभी उन्हें नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। क्षेत्र के हरिश्चंद्र सिंह, राजीव सिंह चौहान, राकेश गुप्ता, उदयवीर सिंह चंदेल, मोनू सिंह चंदेल आदि ने पक्के पुल की मांग दोहराई है।
हमारी अधिकांश खेती कटरी क्षेत्र में रामगंगा के उस पार है। बरसात में खेती भगवान के भरोसे छोड़नी पड़ती है या फिर खतरे का सामना करते हुए उफनाई रामगंगा नाव से पार करनी पड़ती है।
-धर्मेंद्र सिंह, परौर
साहनी घाट पर पुल की कमी वर्षों से खल रही है। बारिश में नाव से आवागमन करना पड़ता है। ऐसे में रात में फसल की रखवाली के लिए खेत पर रुकने की दशा में जंगली जानवरों का खतरा रहता है।
-मानवेंद्र शुक्ला, परौर
रामगंगा के पार हमारे खेत दबंगों ने जोत रखे हैं क्योंकि पुल नहीं होने से उनकी देखभाल करनी कठिन हो रही है। शिकायत करने पर पुलिस भी जांच कार्रवाई के लिए रामगंगा पार जाने से कतराती है।
-अवधेश कश्यप, नारायणनगर पश्चिमी (परौर)
साहनी घाट पर पुल नहीं होना क्षेत्र के लोगों के लिए कालापानी जैसी सजा से कम नहीं है। अगर स्थायी पुल बना दिया जाए तो जलालाबाद की दूरी 35 किमी से घटकर सिर्फ 22 किमी रह जाएगी।
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-वीरपाल, हरनोखा (परौर)
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