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शीतलहर का प्रकोप बढ़ने से जनजीवन प्रभावित

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शाहजहांपुर में रविवार को सर्दी से बचने के लिए चेहरे पर दुपट्टा बांधकर बाजार जाती महिलाएं। संवाद - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। वातावरण में आर्द्रता की अधिकता के कारण शीतलहर का प्रकोप बढ़ रहा है। हवा की बढ़ी हुई गति सर्दी को बढ़ावा दे रही है। इस कारण रात में न्यूनतम तापमान 2.6 डिग्री घटकर 6.5 डिग्री सेल्सियस के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया। मौसम वैज्ञानिक के अनुसार पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी और ऊंचाई पर छाई धुंध से हवा में बढ़ रही नमी भी सर्दी बढ़ने का अहम कारण है। यही नहीं, सर्दी के असर से सामान्य जनजीवन भी प्रभावित होने लगा है।
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रात से सुबह तक धुंध छाई रहने के कारण गत एक सप्ताह से दिन में तेज धूप से गर्मी महसूस होती रही, लेकिन रातों मेें सर्दी बढ़ रही थी। इसीलिए गत सप्ताह तक दिन में थर्मामीटर का पारा 27 डिग्री के आसपास बना रहा, लेकिन रात में न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट आ रही है। गत नौ दिसंबर तक रात में न्यूनतम तापमान 13 से 14 डिग्री के बीच झूलता रहा, लेकिन अब रात में पारा तेजी से लुढ़क रहा है। बीते दिन न्यूनतम तापमान 3.7 डिग्री की गिरावट आने पर 9.1 डिग्री हो गया। इस कारण शुक्रवार की रात सर्दी के चालू सीजन में सबसे सर्द साबित हुई। शनिवार को दिन भर धुंध छाई रहने से धूप कम निकलने के साथ शीतलहर चली तो रविवार को फिर न्यूनतम तापमान में कमी आ गई।
इसका असर यह हुआ कि दिन में भी सर्दी बढ़ने से अधिकतम तापमान भी एक डिग्री कम होकर 26 डिग्री सेल्सियस हो गया। गनीमत रही कि आज हवा कम चली, लेकिन धुंध की वजह से धूप हल्की निकली तो उसमें गरमाहट गायब रहने से लोगों को दिन में ठिठुरन का बखूबी अहसास हुआ। आमतौर पर रविवार को अवकाश के दिन कामकाजी और नौकरीपेशा तबके के लोग घर-गृहस्थी के सामान की सुबह से खरीदारी को निकल पड़ते हैं, लेकिन सर्दी से बचने को सुबह बहुत कम लोग निकले।
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बाजारों में दोपहर बाद थोड़ी भीड़ बढ़ी, लेकिन अधिकांश लोग गर्म कपड़ों से पूरी तरह लैस होकर बाजारों में निकले। गन्ना शोध परिषद के मौसम विश्लेषक सुरेंद्र सिंह के अनुसार दिन में पारा लुढ़कने से अब सर्दी में उत्तरोत्तर वृद्धि होने के संकेत हैं। उनका कहना है कि शीतलहर चलने के कारण सोमवार को सर्दी का प्रकोप बढ़ने के आसार हैं।
ठंड के साथ बढ़े हड्डी के रोगी
डॉ. वाईपी गौतम ने बताया कि मौसम में ठंड बढ़ने के साथ ही शरीर की मांसपेशियां ऐंठने लगती हैं। इससे शरीर की हड्डियों का पुराना दर्द और गठिया का दर्द होना शुरू हो जाता है। इससे बचने के लिए सबसे पहले सर्दी से बचना है। खट्टी और पथ्य बढ़ाने की चीजों के खानपान से परहेज करें। सर्दी का मौसम आते ही हड्डियों के पुराने दर्द और गठिया के मरीज बढ़ रहे हैं। गठिया के पुराने मरीजों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

शाहजहांपुर में रविवार को सर्दी और ठिठुरन से बचाव को बदन समेत चेहरे को शाल से लपेटकर जाती महिलाएं।- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

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