शाहजहांपुर। जिले के किसान अब परंपरागत खेती की सीमाओं से निकलकर नकदी फसलों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। इन्हीं में ड्रैगन फ्रूट की खेती भी शामिल है। करीब 50 किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं। बेहतर उत्पादन और बाजार में आकर्षक कीमत मिलने से किसानों की आय में वृद्धि हुई है। यहां उत्पादित ड्रैगन फ्रूट अब जिले के अलावा बदायूं, बरेली, हरदोई और आसपास के अन्य जिलों के बाजारों में भी भेजा जा रहा है।
ड्रैगन फ्रूट की खेती की शुरुआत चिलौआ गांव के किसान अंशुल ने प्रयोग के तौर पर की थी। पहले ही सीजन में बेहतर उत्पादन और मुनाफा मिलने के बाद आसपास के किसानों का भी इस ओर रुझान बढ़ा। धीरे-धीरे कई किसानों ने अपनी जमीन के एक हिस्से में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू कर दी।
बाजार में ड्रैगन फ्रूट की मांग लगातार बढ़ रही है। लोग स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते अपनी दिनचर्या में शामिल कर रहे हैं। विटामिन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होने के कारण इसकी अच्छी कीमत मिलती है। किसानों के अनुसार, परंपरागत फसलों की तुलना में इस खेती से अधिक लाभ मिल रहा है और तैयार फल की बिक्री में भी कोई दिक्कत नहीं आती। संवाद
बीटेक करने के बाद वर्ष 2018 में पांच एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती प्रारंभ की थी। वर्ष 2021 से अब तक उनकी नर्सरी से करीब डेढ़ लाख ड्रैगन फ्रूट के पौधे तैयार कर मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड सहित कई राज्यों में भेजे गए हैं।
- अंशुल मिश्रा, चिलौआ, अल्हागंज
दो एकड़ ड्रैगन फ्रूट के साथ ही बंगलुरू वाले अमरूद की खेती प्रारंभ की है। दोनों ही फसलों से काफी ज्यादा लाभ मिलने की उम्मीद है।
-जितेंद्र कुमार, जलालाबाद
30 बीघा खेत में तालाब भी है। इसमें ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं। अन्य फलों के पौधे भी लगा रखे हैं। आने वाले दिनों में ड्रैगन फ्रूट को बड़े पैमाने पर उगाने की तैयारी है, जिससे बेहतर मुनाफा कमाया जा सके।
-प्रमोद कुमार, बिलहरि तिलहर
अंशुल मिश्रा।
अंशुल मिश्रा।
अंशुल मिश्रा।