शाहजहांपुर। जिले में रबी फसलों की बुआई के लिए शासन से मांग के अनुरूप डीएपी की आपूर्ति होने के बावजूद किसानों को आसानी से सुलभ नहीं हो रही है। वह सहकारी समितियों से लेकर खुले बाजार के प्रतिष्ठानों तक भटक रहे हैं, लेकिन उन्हें समितियों पर स्टॉक निल बताकर टरकाया जा रहा है। खुले बाजार में उर्वरक प्रतिष्ठानों पर ज्यादा मूल्य देकर उन्हें खाद के साथ बीज भी दिया जा रहा है। उर्वरक प्रतिष्ठानों पर विक्रेता मनमाने दाम वसूल रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि अधिक कीमत वसूलने पर विक्रेता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी जाएगी।
जनपद में 25 थोक और 1030 फुटकर उर्वरक विक्रेता हैं। इसके अतिरिक्त 120 किसान सहकारी समितियां और इफको के पांच बिक्री केंद्र भी हैं। रबी सीजन में गेहूं, आलू, तिलहन, दलहन आदि फसलों की बुआई में डीएपी की मांग बढ़ने पर समितियों से लेकर खुले बाजार तक उसकी किल्लत हो गई है। समितियों पर आधार कार्ड और खसरा खतौनी देखकर किसानों को 1185 रुपये की एक बोरी दी जा रही है, जबकि फुटकर विक्रेता इफको की डीएपी ऊपर से महंगी मिलने की बात कहकर 1470-1480 रुपये प्रति बोरी बेंच रहे हैं। निजी क्षेत्र की दुकानों पर नियमानुसार खाद बिक्री कराने के लिए कृषि विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, लेकिन वह किसानों के बजाय दुकानदारों के मददगार बने हैं।
इधर, खाद के अधिक दाम वसूलने के बारे में अधिकारियों को कंट्रोल रूम पर किसी किसान से अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली। इसके बावजूद ऐसे विक्रेताओं को कार्रवाई की चेतावनी दी है, जो खाद के अधिक दाम वसूल रहे हैं। जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक के अनुसार जांच में शिकायत की पुष्टि होने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 की धारा 3/7 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और विभाग से जारी बिक्री लाइसेंस भी निरस्त कर दिया जाएगा।
जैतीपुर की समितियों में खत्म हुई डीएपी
जैतीपुर। विभिन्न गांवों में आठ किसान सहकारी समितियां हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति मेें किसी भी समिति के गोदाम पर डीएपी उपलब्ध नहीं होने से किसानों को बाजार से दो-तीन सौ रुपये महंगी बोरी खरीदनी पड़ रही है। क्षेत्र की किशुरिहाई समिति पर दो दिन पहले आई 400 बोरी डीएपी का स्टॉक बिक चुका है। 15000 की आबादी वाले गढ़िया रंगीन के किसानों के लिए वहां की समिति पर डीएपी की केवल 60 बोरियां भेजी गईं जो कुछ घंटे के अंदर बिक गईं। निजी क्षेत्र के कुछ दुकानदार इफको की डीएपी महंगी बताकर 1470 रुपये में बिक्री कर रहे हैं और किसानों को संतुष्ट करने के लिए उन्हें ली गई धनराशि की रसीद भी दे रहे हैं, लेकिन वहां कृषि विभाग का कोई कर्मचारी नजर नहीं आ रहा है।
मशीन खराब होने पर जारी रहेगी बिक्री
जिला कृषि अधिकारी ने सभी फुटकर उर्वरक विक्रेताओं और समितियों के सचिवों को उर्वरक वितरण के समय पीओएस (प्वॉइंट ऑफ सेल) मशीन खराब होने पर भी खाद की बिक्री जारी रखने के निर्देश दिए हैं। कहा कि पीओएस में कोई तकनीकी समस्या आने पर उर्वरक वितरण रोका नहीं जाएगा। ऐसी स्थिति में किसानों का मूल आधार कार्ड जमा कराकर उसका नाम, पता, मोबाइल नंबर आदि बिक्री रजिस्टर में दर्ज कर लिया जाएगा।