पुवायां। पुवायां इंटर कॉलेज के मैदान में शनिवार रात ‘जब शहर हमारा सोता है’ नाटक का मंचन किया गया। इस नाटक के जरिये कलाकारों ने हिंदू मुस्लिम एकता के साथ ही जैसी करनी, वैसी भरनी का संदेश देने की कोशिश की।
शिवा सक्सेना के निर्देशन में पीयूष मिश्रा लिखित नाटक ‘जब शहर हमारा सोता है’ में हिंदू मुस्लिम युवाओं के गुट मोहल्लों में वर्चस्व के लिए तमाम षडयंत्र रचते हैं। अंत में दोनों पक्षों को अपनी गलती का एहसास होता है। कहानी में प्रेम प्रसंग का भी एक पक्ष है। नाटक के अंत में दिखाया गया कि हम जो करेंगे, उसका फल भी भुगतना ही पड़ेगा। नाटक संदेश दे गया कि कोई भी किसी के साथ गलत व्यवहार न करे।
नाटक में तराना की भूमिका में रीना राठौर, तबस्सुम की भूमिका में शीतल मिश्रा, ऐवई की भूमिका में सृष्टि, मदमस्त की भूमिका में पारस दीक्षित, आभास की भूमिका में अमित हरिश्चंद्र, असलम की भूमिका में नदीम अख्तर, विलास की भूमिका में ऋषभ कुमार, अकील की भूमिका में गौरव भारती, चचा की भूमिका में सागर श्रीवास्तव, इंस्पेक्टर त्यागी की भूमिका में मोहित कनौजिया, चीटा की भूमिका में अभिशांत पाठक, अंटा की भूमिका में दुर्गेश कुमार, सूजा की भूमिका में अमन राजवंशी, फैसल की भूमिका में फरहान खान, पीपा की भूमिका में मृत्युंजय राज, चोखा की भूमिका में सूरजपाल, वशीरा की भूमिका में सूरज कुमार, घुन्ना की भूमिका में शंकरलाल, बबुआ की भूमिका में यश त्रिपाठी, मुस्तफा की भूमिका में दानिश अली, धानू की भूमिका में फैजान खान, अजमस्त की भूमिका में विकास भारती, इब्राहिम की भूमिका में अनमोल को काफी सराहना मिली। मंच के पीछे सोनू और अमन कृष्ण राठौर का भी योगदान रहा।