शाहजहांपुर। गंगा और रामगंगा समेत सभी नदियों का जलस्तर कम होने लगा है। मगर तटवर्ती इलाकों के लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। जलालाबाद, परौर, जैतीपुर, मिर्जापुर आदि इलाकों के गांवों में बाढ़ का पानी भरा होने से ग्रामीण सड़कों पर दिन गुजार रहे हैं। इधर, शहर में गर्रा-खन्नौत का पानी अभी शहर के मोहल्ला सुभाषनगर, लोधीपुर, ककरा कलां, दलेलगंज आदि क्षेत्रों जलभराव है।
मंगलवार सुबह बाढ़ नियंत्रण कक्ष के अनुसार नरौरा बैराज से गंगा में अतिरिक्त पानी की मात्रा करीब 21 हजार क्यूसेक घटने के बाद 75113 क्यूसेक रह गई है। अन्य बैराजों से रामगंगा में और ड्यूनी डाम से गर्रा में निकल रहा पानी भी कम हो गया है। इस कारण सोमवार की तुलना में गंगा का जलस्तर 56 सेमी, रामगंगा का 88 सेमी और गर्रा का जलस्तर 75 सेमी कम हो गया है। खन्नौत भी 20 सेमी घट गई है। मगर इन सभी नदियों के आसपास रहने वालों को बाढ़ से निजात नहीं मिल सकी है। शहर में लोधीपुर से लेकर बिसरात तक के तमाम मकान बाढ़ से घिरे हैं। मगही टोला में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट भी जलमग्न है। उधर, गर्रा की चपेट में आए सुभाषनगर के बाशिंदों की बाए़ से जुड़ी दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं।
गंगा-रामगंगा के जलस्तर में गिरावट आने से मिर्जापुर कस्बे में थाने के निकट मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे से बाढ़ का पानी मंगलवार सुबह से निकलना बंद हो गया, लेकिन इसी हाईवे पर गांव जरीनपुर से पहरुआ और मौजमपुर को जाने वाला संपर्क मार्ग अभी जलमग्न है। सिंगहा युसुफपुर, मझारा, बढ़ऊ, कालिकागंज, चपरा आदि गांवों के संपर्क मार्ग रामगंगा की बाढ़ से जलमग्न हैं। रामगंगा से घिरे बीघापुर सिठौली, अतरी, नवादा, मौजमपुर, पहरुआ, कुनिया, चिकटिया, भरतापुर और गंगा किनारे बसे इस्लाम नगर, आजाद नगर, मस्जिद नगला, कमथरी, चितार आदि गांव अभी बाढ़ से घिरे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नदियों में भले ही पानी घट गया हो, बाढ़ का पानी अभी भी गांवों, खेत खलिहानों और रास्तों पर भरा है और उसे निकलने में समय लगेगा। किसान प्रेमशंकर पांडेय के अनुसार खरीफ की फसलें नष्ट होने के बाद रबी फसलों की बुवाई में भी देर होगी।
बाढ़ में बह गया जैतीपुर-दातागंज मार्ग
जैतीपुर। रामगंगा में आई बाढ़ में दातागंज मार्ग ध्वस्त हो गया। बाढ़ के कारण नगरिया खुर्द और मानपुर त्रिलोक गांव के बीच बनी पुलिया का एक बड़ा हिस्सा पानी के साथ बह गया। बदायूं जाने वालों को अब 17 के बजाय 70 किमी दूरी तय करनी पड़ रही है। अभी तक तिलहर या कटरा से जैतीपुर खेड़ा बझेड़ा नवादा मोड़ होते हुए कम दूरी का सफर तय करके यात्री दातागंज आसानी से पहुंचते रहे, लेकिन अब उन्हें बरेली होकर जाना पड़ रहा है। नगरिया खुर्द गांव की करीब 700 बीघा जमीन सड़क के दूसरी तरफ रह गई। किसान या तो तैरकर अपने खेतों की ओर जाएं, या फिर बरेली से घूमकर खेतों तक पहुंचना का विकल्प रह गया है। संवाद
निगोही क्षेत्र में कठिना नदी कर रही कटान
निगोही। कठिना नदी में आई बाढ़ से गांव भर्री बसंतपुर में हो रहे भूमि कटान से ग्रामीण खासे परेशान हें। उन्होंने ब्लॉक कार्यालय में प्रदर्शन कर खंड विकास अधिकारी को ज्ञापन दिया और गांव की आबादी समेत उपजाऊ जमीन को कटान से बचाने के लिए तटबंध का निर्माण कराने की मांग की है। नदी कटान करते हुए गांव के किनारे पहुंच चुकी है। प्रदर्शन करने वालों मेें सुखपाल, रामबिलास, श्यामलाल, मथुरा प्रसाद, पप्पू पाल, राजकुमार, विजय पाल आदि ग्रामीण शामिल रहे। संवाद
सड़कों पर रह रहे बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिली सहायता
शाहजहांपुर। गंगा-रामगंगा में पानी घटने के बावजूद जलालाबाद इलाके के तमाम गांव बाढ़ से घिरे हैं। ग्रामीण अपने घर छोड़कर महिलाओं व बच्चों समेत सड़क किनारे रहने को मजबूर हैं। उनके पास अभी तक कोई सरकारी सहायता नहीं पहुंची है। विभिन्न तरह की समस्याओं व अभावों में गुजर बसर कर रहे पीड़ितों को अब भविष्य की चिंता खाये जा रही है। जलालाबाद में अल्लागंज से लेकर गढ़िया रंगीन इलाके तक क्षेत्र का करीब दो तिहाई हिस्सा बाढ़ से जलमग्न है। कोला रोड किनारे चारदिनों से रह रहे प्रीतम, राजाराम, निर्भान, राजेश्वरी आदि ने बताया कि प्रशासन ने न तो खाने के लिए भोजन और न ही सिर छिपाने के लिए पन्नी आदि की व्यवस्था की है। तहसीलदार चमनलाल ने बताया कि पानी कम होने लगा है और तमाम लोग घरों को वापस हो रहे हैं, लेकिन अभी तक उनके पास खाने पीने के सामान की कमी या अन्य तरह की दिक्कत की कोई शिकायत नही आई है। हालांकि, इस बीच विद्या फाउंडेशन के अध्यक्ष विनय शर्मा अपनी टीम के साथ बाढ़पीड़ितों की सेवा में दिन रात जुटे हुए है। उनके फाउंडेशन की तरफ से गांव कोला के अलावा कोलाघाट पुल के पास भोजन पैकेट वितरण के साथ स्वास्थ्य कैम्प लगाया गया। इसमें विद्या कालेज ऑफ नर्सिंग बरेली के डॉ. अजय पाल सिंह व डॉ. अवनीश कुमार अपनी टीम के साथ बीते दो दिनों से लगातार पीड़ितों के स्वास्थ्य की जांच कर निशुल्क दवाइयां दे रहे हैं। भाजपा नेता मनोज सिंह ने कोला रोड तथा अल्लागंज क्षेत्र में दहेना मनिहार में पीड़ित परिवारों को भोजन के पैकेट बांटे। संवाद
30 फीसदी नुकसान होने पर मिल सकेगा मुआवजा
शाहजहांपुर। भारी वर्षा और बाढ़ से जिन किसानों की खरीफ की फसलें खराब हुई हैं, उनमें से बहुतों को मुआवजा की धनराशि प्राप्त करने में शासन के कई नियम आड़े आ सकते हैं। अधिकरियों के अनुसार बाढ़ और अतिवृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदा में केवल उन्हीं गैर बीमित किसानों को निर्धारित मुआवजा धनराशि मिल सकेगी, जिनके खेतों में 30 फीसदी या इससे अधिक फसलें खराब पाई जाएंगी। फसली क्षति का आकलन करने के लिए जुटाई गई टीमों को कई स्थानों पर बाढ़ और जलभराव के कारण सर्वे रोकना पड़ा है। संवाद
दातागंज मार्ग मगनपुर गांव के पास ध्वस्त हो गया। उसके आगे मेरा पेट्रोल पंप है, लेकिन अब वहां तक पहुंचना कठिन हो गया है। सड़क बह जाने पर आवागमन की कठिनाई को देखते पंप बंद कर दिया है । - अरुण कुमार मिश्रा, खेड़ा बझेड़ा (जैतीपुर)
पुलिया व सड़क बाढ़ में बह जाने से रास्ता बंद हो गया है। मेरे गांव की करीब 12 सौ बीघा जमीन दूसरी तरफ है, जिसमें 100 बीघा मेरी जमीन है। जो लोग तैर लेते है वह ट्यूब के सहारे पार हो रहे हैं। - संतोष कुमार सिंह, मानपुर त्रिलोक (जैतीपुर)
मेरी दो एकड़ जमीन सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से के दूसरी तरफ है, लेकिन उधर जाने के सारे रास्ते बंद हो गए हैं। दातागंज महज 15 किमी दूर है, लेकिन अब 70 किमी से ज्यादा चलना पड़ेगा। - परिमाल सिंह, नगरिया खुर्द (जैतीपुर)
मेरा दो एकड़ खेत क्षतिग्रस्त सड़क के आगे है। गांव के अन्य किसानों के भी उधर खेत हैं। दातागंज की तरफ रिश्तेदारी में भी आना-जाना अब आसान नहीं रहा। सड़क का निर्माण जल्द कराया जाए। - विनीत यादव, नगरिया खुर्द (जैतीपुर)