शाहजहांपुर। चार दिन पहले हुई भारी वर्षा और तेज हवा से खरीफ की मुख्य फसल धान समेत बाजरा, तिल आदि को भारी क्षति पहुंची है। जो फसलें सुरक्षित बची रह गईं, उन्हें अब नदियों में आई बाढ़ निगल रही है। परौर क्षेत्र में रामगंगा और जैतीपुर क्षेत्र के कई गांवों में बहगुल नदी उफनाने से तटवर्ती खेतों में बोई गईं फसलें बाढ़ के पानी में डूब गई हैं। परौर क्षेत्र के नारायणनगर पश्चिमी गांव में रामगंगा के तटीय खेतों की फसलें बाढ़ में डूबने से उनके नष्ट हाने की आशंका बढ़ गई है।
मिर्जापुर क्षेत्र में गंगा और रामगंगा पूरे उफान पर हैं। दायरे से बाहर आई रामगंगा की बाढ़ से ग्राम पंचायत बीघापुर सिठौली के मजरा बीघापुर और गंगा की तटीय ग्राम पंचायत पैलानी उत्तर के मजरा आजादनगर और वहां के खेत चौतरफा पानी से घिर गए हैं। जलालाबाद-ढाईघाट मार्ग पर चौंरा गांव के निकट और चौंरा से इस्लामनगर व कमथरी जाने वाला संपर्क मार्ग जलमग्न हो गया है। जरूरतमंद ग्रामीण जलमग्न रोड से ही आ जा रहे हैं, लेकिन किसानों का अपने खेतों तक पहुंचना कठिन हो गया है।
जैतीपुर। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि लगातार 14 घंटे हुई बारिश ने उनकी कमर तोड़कर रख दी है, क्योंकि फसलों को जिस तरह हानि हुई है, उसकी तुलना में सरकार से मुआवजा नहीं मिला तो फसलों पर आई लागत की भरपाई करने में दो-तीन साल लग जाएंगे। भारी वर्षा से ग्रामीण क्षेत्र में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। किसानों की फसलें डूबीं तो अन्य तमाम लोगों के कच्चे मकान गिर गए। उम्रदराज किसानों के अनुसार उनके जीवन में दूसरी बार ऐसी बारिश हुई है क्योंकि करीब 42 साल पहले भीषण बारिश होने से गांवों के अधिकांश कच्चे मकान गिरने के साथ फसलों को काफी नुकसान हुआ था।
करीब 40 वर्ष पूर्व ऐसी बारिश हुई थी जिसमें अधिकांश किसानों की फसलें बरबाद होने के साथ सैकड़ों कच्चे मकान गिर गए थे। अब सड़क और चकरोड बनने के बावजूद बारिश ने फिर तबाही मचाई है। किसानों को तत्काल मुआवजा की जरूरत है।
- अजय पाल शर्मा, बझेड़ा भगवानपुर (जैतीपुर)
बीते कई दशक से ऐसा पानी कभी नहीं बरसा, जैसा इस बार गिरा।किसानों की फसल तैयार खड़ी थी, लेकिन बारिश ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया।मेरी याददाश्त में केवल बचपन में एक बार ऐसी भयंकर बारिश हुई थी।
-राम शंकर मौर्य, बझेड़ा भगवानपुर (जैतीपुर)
पहले बाढ़ और उसके बाद भारी बारिश में खरीफ की फसलें तो पहले ही नष्ट हो चुकी है। अब दोबारा आई बाढ़ में खोने के लिए सिर्फ परिवार ही बचा है। अगर इसी तरह गंगा में उफान बढ़ता रहा तो फसलों की कौन कहे, जान बचाना मुश्किल हो जायेगा।
-आलम अली, इस्लामनगर (मिर्जापुर)
लेखपाल गांव से सुरक्षित स्थान पर चले जाने और गंगा के किनारे पशु व बच्चों को नहीं जाने देने ही हिदायत दे गए हैं, लेकिन यह किसी ने नहीं बताया कि ग्रामीण अपने घर छोड़कर आश्रय लेने कहां जाएं। फसली मुआवजा जल्द दिया जाए क्योंकि बाढ़ उतरते ही रबी फसलों की बुआई करनी है।
- जरीफ अली, आजादनगर (मिर्जापुर)