शहीद सारज सिंह के दसवां कार्यक्रम में अंतिम अरदास करती संगत
- फोटो : POWAYAN
पुवायां। शहीद सारज सिंह के दसवां संस्कार में बुधवार को संगत ने श्रद्धांजलि अर्पित की। संगत ने शहादत को याद करते हुए गुरुग्रंथ साहिब को मत्था टेककर शहीद को गुरु महाराज अपने चरणों में निवास दे की अरदास की।
गौरतलब है कि 11 अक्तूबर को कश्मीर में पुंछ के पास सूरनकोट के चामरेर फॉरेस्ट एरिया में सेना के आतंक विरोधी सर्च ऑपरेशन के दौरान सेना के जवानों की आतंकवादियों से मुठभेड़ हो गई थी। यहां घुसपैठ कर आए आतंकवादी भारी हथियारों से लैस थे। इस एनकाउंटर के दौरान बंडा के गांव अखत्यारपुर धौकल निवासी सारज सिंह के साथ तीन जवान और एक जेसीओ शहीद हो गए थे। 13 अक्तूबर को शहीद सारज सिंह का पार्थिव शरीर शाहजहांपुर लाया गया था। उनका राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था। सारज सिंह के चौथे की रस्म के बाद 18 अक्तूबर से घर पर अखंड पाठ का आयोजन शुरू हुआ था।
बुधवार को शहीद के घर अखंड पाठ साहिब के भोग के बाद अंतिम अरदास की गई। इसके बाद गांव बरीबरा के गुरुद्वारा परमेश्वर द्वारा में कीर्तन दरबार सजाया गया। दूर दराज से आई संगत ने शहीद के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। संगत ने गुरुद्वारे में मत्था टेककर शहीद के परिवार के लिए प्रार्थना की। कीर्तन जत्था गुरदेव सिंह गुरदासपुरिया ने कहा - सूरा सो पहचानिए जो लड़े दीन के हेत, पुर्जा पुर्जा कट मरे कबहूं न छाड़े खेत।
उन्होंने कहा कि शहीद सारज सिंह ने देश की सरहद पर जूझते हुए शहीदी दी। ऐसे वीर की शहादत को जब तक धरती पर सूरज रहेगा तब तक याद रखा जाएगा। गुरुद्वारा के ग्रंथी बाबा मंगल सिंह टक्साली ने आंनद साहिब पाठ के बाद अंतिम अरदास की। इसके बाद संगत ने प्रसाद ग्रहण करने के बाद लंगर छका। एससीएसटी आयोग की पूर्व सदस्य शारदा राज ने भी गुरुद्वारा पहुंचकर शहीद को श्रद्घांजली अर्पित की।