फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिंदी को राष्ट्रीय भाषा के रूप में स्वीकार्यता मिले, तभी बनेगी वैश्विक भाषा

विज्ञापन
विज्ञापन
शाहजहांपुर। किसी भी राष्ट्र के सम्मान एवं स्वाभिमान के प्रतीक रूप में वहां के निवासियों की मातृ भाषा और राष्ट्र भाषा है। हिंदी, हिंदू, हिंदुस्तान का नारा अमर शहीदों के द्वारा दिया गया। हिंदी का साहित्य सरल व सहज रूप में ग्राह्य है। हिंदी को राष्ट्रीय भाषा के रूप में स्वीकार्यता मिलने से ही यह वैश्विक भाषा बनेगी। यह शिक्षकों का मानना है।
विज्ञापन

हिंदी भाषा राष्ट्रीय प्रगति का आधार है, राष्ट्रीय स्वाभिमान का मूल है। हिंदुस्तान और हिंदी का घनिष्ठ संबंध है। हिंदी भाषा को प्राथमिकता देना समय की मांग है। हमारे वार्तालाप का माध्यम हिंदी होना चाहिए तथा कार्यालय में भी इसको प्रमुखता प्रदान की जानी चाहिए। हिंदी मात्र भाषा नहीं है, भारत की एकता को अभिवृद्ध करने वाली अपनेपन के भाव को जगाने वाली समृद्ध भाषा है। हिंदी भाषा का प्रयोग प्रगति के नवीन आयामों की प्राप्ति में सहायक तत्व है।
- डॉ. कनक रानी, प्राचार्या, आर्य महिला डिग्री कॉलेज, शाहजहांपुर।
भारत की आजादी 75वीं वर्षगांठ हम मनाने जा रहे हैं, लेकिन हिंदी को अभी तक राष्ट्र भाषा के रूप स्वीकार्यता प्राप्त नहीं हो सकी है। जबकि अन्य भाषाओं की तुलना में इसके व्याकरण काफी श्रेष्ठाएं हैं, जैसे एक शब्द के कई समानार्थक शब्द हैं, जोकि अन्य भाषाओं में नहीं होते। राष्ट्रीय नई शिक्षा नीति 2021 में हिंदी को उसके वास्तविक स्वरूप को पहचान दिलाने के किए, सभी पाठ्यक्रमों में समुचित समावेश कर हमारी केंद्र सरकार द्वारा अनूठी पहल की गई है।
विज्ञापन

- ज्ञानेश वाजपेयी, प्रधानाचार्य, राजकीय उमा विद्यालय, सादिकपुर, मिर्जापुर।
हिंदी को वैश्विक स्तर पर प्रत्येक क्षेत्र में ख्याति प्राप्त करने के लिए मीडिया व वेब पर हिंदी में अंग्रेजी के स्तर की ज्ञान-विज्ञान, विधि, तकनीकी से संबंधित विषयों पर उच्च स्तरीय सामग्री उपलब्ध कराने में तेजी लाई जानी चाहिए। हिंदी को वैश्वीकरण प्राप्त करने में वैश्विक संगठनों में भारत सरकार के प्रतिनिधियों को और अधिक कार्य करने की आवश्यकता है। भारतीय विश्व में जहां भी हैं और जिस भी क्षेत्र में कार्यरत है वहां ईमानदारी से हिंदी और देश के विकास में हाथ बटाएं।
- दीपा पूनिया, सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय तेरा, सिंधौली।
वैसे नई शिक्षा नीति में मातृभाषा और हिंदी को वैश्विक रूप प्रदान करने के लिए पूरी कोशिश की गई है, यदि नई शिक्षा नीति पर वास्तविकता में शत-प्रतिशत अमल हो जाए तो भी हिंदी भाषा अपने वैश्विक रूप में आ सकती है। क्योंकि भारत की जनसंख्या देश में दूसरे नंबर पर है, लेकिन नई शिक्षा नीति कितनी अमल में आएगी यह भविष्य के गर्भ की बात है। नई शिक्षा नीति में जो बैग वोकेशनल कोर्सोें को हिंदी में करने का जो निर्णय लिया गया है। वह बहुत अच्छा है।
विज्ञापन

- कमलेश कुमार, शिक्षक, रॉयन इंटरनेशल स्कूल, शाहजहांपुर।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें