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वंडिया खुर्द में कागजों में ही बन गया बरातघर

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अधूरा पड़ा बरात घर। संवाद। - फोटो : SHAHJAHANPUR
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जैतीपुर (शाहजहांपुर)। जिस बरातघर का वंडिया खुर्द गांव के लोग बरसों से इंतजार कर रहे थे, वह मूर्त रूप तो नहीं ले सका पर कागजों में जरूर बन गया।
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इस बात की गांव वालों को तब जानकारी हुई जब पिछले दिनों ब्लॉक मुख्यालय पर हुए एक सरकारी कार्यक्रम में प्रशासन की ओर से इस ब्लॉक में हुए विकास कार्यों का ब्योरा देने वाली एक पुस्तिका बांटी गई। इस पुस्तिका में सांसद निधि से कराए गए विकास कार्यों का विवरण भी प्रकाशित है। जिससे तहत 14.46 लाख की लागत से बरातघर निर्माण की जानकारी दी गई है।
अन्य कई गांवों की तरह वंडिया खुर्द में भी बरात आने पर उसे ठहराने के लिए कोई स्थायी और उपयुक्त स्थान नहीं है। कभी-कभार बरातें गांव के प्राथमिक स्कूल परिसर में जरूर ठहराई जाती हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। वहीं काफी संख्या में ग्रामीण गांव के बाहर बागों में बरात ठहराते हैं, लेकिन इसमें ग्रामीणों को हजारों रुपये टेंट-शामियाने पर खर्च करने पड़ते हैं। बारिश होने पर मांगलिक कार्य में व्यवधान भी पैदा होता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2017-18 में तत्कालीन केंद्रीय राज्यमंत्री और जिले की सांसद कृष्णा राज ने अपने कार्यकाल में वंडिया खुर्द के ग्राम पंचायत अध्यक्ष (निवर्तमान ग्राम प्रधान) से बरात घर बनवाने के लिए प्रस्ताव मांगा था।
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ग्राम प्रधान ने उन्हें गांव के उत्तर पूर्व दिशा में ग्राम समाज की खाली पड़ी जगह में बरात घर बनवाने के लिए प्रस्ताव भेजा, जिस पर तत्कालीन सांसद ने सांसद निधि से 14.46 लाख रुपये का बजट स्वीकृत कर दिया। जिसके बाद बरात घर के निर्माण के लिए एक ठेकेदार नियुक्त किया गया। गांव में आवंटित जगह पर ठेकेदार ने एक इंडिया मार्का हैंड पंप लगवा दिया और बरात घर बनने के लिए पाड़ के तौर पर प्रयोग में आने वाले कुछ पाइप मौके पर भेज दिए। इससे गांववालों को लगा कि अब बरात घर जल्द बनकर तैयार हो जाएगा, लेकिन 2019 के बाद बरात घर का निर्माण ठप हो गया।
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विकास पुस्तिका ने खोली कागजी बरात घर की पोल
पिछले दिनों ब्लॉक मुख्यालय पर हुए एक सरकारी कार्यक्रम में प्रशासन की ओर से जनपद के इस ब्लॉक में हुए विकास कार्यों का ब्योरा देने वाली एक पुस्तिका बांटी। इस पुस्तिका में सांसद निधि से कराए गए विकास कार्यों का विवरण भी था। इसमें गांव के लोगों ने अपने गांव में कथित रूप से निर्मित किए गए बरात घर का विवरण भी प्रकाशित देखा तो वह अवाक रह गए। ग्रामीणों ने अधिकारियों से शिकायत की तो मामला ठेकेदार तक पहुंचा। ऐसे में मार्च में ठेकेदार ने रेत-मोरंग से खानापूर्ति के लिए बरात घर की नींव भरवा दी, लेकिन तब से गांव की ओर पलट कर नहीं देखा। ऐसे में अब निर्माण कार्य के लिए मंगाए गए लोहे के पाइप भी अब जंक खा रहे हैं।
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सरकारी विकास पुस्तिका से पता चला कि बरात घर बन गया लेकिन अधिकारी जांच कर सच्चाई पता कर सकते हैं। कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ।
-अरविंद मौर्य, प्रधान पति, वंडिया खुर्द
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तीन साल बीतने पर भी बरात घर का निर्माण शुरू नहीं हो सका है। मौके पर केवल इंडिया मार्क हैंडपंप लगाकर छोड़ दिया गया है, जो अब खराब हो चुका है। अधिकारी इस ओर ध्यान दें।
-मुन्ना लाल
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दो बार ठेकेदार के मजदूर बरात घर बनाने के लिए लाए गए लोहे के पाइप उठाने आए तो हम लोगों ने नहीं ले जाने दिए। अब पाइप यहां जंक खाकर खराब हो रहे हैं। बरात घर नहीं बनने से मायूस हैं।
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-हरिपाल सिंह
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ग्रामीणों के स्तर से यह तथ्य संज्ञान में लाया गया है कि तीन वर्ष पूर्व सांसद निधि से स्वीकृत बरात घर का अब तक निर्माण नहीं हो सका है। इस मामले मेें संबंधित कार्यदायी संस्था के अधिकारियों और ठेकेदार से वार्ता कर निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा।
-डॉ. विजय प्रताप यादव, खंड विकास अधिकारी, जैतीपुर
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