शाहजहांपुर। पहाड़ों और मैदानी क्षेत्रों में हो रही बारिश के कारण उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी के बैराजों से पानी की निकासी बढ़ने के साथ ही रामगंगा बीते 24 घंटे की तुलना में 60 सेमी बढ़ गई। इससे जैतीपुर और जलालाबाद के तटवर्ती गांवों से लेकर परौर क्षेत्र तक भूमि कटान कुछ धीमा पड़ा, लेकिन बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
उधर, कलान क्षेत्र के भैंसार बांध पर गंगा में उफान रविवार को आठवें दिन भी जारी रहा। बीते 24 घंटे में गंगा 9 सेमी बढ़ने से उसका जलस्तर 143.44 मीटर हो गया है।
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जलालाबाद-ढाईघाट मार्ग पर पहुंचा गंगा का पानी
मिर्जापुर ब्लॉक क्षेत्र में गांव आजाद नगर बाढ़ से घिरने लगा है। घरों में पानी घुसने से रोकने के लिए ग्रामीण घरों के आगे मिट्टी के बांध बना रहे हैं। कमथरी मार्ग की पुलिया से बाढ़ का पानी उतरकर पड़ोसी गांव इस्लामनगर के दक्षिणी भाग में पहुंच रहा है। फर्रुखाबाद के सीमावर्ती तटीय गांव कमथरी और चितार भी गंगा से घिर गए हैं। यही नहीं, जलालाबाद-ढाईघाट मार्ग ग्राम चौंरा के निकट जलमग्न हो गया है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष को मिली सूचना के अनुसार आज सुबह नरौरा बैराज से गंगा में एक लाख 42 हजार 352 क्यूसेक पानी रिलीज हुआ है। इसलिए देर रात से सोमवार सुबह तक गंगा में पानी और बढ़ सकता है। -
रामगंगा से कटान रोकने में नहीं मिली कामयाबी
परौर। रामगंगा नदी ने जिओ ट्यूब की ठोकरों के पास कटान करके उनके आसपास गहरे गड्ढे बना दिए हैं। ईंटों का रोड़ा और बालू से भरी बोरियां लगाकर सिंचाई विभाग कटान रोकने का प्रयास कर रहा है। पहले से लगाई गईं कई जिओ ट्यूब तिरछी हो गईं हैं। ग्रामीणों का मानना है कि पानी बढ़ना जारी रहा तो जिओ ट्यूब नदी में समा जाएंगे और मोहनपुर, बिचपुरी, नारायणनगर पश्चिमी गांव समेत कस्बे के बाजार मोहल्ले तक पानी पहुंचेगा।
जलस्तर में कमी होने पर कटान की आशंका बढ़ जाएगी। रविवार दोपहर एडीएम फाइनेंस ने कटान वाले ठिकानों का निरीक्षण किया। एक्सईएन (सिंचाई) सुनील भास्कर ने जेई को नारायणनगर पश्चिमी, मोहनपुर, दहिलिया और अमृतापुर गांव को कटान से बचाने के लिए बोरियों में ईंट के टुकड़े भरकर डालने के निर्देश दिए। क्षेत्र के रणधीर सिंह, महेश सिंह, अजीत सिंह, रक्षपाल यादव, बृजेश कुशवाहा, सत्यपाल, रघुनाथ कुशवाहा, हरिओम, संजीव कुमार, धनपाल सिंह आदि ने कटान रोकने के उपाय की जरूरत बताई है। संवाद
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बाजरा की कच्ची फसल काट रहे किसान
जैतीपुर। रामगंगा में पानी बढ़ने के बावजूद गांव केसीनगला मेें भूमि कटान बराबर हो रहा है। लगभग 25 एकड़ उपजाऊ जमीन कटकर नदी में समा चुकी है। पानी बढ़ने से नदी जिन खेतों की ओर बढ़ रही है, वहां की जमीनें भी कटने लगी हैं। बाढ़ की आशंका के मद्देनजर किसानों ने बाजरा की कच्ची फसल काटनी शुरू कर दी है ताकि उसे चारे के तौर पर उपयोग में लाया जा सके। दो दिन पहले एसडीएम तिलहर सुरेंद्र सिंह के निर्देश पर केेसीनगला पहुंची राजस्व विभाग की टीम ने पहले कट चुकी जमीनों का सर्वे किया। बीते दिन से हो रहे कटान से परेशान अन्य किसानों की अब तक सुध लेने कोई अधिकारी अथवा कर्मचारी गांव नहीं पहुंचा। संवाद
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बारिश बढ़ाएगी नदियों का जलस्तर
रविवार को सुबह से बादल छाए होने के बावजूद दोपहर बाद तक बारिश नहीं हुई। दिन में चली तेज हवा से बादल छितराए तो धूप से उमस भरी गर्मी सताने लगी। शाम करीब पांच बजे के बाद काली घटाओं ने आसमान घेर लिया और इसी के साथ बारिश होने लगे। करीब आधा घंटे तक हुई दस मिमी बारिश से उमस खत्म हो गई और दिन में अधिकतम तापमान 1.5 डिग्री घटकर 32.5 डिग्री सेल्सियस हो गया। गन्ना शोध परिषद के मौसम वैज्ञानिक डॉ. मनमोहन सिंह के अनुसार रात में बादल छाए रहने से न्यूनतम तापमान 0.4 डिग्री बढ़कर 26.7 डिग्री सेल्सियस हो गया, लेकिन हवा में नमी की अधिकता से सुबह तक उमस का आभास नहीं हुआ। सोमवार सुबह से बादल छाए रहेंगे और शाम तक रुक-रुककर बारिश होगी। इधर, सिंचाई विभाग के तार बाबू गिरिजा किशोर मिश्र ने बताया कि बीते दिन की तुलना में आज गर्रा दस सेमी घटकर 144.65 मीटर और खन्नौत 15 सेमी कम होकर 142.70 मीटर पर आ गई है। संवाद