शाहजहांपुर। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद ब्लड बैंक में लगने वाले रक्तदान शिविर में रक्तदान करने वालों की कमी देखने को मिली है। इससे ब्लड बैंकों में रक्त की कमी होने से मरीज के तीमारदारों को सरकारी ब्लड बैंक से ब्लड मिल पाना मुश्किल हो जाता है। रक्तदान करने वालों में कमी इसलिए भी आई है, क्योंकि लोग अभी असमंजस में हैं।
इतना ही नहीं, कोरोना काल से जूझने वाले लोगों को लगता है कि कोरोना संक्रमित होने के कारण रक्तदान नहीं कर सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमित होने पर निगेटिव रिपोर्ट आने के 14 दिन बाद कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। वैक्सीन लगवाने के 14 दिन बाद भी रक्त दिया जा सकता है।
कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनका सोचना है कि कोरोना काल के चलते रक्तदान ठीक नहीं है। ऐसे में केंद्र सरकार ने नेगवैक की ओर से एक गाइडलाइन जारी की है। इसमें बताया कि वैक्सीन लगवाने के 14 दिन के बाद कोई भी शख्स रक्तदान कर जरूरतमंद लोगों की मदद कर उनकी जान बचा सकते हैं। नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फॉर कोविड (नेगवैक) की गाइडलाइन के अनुसार अगर कोई शख्स कोरोना संक्रमित हो गया है।
उसकी रिपोर्ट निगेटिव आई है। उसके 14 दिन के बाद शख्स रक्तदान कर सकता है। कोरोना की दूसरी लहर के बाद अक्सर लोगों में देखा गया है कि जब ब्लड बैंक में लगने वाले कैंप में रक्तदान करने की बात आती हो तो लोग कोरोना संक्रमण का कहकर रक्तदान करने से दूरी बना रहे हैं। जिसका नतीजा है कि अब ब्लड बैंकों में ब्लड की कमी होने लगी है।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्ष मेडिसिन विभाग डॉ. एमएल अग्रवाल ने बताया कि कोरोना पॉजिटिव होने के बाद जब रिपोर्ट निगेटिव आती है। उसके 14 दिन बाद रक्तदान कर सकते हैं। इसी तरह वैक्सीनेशन के 14 दिन भी रक्तदान कर सकते हैं। रक्तदान करने से किसी तरह की कमजोरी नहीं आती है। रक्तदान करते हैं नया ब्लड शरीर में बनना शुरू हो जाता है। जो करीब एक माह में पूरा हो जाता है।
अमर उजाला फाउंडेशन लगाएगा रक्तदान शिविर
एक अक्टूबर को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से राजकीय मेडिकल कॉलेज में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। इसमें स्वैच्छिक रूप से लोग रक्तदान कर दूसरों का जीवन बचा सकते हैं।