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यकीं करो कि उजालों का सिलसिला हूं मैं...

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नववर्ष के उपलक्ष्य में हुई शाम-ए-गजल में रचनाएं प्रस्तुत करते कवि - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। राष्ट्रीय बहुजन सामाजिक परिसंघ की ओर से नववर्ष के उपलक्ष्य में एक शाम कौमी एकता के नाम कवि सम्मेलन एवं मुशायरा का आयोजन किया गया। सेवानिवृत्त कमिश्नर कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज कमल किशोर कठेरिया के तारीन जलालनगर स्थित आवास पर शायर अख्तर शाहजहांपुरी की अध्यक्षता में शायरों ने अपने गीत व गजलों माध्यम से देश के हालात और सामाजिक परिस्थितियों का वर्णन किया।
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शायर अख्तर शाहजहांपुरी ने फरमाया ‘समझ रहे हो कि बुझता हुआ दीया हूं मैं, यकीं करो कि उजालों का सिलसिला हूं मैं’ वरिष्ठ कवि ज्ञानेंद्र मोहन ज्ञान ने कहा कि ‘खिसक लिया एक वर्ष और छले गए एक बार फिर, स्मृतियों के असंख्य दीप, जले बुझे एक बार फिर।’ असगर यासिर ने मन की व्यथा को बयां करते हुए कहा कि ‘जो दिल में पल रही थी खलिश वह निकाल दी, हमने भी आज नांव समन्दर में डाल दी।’
आफताब आलम कामिल वारसी, राशिद हुसैन राही, शायरा व अधिवक्ता गुलिस्तां खान, खलीक शौक, शाहिद रजा, युवा कवि लालित्य पल्लव भारती, फहीम बिस्मिल, इशरत सगीर, मो. रिजवान, विकास सोनी ऋतुराज, याकूब सागर, राजीव गोस्वामी आतिश मुरादाबादी, शरीफ अमीन, मो. अफरोज खां, डा. मलिक असमत अली ने भी गीत-गजलें प्रस्तुत कीं।
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मुख्य आयोजक व संस्थाध्यक्ष केके कठेरिया ने कहा कि बुद्धिजीवी वर्ग को देश और समाज की बेहतरी के लिए आगे आना चाहिए। इस दौरान जरीफ मलिक आनंद, इमरान सईद, जहीर खान कलीमी, इरफान अहमद अंसारी, सईद बेग, सुरेश चंद्र, अरुण दीक्षित, आफाक हुसैन खां, शोभित गुप्ता, आरिफ खां, संजय राठौर, प्रशांत कठेरिया, डॉ. नुसरत, अनुज, कुंवर पाल, सर्वेश वर्मा, अनूप कुमार, शम्सुददीन आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ. मंसूर अहमद सिद्दीकी ने किया। संयोजक महबूब हुसैन इदरीसी ने अतिथियों का आभार जताया।
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