शाहजहांपुर। ‘पूरी दुनिया जानती है कि कश्मीर में पाकिस्तान पोषित आतंकवाद हमारे सैनिकों की जान ले रहा है। इसके बावजूद सरकार का ढीला रवैया आतंकवादियों के हौसले को इतना बुलंद करता रहा है कि वे ऐसे दुस्साहसी हमले की जुर्रत कर पाते हैं। सरकार को इस हमले के बाद पाकिस्तान पर बालाकोट एयरस्ट्राइक जैसे कड़े कदम उठाने चाहिए। कार्रवाई इतनी कठोर हो कि एक सैनिक की जान लेने के पहले पाकिस्तान सौ बार सोचे।’
सैनिक सारज सिंह की शहादत पर गम और गुस्से की ऐसी मिली-जुली प्रतिक्रिया है सेना मेडल से सम्मानित सेवानिवृत्त कर्नल कुशल कुमार चौधरी की। कुशल कुमार चौधरी ने 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में अदम्य साहस और बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए दुश्मन सेना के छक्के छुड़ा दिए थे। मंगलवार को जब सैनिक सारज सिंह की शहादत की सूचना उन्हें मिली तो वह बहुत गुस्से में नजर आए।
उन्होंने बातचीत में कहा कि कश्मीर में घुसपैठिए और लोकल आतंकवादियों को मारना समस्या का स्थायी हल नहीं है। कार्रवाई तो पाकिस्तान के खिलाफ होनी चाहिए। हमारा एक सैनिक अगर आतंकवादी हमले में शहीद हो तो बॉर्डर पर पाकिस्तान की कम से कम एक पोस्ट तबाह कर देनी चाहिए। सेना को आतंकवाद को सख्ती से कुचलने की पूरी छूट होनी चाहिए। केके चौधरी 1982 में कश्मीर में तैनात रह चुके हैं।
उन्होंने कहा कि कश्मीर में आज जरूरत है कि हर गली-मोहल्ले की सख्त निगरानी सेना करे। इमरजेंसी लगाकर एक-एक घर की चेकिंग होनी चाहिए। अलगाववादी नेताओं की परवाह न करें। केके चौधरी ने कहा कि श्रीलंका में नियुक्ति के दौरान उन्होंने ऐसा ही किया था। आतंकवाद की जड़ पर प्रहार करने के लिए पाकिस्तानी सेना को नेस्तनाबूत करने की जरूरत है। केके चौधरी को उम्मीद है कि मोदी सरकार देश की जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरेगी। (संवाद)
पाकिस्तान से युद्ध में दिखा चुके शौर्य
शाहजहांपुर के रहने वाले कुशल कुमार चौधरी (75) 1970 में सेकंड लेफ्टिनेंट के तौर पर सिख रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। एक साल बाद ही पाकिस्तान से जंग छिड़ गई। केके चौधरी उस वक्त अमृतसर सीमा पर प्लाटून के साथ पोस्ट पर थे। तभी पाकिस्तान की कंपनी के सौ-डेढ़ सौ जवानों ने हमला कर दिया। केके चौधरी के नेतृत्व में भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया। संख्या में ज्यादा होने के कारण पाक सैनिक जब पोस्ट के बेहद करीब आ गए तो केके चौधरी ने खुद लाइट मशीन गन लेकर आगे बढ़कर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। दुश्मन पीछे हटने को मजबूर हो गए। तभी दुश्मनों ने दूसरी ओर से हमला करने का प्रयास किया, लेकिन वहां भी केके चौधरी ने मशीनगन की फायरिंग से उनको रोक दिया। सिर्फ एक एलएमजी से केके चौधरी ने पाकिस्तानी सेना की पूरी कंपनी को पीछे ढकेल कर अपनी पोस्ट की रक्षा की। उनके इस अदम्य साहस के लिए उन्हें सेना मेडल से सम्मानित किया गया था।
बेटे ने भी कश्मीर में आतंकवाद को कुचला
रिटायर्ड कर्नल केके चौधरी और कर्नल एकेडमी की संचालिका नीला चौधरी के बेटे अभिनव चौधरी भी सेना में कर्नल थे। दो साल पहले उनकी असमय मृत्यु हो गई थी। रिटायर्ड कर्नल केके चौधरी बताते हैं कि अभिनव की 1995 से लेकर 1998 तक कश्मीर में नियुक्ति रही। तब वहां पर आतंकवाद काफी जोरों पर था। पुलवामा में नियुक्ति के दौरान कर्नल अभिनव चौधरी ने उस दौरान कई ऑपरेशन चलाकर आतंकवादियों की जड़ें हिला दी थीं।