शाहजहांपुर। कचहरी परिसर में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) के संयुक्त कार्यालय में अधिवक्ता भूपेंद्र प्रताप सिंह की गोली मारकर हत्या करने के मामले में आरोपी वकील सुरेश गुप्ता को मंगलवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने आरोपी को जेल भेज दिया। वहीं पुलिस रिपोर्ट में नामजद दो अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
सोमवार पूर्वाह्न करीब 11:45 पर कचहरी परिसर में दूसरी मंजिल पर स्थित एसीजेएम संयुक्त कार्यालय में सदर बाजार थाना क्षेत्र में बीबीजई हद्दफ निवासी भूपेंद्र प्रताप सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सूचना पर डीएम इंद्र विक्रम सिंह और एसपी एस. आनंद मौके पर पहुंचे और पुलिस को खुलासे के निर्देश दिए। सीसीटीवी की जांच में वकील सुरेश गुप्ता वारदात के वक्त एसीजेएम कार्यालय की सीढ़ियां चढ़ते देखा गया।
पुलिस ने कुछ देर बाद सुरेश गुप्ता को हिरासत में ले लिया था। पूछताछ में सुरेश गुप्ता ने 32 बोर के तमंचे से भूपेंद्र प्रताप सिंह की हत्या करना स्वीकार कर लिया। सुरेश गुप्ता ने बताया कि सन 2000 में उसने भूपेंद्र प्रताप सिंह से अपना मकान खाली कराया था। इसी रंजिश में भूपेंद्र ने पिछले 20 साल में उन पर 24 मुकदमे दर्ज करा दिए थे। इससे परेशान होकर सुरेश गुप्ता ने तमंचे से गोली मारकर भूपेंद्र प्रताप सिंह की हत्या कर दी थी। सुरेश गुप्ता को पूछताछ के बाद पुलिस ने मंगलवार सीजेएम कोर्ट में पेश किया। यहां से उसे को जेल भेज दिया गया।
एक गोली ही थी सुरेश गुप्ता के पास
सुरेश गुप्ता के मुताबिक, भूपेंद्र प्रताप सिंह ने उन पर बहुत सारे मुकदमे दर्ज करा रखे थे। इसी वजह से बैंक से रिटायर होने के बाद उन्होंने कानून की पढ़ाई की और 2019 में बार एसोसिएशन में अपना पंजीकरण करा लिया था। सुरेश गुप्ता ने पुलिस को बताया कि उनके पास काफी समय से एक 32 बोर का तमंचा रखा हुआ था। उनके पास एक ही गोली थी। पुलिस के मुताबिक सुरेश गुप्ता बुजुर्ग है।
वह न तो अपराधियों से सांठगांठ कर वारदात के लिए अतिरिक्त गोलियां खरीद सकता और न बहुत ज्यादा भूपेंद्र प्रताप सिंह की रेकी कर सकता था। वह बहुत परेशान था और उसे कचहरी में ही हत्या करना मुफीद लगा। सुरेश गुप्ता ने यह भी नहीं सोचा कि अगर एक गोली मिस हो जाती तो क्या होता। वहीं भूपेंद्र प्रताप सिंह के भाई योगेंद्र सिंह ने बताया कि सुरेश गुप्ता इससे पहले कई बार भूपेंद्र पर हमला करा चुका था। एक हमला तिलहर में भी कराया था, लेकिन वह बच गए थे।
हत्या करना हल नहीं, परिजनों से करनी थी बात
मनोचिकित्सक डॉ. संजीव सिंह ने बताया कि इस उम्र में किसी की हत्या कर देना किसी समस्या का हल नहीं हो सकता। आरोपी अगर परेशान था तो उसे अपने बेटों और परिजन से चर्चा करनी चाहिए थी। निश्चित तौर पर कानूनी तरीका निकलता, जिससे कि एक व्यक्ति की जान भी न जाती और इतनी उम्र में आरोपी भी जेल न जाना पड़ता। आरोपी सुरेश गुप्ता अगर परिजन से बातचीत करता तो वह लोग उसका हौसला बढ़ाते। शायद परिजन भी भांप नहीं पाए कि वह इतना बड़ा कदम उठाने जा रहा है। परेशानियों में घिरने पर व्यक्ति को सभी से सलाह-मशविरा जरूर करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर काउंसिलिंग भी कराई जानी चाहिए।
आरोपी ने सोमवार को गिरफ्तारी के बाद ही पुलिस के सामने घटना करना कुबूल कर लिया था। हत्या करने का उसके पास कारण भी था। मंगलवार को आरोपी को जेल भेज दिया है। सीसीटीवी कैमरे में सिर्फ आरोपी दिख रहा है। रिपोर्ट में नामजद कराए गए उसके आरोपी बेटे सीसीटीवी में नहीं दिख रहे हैं। अगर जांच के दौरान उनकी संलिप्तता पाई जाती है तो उनके ऊपर भी कार्रवाई की जाएगी।
संजय कुमार, एसपी सिटी