तिलहर। लॉकडाउन के बावजूद हरियाणा और पंजाब से मजदूरों का पलायन पैदल और साइकिलों से लगातार जारी है। पंजाब के विभिन्न हिस्सों से ऐसे ही कई मजदूर रविवार को साइकिल और पैदल करीब 600 किलोमीटर का सफर तय करके तिलहर पहुंचे। इस दौरान जब उनसे बात की गई तो उनका दर्द छलक आया। लगभग दो दर्जन मजदूरों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि वे आठ-दस दिन से पंजाब और हरियाणा से चले हुए हैं। पैसा खत्म हो गया, खाने पीने को कुछ नहीं मिल रहा है, भुखमरी के कगार पर पहुंचे तो पैदल और साइकिल से ही निकल पड़े।
गाजीपुर निवासी बृजेश, शिवा और सत्यदेव ने बताया कि वे पंजाब के पटियाला से सात दिन पहले साइकिल से चले थे। वहां एक फैक्टरी में मजदूरी करते थे। फैक्टरी बंद होने के कारण वहां खाने पीने को कुछ नहीं मिल रहा मजबूरन घर के लिए चल दिए। औरंगाबाद के रहने वाले सुनील ने बताया कि वह हरियाणा के पानीपत में काम करते थे और पांच दिन पहले साइकिल से घर के लिए चले थे। इसी तरह गोरखपुर के रहने वाले मुकेश यादव, दीपक, संदीप, विनोद और राजीव यादव ने बताया कि हम सभी पंजाब के जालंधर से छह दिन पहले साइकिल से चले थे। आज (रविवार) यहां पहुंचे हैं, वहां पर एक भट्टे पर लेबर का काम करते थे। काम बंद हो जाने के कारण भुखमरी से हाल बेहाल हो रहा था, इस कारण साइकिल से घर जा रहे हैं। बताया कि पंजाब में खाने-पीने की बहुत दिक्कत थी, यूपी में आने के बाद खान-पीने को मिल रहा है, पुलिस भी मदद कर रही है।
काम बंद हुआ तो ठेकेदार ने भी नहीं दिए पैसे
प्रतापगढ़ के रहने वाले पैदल यात्री विष्णु प्रसाद और मोहित सिंह ने बताया कि वे 10 दिन पहले पंजाब के लुधियाना से चले थे। बमुश्किल यहां तक पहुंचे हैं, शनिवार से कुछ खाया पिया भी नहीं है। एक ठेकेदार के माध्यम से पहली बार लुधियाना गए थे। वहां एक टी-शर्ट फैक्टरी में काम करते थे। काम बंद होने के बाद ठेकेदार ने पैसे भी नहीं दिए। इस कारण हम लोग पैदल चल दिए हैं।
कहीं भी जांच और रोकटोक नहीं
शासन प्रशासन के निर्देशों के बावजूद पलायन करके आ रहे मजदूरों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है। ऐसे लोगों को रोककर उनकी जांच भी नहीं की जा रही है। लगातार हो रहे पलायन से प्रशासन के आदेशों की धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं।