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खरीफ सीजन में 1.70 लाख टन उर्वरक खपने का अनुमान, शासन को भेजी मांग

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शाहजहांपुर। खरीफ सीजन में धान की रोपाई समेत अन्य फसलों की बुआई का समय नजदीक आ गया है। इसी के साथ एक बार फिर उर्वरकों, विशेषकर यूरिया और डीएपी की मांग बढ़ने पर उनकी कालाबाजारी और ओवररेटिंग से लेकर टैगिंग रोकना प्रशासन के लिए चुनौती बन सकता है। एक अनुमान के मुताबिक खरीफ सीजन में 1.70 लाख टन उर्वरक खप सकता है।
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पिछले सीजन में यूरिया और रबी सीजन में गेहूं की फसल के लिए डीएपी की मांग बढ़ते ही फुटकर विक्रेताओं ने प्रति बैग 30 से 40 रुपये ज्यादा वसूले थे। कृषि विभाग ने उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने की कवायद शुरू कर दी है। अधिकारियों का दावा है कि लगभग 2.67 लाख हेक्टेयर खरीफ फसली क्षेत्रफल की मांग के अनुरूप पहले चरण में इस्तेमाल होने वाले उर्वरकों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसके बावजूद पूरे सीजन के लिए 1.70 लाख टन से अधिक उर्वरकों की मांग शासन को भेजी गई है।
खरीफ सीजन 2022-23 में धान की विभिन्न किस्मों के लिए 207332 हेक्टेयर, मक्का, ज्वार, बाजरा आदि फसलों के लिए 6848 हेक्टेयर, दलहन के लिए 370 हेक्टेयर और तिलहनी फसलों के लिए 13244 हेक्टेयर रकबा सुरक्षित किया गया है। मानसून लेट होने और जून माह में पर्याप्त वर्षा नहीं होने की दशा में धान की रोपाई प्रभावित होने पर किसान विकल्प तौर पर करीब 25 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में मूंगफली, मक्का, ज्वार, बाजरा, उड़द, तिल, सोयाबीन आदि की बुआई करते हैं। शासन को भेजी गई उर्वरकों की मांग में इन वैकल्पिक फसलों में होने वाली उर्वरक खपत का भी ध्यान रखा गया है।
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उर्वरकों का खरीफ लक्ष्य, उपलब्धता और वितरण (टन में)
उर्वरक कुल लक्ष्य जून मेें लक्ष्य उपलब्धता वितरण
यूरिया 123686 53117 41630 18286
डीएपी 25687 14267 15932 6473
एनपीके 4244 2004 680 99
एमओपी 7173 3031 2361 537
एसएसपी 10025 5594 6942 2691
अभी खरीफ सीजन की शुरुआत नहीं हुई है, फिर भी यूरिया समेत सभी उर्वरक मासिक लक्ष्य से अधिक उपलब्ध हैं। पूरे सीजन के लिए शासन से एक लाख, 70 हजार, 815 टन उर्वरकों की मांग की गई है। सबसे ज्यादा 1.16 लाख टन उर्वरक निजी क्षेत्र को दिए जाएंगे। बाजार में नैनो यूरिया भी आ गई है, लेकिन उस पर अनुदान नहीं मिलेगा। इसीलिए नैनो यूरिया का वितरण विभाग नहीं कर रहा है और वह किसानों को खुले बाजार में निर्माता कंपनी से निर्धारित मूल्य पर उपलब्ध होगी। -डॉ. सतीश चंद्र पाठक, जिला कृषि अधिकारी
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