- कहीं जमीन विवाद तो कहीं लापरवाही से नहीं बन पाई चहारदीवारी
संवाद न्यूज एजेंसी
संतकबीरनगर। जिले के परिषदीय विद्यालयों को कायाकल्प के तहत चमकाने का दावा भले ही विभाग कर रहा हो, लेकिन हकीकत इससे परे है। 260 परिषदीय स्कूलोंं में अभी भी चहारदीवारी नहीं बन पाई है। जिसकी वजह से इन विद्यालयों में जानवरों के आने का हमेशा भय बना रहता है।
कायाकल्प योजना के तहत करीब चार साल से विद्यालयों की तस्वीर बदली जा रही है। शिक्षा और पंचायती राज विभाग के संयुक्त प्रयास से विद्यालयों का कायाकल्प हो रहा है। लेकिन अब भी 260 विद्यालय ऐसे है जहां पर सभी कार्य पूर्ण नहीं हो पाए हैं। खलीलाबाद क्षेत्र के जूनियर हाईस्कूल खलीलाबाद, कंपोजिट विद्यालय पटखौली, उच्च प्राथमिक विद्यालय बड़गो, हैंसर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय मैली, औटना, डुहिया, बरगाह, सियर कला, बेदौली, दुधरा कला दक्षिणी समेत 260 विद्यालयों में चहारदीवारी का निर्माण नहीं हो पाया।
खलीलाबाद के कंपोजिट विद्यालय पटखौली के प्रधानाध्यापक दिनेश कुमार के मुताबिक चहारदीवारी न होने से जानवरों के आने का भय रहता है। विद्यालय के सामने तो चहारदीवारी है पर पीछे और अगल-बगल चहारदीवारी न होने से बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा खतरा रहता है। छुट्टा पशु भी परिसर में आ जाते हैं। साथ ही अराजत तत्व भी विद्यालय में आते हैं।
विकास खंड पौली के 85 विद्यालयों में से 12 विद्यालयों में चहारदीवारी नहीं है। प्राथमिक विद्यालय डेफरा पोखरे के किनारे बनाया गया है। चहारदीवारी न होने से दोपहर में भोजन के समय भी शिक्षकों को बच्चों पर कड़ी नजर रखनी पड़ती है। यही हाल अन्य ब्लॉकों के विद्यालयों का है। बीएसए अमित सिंह का कहना है कि चहारदीवारी के लिए विकास विभाग को पत्र भेजा गया है। विद्यालयों की सूची भी दी गई है। जल्द ही इस ओर ठोस कदम उठाया जाएगा।
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जिन विद्यालयों में चहारदीवारी नहीं है, उन्हें बनवाने के लिए पूरा प्रयास होगा। इसके लिए पंचायत विभाग और बेसिक विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा।
- महेंद्र सिंह तंवर, डीएम