- वायु प्रदूषण के चलते सांस लेने में हो रही तकलीफ
- सहालग के चलते वाहनों की आवाजाही में बढ़ोतरी
- एक्यूआई का स्तर 155 पहुंच गया
संतकबीरनगर। दीपावली के एक दिन बाद से प्रदूषण का स्तर खराब हो गया। एक्यूआई 273 पर पहुंच गया था। एक सप्ताह बाद हवा के स्तर में सुधार हुआ तो 135 पहुंच गया था, लेकिन एक बार फिर सहालग के चलते वाहनों की आवाजाही में बढ़ोतरी हुई है। गाड़ियों से निकलने वाले धुएं और पराली जलाने से लोग एक बार फिर वायु प्रदूषण की गिरफ्त में आ गए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक सुबह जो कोहरा दिखाई दे रहा है वह धुंध है। वातावरण में कार्बनडाई ऑक्साइड की मात्रा अधिक हो गई है, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। एक्यूआई का स्तर 155 पहुंच गया है।
खेतों में किसान धड़ल्ले से बेखौफ होकर पराली जला रहे हैं। उन्हें न तो प्रशासन की कार्रवाई का डर है और न ही कोर्ट के आदेश की परवाह। ऐसे में पराली जलाने के कारण प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। चारों ओर धुंध फैलने से लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। जिले में धान और गेहूं की खेती प्रमुख रूप से की जाती है। इस समय धान की कटाई का समय चल रहा है। इस बार बाढ़ और बारिश की वजह से फसल को काफी नुकसान हुआ है, ऐसे में इस बार कटाई भी देर से शुरू हो हुई है।
दोबारा बारिश या नुकसान की आशंका को देखते हुए किसानों ने फसल को मजदूरों के बजाय कंबाइन मशीन से काटना शुरू कर दिया है। धान की कटाई के बाद बची फसल के अवशेष के निस्तारण करने के बजाय कई किसान इसे खेतों में जला रहे हैं। पराली जलने से जहां इसका धुआं वातावरण के प्रदूषण में बढ़ोतरी कर रहा है, वहीं सांस के रोगियों को भी दिक्कत हो रही है।
इसके अलावा सहालग के चलते वाहनों की आवाजाही में बढ़ोतरी हो रही है। वाहनों से निकलने वाला धुंआ भी वायु प्रदूषण बढ़ा रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक इस समय वातावरण में कार्बनडाई ऑक्साइड की मात्रा काफी अधिक है। यह पराली जलाने से बढ़ी है। एक्यूआई का स्तर फिर 155 आ गया है। अगर यही हाल रहा तो इसका स्तर बढ़ता जाएगा, जिससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ आएगी।
नाइट्रोजन ऑक्साइड और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक का जहरीला संयोजन है धुंध
एचआरपीजी कॉलेज के भूगोल विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नेहा सिंह ने बताया कि धुंध एक प्रकार का वायु प्रदूषण है, जो हवा की दृश्यता को कम करके देखना मुश्किल बना देता है। यह गाड़ियों के धुएं और पराली जलाने से होता है। ये नाइट्रोजन ऑक्साइड, वाष्पशील कार्बनिक यौगिक और अन्य प्रदूषकों का एक जहरीला संयोजन है, जो जमीन स्तर के ओजोन की घनी परत उत्पन्न करने के लिए सूर्य के प्रकाश के साथ प्रक्रिया करता है। धुंध पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक है। इससे सांस लेने में तकलीफ होती और धुंध से निकले कण से आंखों में जलन होती है। यह धुंध कुछ हानिकारक रसायनों जैसे खासकर सल्फर डाइऑक्साइड नाइट्रोजन डाइऑक्साइड कार्बन मोनोऑक्साइड के साथ सूर्य प्रकाश के संपर्क के परिणाम स्वरूप में बनता है जो मानव फेफड़ों में आसानी से अपना रास्ता खोज सकते हैं। ऐसे में लोगों को मास्क लगाकर निकलना चाहिए।
वायु प्रदूषण के चलते सांस के मरीज बढ़े
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. आनंद प्रकाश मिश्र ने बताया कि इस समय वायु प्रदूषण के चलते सांस के मरीज बढ़े हैं। प्रतिदिन 70 से 80 मरीज इससे संबंधित पहुंच रहे हैं। डॉक्टर का कहना है कि जहां तक हो सके जहां धूल और धुआं दिख रहा हो वहां पर न जाएं। मास्क का प्रयोग जरूर किया करें।
हफ्ते भर का एक्यूआई का स्तर
16 नवंबर - 145
17 नवंबर - 149
18 नवबर - 149
20 नवंबर - 151
21 नवंबर - 153
22 नवंबर - 155